नई दिल्ली: सोने और चांदी की कीमतों में गुरुवार, 11 जून को एक बार फिर बड़ी गिरावट दर्ज की गई। पिछले कुछ हफ्तों से जारी उतार-चढ़ाव के बीच कीमती धातुओं पर दबाव बढ़ता दिखाई दे रहा है। इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन (IBJA) के ताजा आंकड़ों के अनुसार 24 कैरेट सोना एक महीने में ₹15,765 प्रति 10 ग्राम तक सस्ता हो चुका है, जबकि चांदी की कीमत में ₹53,810 प्रति किलोग्राम की गिरावट दर्ज की गई है।
मध्य पूर्व में जारी तनाव, अमेरिकी अर्थव्यवस्था से जुड़े मजबूत आंकड़े, डॉलर की मजबूती और ब्याज दरों को लेकर केंद्रीय बैंकों के सख्त रुख ने सोना-चांदी की कीमतों पर दबाव बढ़ाया है। इसके अलावा हाल के महीनों में रिकॉर्ड तेजी देखने के बाद निवेशकों की मुनाफावसूली भी बाजार में गिरावट की बड़ी वजह मानी जा रही है।
कॉमेक्स और एमसीएक्स पर कहां पहुंचा सोना-चांदी?
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कॉमेक्स पर सोना करीब 4,100 डॉलर प्रति औंस और चांदी 64 डॉलर प्रति औंस के आसपास कारोबार करती दिखाई दी। वहीं घरेलू वायदा बाजार मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर अगस्त डिलीवरी वाला सोना 448 रुपये की गिरावट के साथ 1,47,569 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर कारोबार कर रहा था।
चांदी में भी कमजोरी देखने को मिली। एमसीएक्स पर चांदी का वायदा भाव 1,003 रुपये गिरकर 2,34,502 रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच गया। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि फिलहाल निवेशक अमेरिकी फेडरल रिजर्व की आगामी नीतियों, डॉलर इंडेक्स और कच्चे तेल की चाल पर नजर बनाए हुए हैं।
IBJA पर कितना सस्ता हुआ सोना और चांदी?
इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन (IBJA) द्वारा जारी दरों के मुताबिक 11 जून को 24 कैरेट सोने का भाव 1,45,584 रुपये प्रति 10 ग्राम दर्ज किया गया। एक दिन पहले यह कीमत 1,48,429 रुपये थी। यानी केवल 24 घंटे में सोना 2,845 रुपये प्रति 10 ग्राम सस्ता हो गया।
वहीं चांदी की कीमत 2,33,540 रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच गई। पिछले कारोबारी दिन इसका भाव 2,36,280 रुपये था। इस तरह एक दिन में चांदी में 2,740 रुपये प्रति किलोग्राम की गिरावट दर्ज की गई।
विशेषज्ञों का मानना है कि हालिया गिरावट का बड़ा कारण रिकॉर्ड ऊंचाई से निवेशकों की मुनाफावसूली है। जनवरी और फरवरी में तेज खरीदारी के बाद अब कई निवेशक अपने मुनाफे को बुक कर रहे हैं।
एक महीने में कितना टूटा सोना और चांदी?
IBJA के आंकड़े बताते हैं कि 14 मई को 24 कैरेट सोने की कीमत 1,61,349 रुपये प्रति 10 ग्राम थी। आज यही कीमत घटकर 1,45,584 रुपये रह गई है। इसका मतलब है कि सिर्फ एक महीने में सोना 15,765 रुपये प्रति 10 ग्राम तक सस्ता हो चुका है।
चांदी में गिरावट और भी ज्यादा देखने को मिली है। 14 मई को चांदी का भाव 2,87,350 रुपये प्रति किलोग्राम था, जो अब घटकर 2,33,540 रुपये रह गया है। यानी केवल एक महीने में चांदी 53,810 रुपये प्रति किलोग्राम टूट चुकी है।
बाजार के जानकारों का कहना है कि इतनी बड़ी गिरावट के बाद ज्वेलरी खरीदने वालों और लंबी अवधि के निवेशकों की दिलचस्पी फिर बढ़ सकती है।
ऑल टाइम हाई से कितना नीचे आ चुके हैं भाव?
