नई दिल्ली। पिछले कुछ वर्षों में सोने ने निवेशकों को शानदार रिटर्न दिया है। वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता, केंद्रीय बैंकों की खरीदारी और भू-राजनीतिक तनाव के कारण गोल्ड की कीमतों में लगातार तेजी देखने को मिली। यही वजह है कि बड़ी संख्या में निवेशकों ने सोने को सबसे सुरक्षित निवेश विकल्प मानते हुए इसमें पैसा लगाया। लेकिन अब एक ऐसे दिग्गज फंड मैनेजर ने निवेशकों को चेतावनी दी है, जिनकी पिछली कई भविष्यवाणियां बिल्कुल सही साबित हुई हैं।
आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल एएमसी के फिक्स्ड इनकम सीआईओ मनीष बांथिया का मानना है कि मौजूदा समय में सोना निवेश के लिहाज से पहले जितना आकर्षक नहीं रह गया है। उनका कहना है कि मौजूदा वैल्यूएशन को देखते हुए नई पूंजी सोने में लगाने से बचना चाहिए। इसके बजाय निवेशकों को शेयर बाजार और डेट मार्केट जैसे विकल्पों पर अधिक ध्यान देना चाहिए।
कौन हैं मनीष बांथिया और क्यों महत्वपूर्ण है उनकी राय?
मनीष बांथिया देश के प्रमुख फिक्स्ड इनकम निवेश विशेषज्ञों में गिने जाते हैं। वे आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल एएमसी में लगभग 2.7 लाख करोड़ रुपये के डेट एसेट्स के प्रबंधन से जुड़े हैं। निवेश जगत में उनकी पहचान केवल एक फंड मैनेजर के रूप में नहीं बल्कि दीर्घकालिक निवेश रुझानों को समझने वाले विशेषज्ञ के रूप में भी है।
नवंबर 2023 में जब अधिकांश निवेशक सोने को लेकर निराश थे और कीमतों में बड़ी तेजी की उम्मीद कम थी, तब बांथिया ने बुलियन में निवेश की सलाह दी थी। इसके बाद सोने में आई मजबूत तेजी ने उनकी राय को सही साबित किया। इसी तरह दिसंबर 2025 में उन्होंने चांदी में तेजी के चरम पर पहुंचने की चेतावनी दी थी, जो बाद में काफी हद तक सटीक साबित हुई।
यही कारण है कि इस बार सोने को लेकर उनकी नई चेतावनी निवेशकों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है।
आखिर क्यों बदल गया सोने को लेकर नजरिया?
इकोनॉमिक टाइम्स को दिए गए इंटरव्यू में बांथिया ने कहा कि 2023 में जो परिस्थितियां सोने के पक्ष में थीं, वे अब काफी हद तक बदल चुकी हैं।
उनके अनुसार उस समय वैश्विक स्तर पर डी-डॉलराइजेशन की चर्चा बढ़ रही थी। कई केंद्रीय बैंक अमेरिकी डॉलर पर निर्भरता कम करने के लिए सोने की खरीदारी कर रहे थे। बाजार में निवेशकों की दिलचस्पी सीमित थी और सोने का वैल्यूएशन अपेक्षाकृत आकर्षक दिखाई देता था।
लेकिन अब तस्वीर बदल चुकी है। सोने में निवेशकों का उत्साह काफी बढ़ गया है और कीमतें लंबे समय तक तेजी देखने के बाद महंगे स्तर पर पहुंच गई हैं। ऐसे में आगे की संभावित कमाई पहले की तुलना में सीमित हो सकती है।
बांथिया का मानना है कि वर्तमान कीमतों में पहले से ही अधिकांश सकारात्मक कारकों का असर शामिल हो चुका है। इसलिए यहां से सोने में नई बड़ी तेजी की संभावना पहले जितनी मजबूत नहीं दिखाई देती।
केंद्रीय बैंकों की खरीदारी भी धीमी पड़ रही
सोने की तेजी का सबसे बड़ा आधार पिछले कुछ वर्षों में केंद्रीय बैंकों की मजबूत खरीदारी रही थी। दुनिया के कई देशों ने अपने विदेशी मुद्रा भंडार में सोने की हिस्सेदारी बढ़ाई।
हालांकि अब विशेषज्ञों का मानना है कि केंद्रीय बैंकों की खरीदारी की रफ्तार पहले की तुलना में धीमी हो रही है। कीमतों में तेज उछाल के बाद कई संस्थानों ने मुनाफावसूली भी शुरू कर दी है।
यदि यह रुझान जारी रहता है तो सोने को वह मजबूत समर्थन नहीं मिल पाएगा जिसने पिछले वर्षों में इसकी कीमतों को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया।
ETF निवेश ने बढ़ाई तेजी
बांथिया का मानना है कि हालिया तेजी का बड़ा हिस्सा केंद्रीय बैंकों की खरीदारी से नहीं बल्कि ETF निवेश और सट्टा प्रवाह से आया है।
गोल्ड ETF और सिल्वर ETF में बढ़ते निवेश ने कीमतों को अतिरिक्त समर्थन दिया। भारत सहित कई देशों में खुदरा निवेशकों ने बड़ी मात्रा में ETF के जरिए कीमती धातुओं में निवेश किया।
विशेषज्ञों के अनुसार यदि निवेशकों का रुझान बदलता है तो ETF से निकासी भी तेजी से हो सकती है, जिससे कीमतों पर दबाव बन सकता है।
क्या अगले 3 से 5 साल में शेयर बाजार आगे निकल सकता है?
