भारत में सोने के गहनों पर हॉलमार्किंग अब आम बात हो चुकी है, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि चांदी के गहनों और बर्तनों पर अभी तक अनिवार्य हॉलमार्किंग क्यों लागू नहीं हुई? लाखों उपभोक्ताओं और ज्वेलर्स के लिए यह बड़ा सवाल बना हुआ है। अब ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड्स (BIS) ने खुद इसके पीछे की वजहों का खुलासा किया है।
BIS के महानिदेशक संजय गर्ग के मुताबिक चांदी के बाजार की संरचना सोने की तुलना में कहीं अधिक जटिल है। यही कारण है कि सरकार फिलहाल जल्दबाजी में कोई फैसला लेने के बजाय पूरे सिस्टम को मजबूत करने पर काम कर रही है।
चांदी का बाजार क्यों बना बड़ी चुनौती?
सोने का कारोबार अपेक्षाकृत संगठित माना जाता है। अधिकांश बड़े ज्वेलर्स तय कैरेट मानकों के तहत काम करते हैं और उनके लिए हॉलमार्किंग व्यवस्था अपनाना आसान रहा है। लेकिन चांदी का बाजार पूरी तरह अलग है।
देशभर में लाखों छोटे ज्वेलर्स, स्थानीय कारीगर और पारंपरिक बाजार चांदी के गहने, बर्तन, पूजा सामग्री, सजावटी सामान और अन्य उत्पाद बेचते हैं। उत्पादों की इतनी बड़ी विविधता और असंगठित नेटवर्क के कारण पूरे देश में एक समान हॉलमार्किंग व्यवस्था लागू करना आसान नहीं है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पर्याप्त तैयारी के बिना इसे अनिवार्य कर दिया गया तो छोटे व्यापारियों की लागत बढ़ सकती है और कारोबार पर असर पड़ सकता है।
HUID नंबर क्या है और क्यों जरूरी है?
चांदी के उत्पादों में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए BIS ने HUID (Hallmark Unique Identification) व्यवस्था लागू की है। यह एक यूनिक नंबर होता है, जिसके जरिए ग्राहक किसी भी हॉलमार्क किए गए उत्पाद की जानकारी सत्यापित कर सकते हैं।
ग्राहक BIS Care App की मदद से यह जांच सकते हैं कि खरीदा गया उत्पाद वास्तव में प्रमाणित है या नहीं। इससे नकली या कम शुद्धता वाली चांदी की बिक्री पर रोक लगाने में मदद मिलती है।
हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक यह व्यवस्था पूरे बाजार में व्यापक रूप से लागू नहीं होती, तब तक उपभोक्ताओं को इसका पूरा लाभ नहीं मिलेगा।
हॉलमार्किंग केंद्रों की कमी भी बड़ी वजह
चांदी की अनिवार्य हॉलमार्किंग लागू करने के रास्ते में सबसे बड़ी बाधाओं में से एक परीक्षण और प्रमाणन केंद्रों की सीमित संख्या है।
भारत जैसे विशाल देश में अभी भी कई छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों के ज्वेलर्स को हॉलमार्किंग केंद्रों तक पहुंचने के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती है। यदि भविष्य में हॉलमार्किंग अनिवार्य होती है तो लाखों नए उत्पादों की जांच करनी होगी, जिसके लिए इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार जरूरी होगा।
BIS ने कर्मचारियों की कमी पर भी जताई चिंता
BIS अधिकारियों के अनुसार हॉलमार्किंग व्यवस्था की निगरानी के लिए पर्याप्त मानव संसाधन भी एक बड़ी चुनौती है।
किसी भी अनिवार्य व्यवस्था को सफल बनाने के लिए नियमित निरीक्षण, शिकायत निवारण और गुणवत्ता जांच जरूरी होती है। यदि निगरानी तंत्र मजबूत नहीं होगा तो नियमों का प्रभावी क्रियान्वयन मुश्किल हो सकता है।
यही वजह है कि BIS पहले सिस्टम को मजबूत करना चाहता है और उसके बाद ही बड़े स्तर पर नई व्यवस्था लागू करने पर विचार कर रहा है।
क्या जल्द अनिवार्य हो सकती है चांदी की हॉलमार्किंग?
हाल के वर्षों में चांदी की स्वैच्छिक हॉलमार्किंग में लगातार वृद्धि दर्ज की गई है। इससे संकेत मिलता है कि ज्वेलर्स और ग्राहक दोनों ही प्रमाणित उत्पादों की ओर बढ़ रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह रुझान जारी रहता है और हॉलमार्किंग नेटवर्क का विस्तार होता है तो सरकार आने वाले वर्षों में चरणबद्ध तरीके से चांदी की हॉलमार्किंग को भी अनिवार्य बना सकती है।
खरीदारों को अभी क्या करना चाहिए?
जब तक चांदी की हॉलमार्किंग पूरी तरह अनिवार्य नहीं होती, तब तक ग्राहकों को खरीदारी के समय विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।
- हॉलमार्क किए गए उत्पादों को प्राथमिकता दें।
- HUID नंबर जरूर जांचें।
- BIS Care App से उत्पाद की पुष्टि करें।
- भरोसेमंद ज्वेलर्स से ही खरीदारी करें।
- खरीद का बिल अवश्य लें।
निष्कर्ष
चांदी के गहनों और अन्य उत्पादों पर अनिवार्य हॉलमार्किंग उपभोक्ताओं के हित में एक बड़ा कदम साबित हो सकती है। लेकिन BIS के सामने बाजार की जटिल संरचना, हॉलमार्किंग केंद्रों की कमी और सीमित संसाधनों जैसी चुनौतियां मौजूद हैं। यही कारण है कि सरकार फिलहाल चरणबद्ध तैयारी पर जोर दे रही है। तब तक ग्राहकों के लिए सबसे सुरक्षित विकल्प यही है कि वे HUID वाले हॉलमार्क उत्पादों को प्राथमिकता दें।
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