इस साल जनवरी में सोना और चांदी दोनों ने ऐतिहासिक रिकॉर्ड बनाए थे। IBJA के अनुसार 29 जनवरी को 24 कैरेट सोना 1,75,340 रुपये प्रति 10 ग्राम के ऑल टाइम हाई पर पहुंच गया था।
आज की कीमतों से तुलना करें तो सोना अपने रिकॉर्ड स्तर से 29,756 रुपये प्रति 10 ग्राम नीचे कारोबार कर रहा है।
इसी तरह चांदी ने भी 29 जनवरी को 3,79,988 रुपये प्रति किलोग्राम का रिकॉर्ड स्तर छुआ था। वर्तमान भाव 2,33,540 रुपये प्रति किलोग्राम है। इसका मतलब है कि चांदी अपने ऑल टाइम हाई से 1,46,448 रुपये प्रति किलोग्राम सस्ती हो चुकी है।
यह गिरावट दर्शाती है कि रिकॉर्ड तेजी के बाद बाजार में बड़ा करेक्शन देखने को मिला है।
पहली बार कब 1 लाख रुपये के पार पहुंचा था सोना?
IBJA के प्रवक्ता और बुलियन विशेषज्ञ सीए सुरेंद्र मेहता के अनुसार सोने ने पहली बार 23 जुलाई 2025 को 1 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम का स्तर पार किया था। वहीं चांदी ने 3 जून 2025 को पहली बार 1 लाख रुपये प्रति किलोग्राम का आंकड़ा पार किया था।
हालांकि हालिया गिरावट के बावजूद पिछले एक साल का प्रदर्शन अभी भी बेहद मजबूत बना हुआ है। जून 2025 की तुलना में जून 2026 तक सोना करीब 67,000 रुपये प्रति 10 ग्राम महंगा हुआ है। वहीं चांदी में लगभग 1.46 लाख रुपये प्रति किलोग्राम की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
यानी अल्पकालिक गिरावट के बावजूद लंबी अवधि के निवेशकों को अब भी शानदार रिटर्न मिला है।
आखिर क्यों गिर रहे हैं सोने-चांदी के दाम?
एलकेपी सिक्योरिटीज के वाइस प्रेसिडेंट रिसर्च (कमोडिटी एवं करेंसी) जतिन त्रिवेदी के अनुसार सोने की कीमतों में हाल के दिनों में काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। बाजार की शुरुआत कमजोरी के साथ हुई थी लेकिन निचले स्तरों पर खरीदारी लौटने से कीमतों में कुछ सुधार भी देखने को मिला।
उनके मुताबिक अमेरिकी अर्थव्यवस्था से जुड़े मजबूत आंकड़ों के कारण निवेशकों को उम्मीद है कि ब्याज दरें लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बनी रह सकती हैं। जब ब्याज दरें ऊंची रहती हैं तो सोने जैसे बिना ब्याज वाले निवेश विकल्पों की मांग प्रभावित होती है।
इसके अलावा डॉलर की मजबूती भी सोने पर दबाव डाल रही है। मजबूत डॉलर की वजह से अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना अन्य देशों के निवेशकों के लिए महंगा हो जाता है, जिससे मांग प्रभावित होती है।
कच्चे तेल की चाल का भी पड़ रहा असर
जतिन त्रिवेदी के अनुसार कच्चे तेल में भी हाल के दिनों में भारी उतार-चढ़ाव देखा गया है। एक समय कीमतें 95 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर जाने की कोशिश कर रही थीं, लेकिन बाद में मुनाफावसूली के कारण इनमें तेज गिरावट आई।
हालांकि यदि कच्चा तेल लंबे समय तक ऊंचे स्तरों पर बना रहता है तो इससे महंगाई बढ़ने का खतरा रहता है। महंगाई बढ़ने पर केंद्रीय बैंक ब्याज दरों को ऊंचा रख सकते हैं, जिसका असर सोना और चांदी की कीमतों पर पड़ता है।
क्या यह खरीदारी का अच्छा मौका है?
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि लंबी अवधि के निवेशकों के लिए मौजूदा गिरावट अवसर भी साबित हो सकती है। रिकॉर्ड ऊंचाई से करीब 30 हजार रुपये नीचे आ चुके सोने में चरणबद्ध निवेश की रणनीति अपनाई जा सकती है।
ज्वेलरी खरीदने की योजना बना रहे ग्राहकों के लिए भी यह राहत भरा समय माना जा रहा है। हालांकि निवेशकों को एकमुश्त निवेश की बजाय धीरे-धीरे खरीदारी करने की सलाह दी जा रही है क्योंकि वैश्विक बाजार में अभी भी अस्थिरता बनी हुई है।
विशेषज्ञों के अनुसार आने वाले हफ्तों में अमेरिकी फेडरल रिजर्व की नीति, डॉलर की चाल, क्रूड ऑयल और भू-राजनीतिक घटनाक्रम सोने और चांदी की दिशा तय करेंगे।
फिलहाल बाजार में मुनाफावसूली जारी है, लेकिन लंबी अवधि में सोना और चांदी अब भी निवेशकों के पसंदीदा सुरक्षित निवेश विकल्प बने हुए हैं।


