जयपुर, 28 अप्रैल: राजस्थान ने सौर ऊर्जा के क्षेत्र में एक बड़ा कदम उठाते हुए प्रधानमंत्री कुसुम योजना के तहत राज्य का सबसे बड़ा सोलर पावर प्लांट शुरू कर दिया है। यह 4.9 मेगावाट क्षमता वाला प्लांट जयपुर जिले के टाला (कुंडा की ढाणी) क्षेत्र में स्थापित किया गया है।
इस प्रोजेक्ट का उद्देश्य किसानों को दिन के समय भरोसेमंद बिजली उपलब्ध कराना है, जिससे सिंचाई और कृषि कार्य आसान हो सकें।
कैसा है यह सोलर पावर प्रोजेक्ट?
यह सोलर प्लांट जयपुर डिस्कॉम (नॉर्थ) के कुंडा की ढाणी पावर सब-डिवीजन के तहत 33 केवी सबस्टेशन से जुड़ा हुआ है। इसे डेकला गांव में लगभग 24 बीघा जमीन पर स्थापित किया गया है।
इस प्लांट से 437 किसानों को दिन के समय बिजली सप्लाई की जाएगी, जिससे उन्हें रात में सिंचाई करने की मजबूरी कम होगी।
किसानों के लिए क्यों है बड़ा बदलाव?
अब तक कई इलाकों में किसानों को बिजली रात में मिलती थी, जिससे उन्हें देर रात तक खेतों में काम करना पड़ता था। इस सोलर प्लांट के शुरू होने से—
- दिन में सिंचाई संभव होगी
- डीजल पंप पर निर्भरता कम होगी
- लागत घटेगी और उत्पादकता बढ़ेगी
यह बदलाव सीधे तौर पर किसानों की आय और जीवनशैली दोनों पर सकारात्मक असर डाल सकता है।
PM Kusum योजना का रोल
Pradhan Mantri Kusum Yojana (PM Kusum योजना) का उद्देश्य किसानों को सौर ऊर्जा से जोड़ना और कृषि क्षेत्र में बिजली की समस्या को दूर करना है।
इस योजना के Component-C के तहत 5 मेगावाट तक के सोलर प्लांट लगाए जा सकते हैं, जिससे स्थानीय स्तर पर बिजली उत्पादन बढ़े और ग्रिड पर दबाव कम हो।
राजस्थान क्यों आगे है सोलर में?
राजस्थान भारत के उन राज्यों में शामिल है जहां सौर ऊर्जा की अपार संभावनाएं हैं। यहां धूप की उपलब्धता अधिक होने के कारण बड़े स्तर पर सोलर प्रोजेक्ट्स तेजी से विकसित हो रहे हैं।
सरकार का फोकस अब बड़े सोलर पार्क के साथ-साथ छोटे, विकेंद्रीकृत (decentralised) प्रोजेक्ट्स पर भी है—जैसे यह 4.9 MW का प्लांट—ताकि सीधे गांव और किसानों को फायदा मिल सके।
आगे क्या असर पड़ेगा?
विशेषज्ञ मानते हैं कि इस तरह के प्रोजेक्ट्स से न केवल कृषि क्षेत्र मजबूत होगा, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में हरित ऊर्जा (green energy) का इस्तेमाल भी तेजी से बढ़ेगा।
अगर यह मॉडल सफल रहता है, तो आने वाले समय में राजस्थान के अन्य जिलों में भी ऐसे और सोलर प्लांट लगाए जा सकते हैं।
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