मनीष बांथिया का मानना है कि अगले तीन से पांच वर्षों में इक्विटी बाजार सोने की तुलना में बेहतर प्रदर्शन कर सकता है।
उनके अनुसार 2024 में भारतीय शेयर बाजार काफी महंगे वैल्यूएशन पर पहुंच गया था। उस समय कई विशेषज्ञ बाजार को लेकर सतर्क थे। लेकिन बाद में आई गिरावट और करेक्शन के बाद कई अच्छी कंपनियों के शेयर अब अधिक उचित स्तरों पर उपलब्ध हैं।
घरेलू अर्थव्यवस्था की मजबूती, कॉर्पोरेट आय में संभावित वृद्धि और लंबी अवधि के विकास की संभावनाएं भारतीय इक्विटी बाजार को आकर्षक बनाती हैं।
इसी वजह से वे मानते हैं कि लंबी अवधि के निवेशकों को इक्विटी पर अधिक ध्यान देना चाहिए।
डेट मार्केट क्यों बन रहा है पसंदीदा विकल्प?
बांथिया केवल शेयर बाजार की बात नहीं कर रहे हैं। उनका कहना है कि डेट मार्केट भी इस समय निवेशकों को आकर्षक अवसर प्रदान कर रहा है।
उच्च यील्ड वाले बॉन्ड और डेट फंड निवेशकों को अपेक्षाकृत स्थिर रिटर्न देने की क्षमता रखते हैं। जिन निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता सीमित है, उनके लिए डेट निवेश पोर्टफोलियो में स्थिरता ला सकता है।
ब्याज दरों के मौजूदा माहौल में कई डेट इंस्ट्रूमेंट्स निवेशकों को आकर्षक रिटर्न की संभावना प्रदान कर रहे हैं। यही वजह है कि वे इक्विटी और डेट के संयोजन को सोने की तुलना में अधिक बेहतर विकल्प मानते हैं।
अगर आपके पास 10 लाख रुपये हों तो क्या करें?
बांथिया के निवेश फ्रेमवर्क के अनुसार वर्तमान समय में नई पूंजी को सोने में लगाने के बजाय इक्विटी और डेट के बीच संतुलित तरीके से बांटना अधिक उपयुक्त हो सकता है।
उदाहरण के तौर पर यदि किसी निवेशक के पास 10 लाख रुपये हैं तो वह अपनी जोखिम क्षमता के अनुसार इक्विटी और डेट के बीच निवेश का संतुलन बना सकता है। इससे उसे संभावित ग्रोथ और स्थिर रिटर्न दोनों का लाभ मिल सकता है।
हालांकि यह केवल एक सामान्य रणनीति है। किसी भी निवेशक के लिए अंतिम निर्णय उसकी आयु, वित्तीय लक्ष्य, जोखिम क्षमता और निवेश अवधि को ध्यान में रखकर ही लिया जाना चाहिए।
क्या पूरी तरह सोना छोड़ देना चाहिए?
अधिकांश वित्तीय सलाहकार मानते हैं कि सोना अभी भी पोर्टफोलियो विविधीकरण का महत्वपूर्ण हिस्सा है। आर्थिक संकट, मुद्रास्फीति और वैश्विक तनाव के समय सोना सुरक्षा कवच की तरह काम करता है।
इसलिए निवेशकों को सोने को पूरी तरह नजरअंदाज करने के बजाय अपने पोर्टफोलियो में सीमित हिस्सेदारी बनाए रखने पर विचार करना चाहिए। हालांकि नए निवेश के मामले में मौजूदा वैल्यूएशन को ध्यान में रखना जरूरी है।
निष्कर्ष
मनीष बांथिया की राय ऐसे समय में आई है जब सोना पिछले कुछ वर्षों की तेज बढ़त के बाद ऊंचे स्तरों पर कारोबार कर रहा है। उनका मानना है कि सोने में अब पहले जैसी आकर्षक वैल्यूएशन नहीं बची है और अगले कुछ वर्षों में इक्विटी तथा डेट मार्केट बेहतर अवसर प्रदान कर सकते हैं।
हालांकि निवेशकों को किसी एक एसेट क्लास पर पूरी तरह निर्भर रहने के बजाय संतुलित और विविधीकृत पोर्टफोलियो बनाने की रणनीति अपनानी चाहिए। यही लंबी अवधि में संपत्ति निर्माण और जोखिम प्रबंधन का सबसे प्रभावी तरीका माना जाता है।
डिस्क्लेमर: यह लेख केवल जानकारी के उद्देश्य से है। इसमें दिए गए विचार संबंधित विशेषज्ञ के हैं। निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से परामर्श अवश्य करें।
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