पश्चिम एशिया में जारी तनाव और वैश्विक ऊर्जा संकट के बीच भारत के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। सरकारी तेल एवं गैस कंपनी Oil India Limited (OIL) ने राजस्थान के जैसलमेर बेसिन के डांडेवाला क्षेत्र में एक नए प्राकृतिक गैस भंडार की खोज की है। ऐसे समय में जब दुनिया के कई देश तेल और गैस की आपूर्ति को लेकर दबाव झेल रहे हैं, यह खोज भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री Hardeep Singh Puri ने खुद इस उपलब्धि की जानकारी साझा करते हुए इसे ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा कदम बताया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री Narendra Modi के नेतृत्व में भारत लगातार घरेलू ऊर्जा उत्पादन बढ़ाने की दिशा में काम कर रहा है और राजस्थान में मिला यह नया गैस भंडार उसी रणनीति का हिस्सा है।
जैसलमेर बेसिन में मिला नया गैस भंडार
India’s quest to strengthen domestic production of energy scripts a new chapter in Rajasthan.
The Energy Maharatna @OilIndiaLimited has successfully unlocked a new gas-bearing pay zone in the Dandewala Field. The flow of natural gas for the first time from the shallower Sanu… pic.twitter.com/1tGfE35QAO
— Hardeep Singh Puri (@HardeepSPuri) May 23, 2026 OIL के अनुसार, राजस्थान के जैसलमेर बेसिन स्थित डांडेवाला फील्ड में सानू फॉर्मेशन से पहली बार प्राकृतिक गैस का सफल प्रवाह दर्ज किया गया है। परीक्षण के दौरान यहां से लगभग 25,000 स्टैंडर्ड क्यूबिक मीटर प्रतिदिन (SCMD) गैस उत्पादन रिकॉर्ड किया गया। कंपनी ने इस कुएं की ड्रिलिंग करीब 950 मीटर की गहराई तक की थी।
ऊर्जा विशेषज्ञों के मुताबिक, यह सिर्फ एक सामान्य खोज नहीं है, बल्कि यह इस बात का संकेत है कि राजस्थान के रेगिस्तानी क्षेत्र में अभी भी बड़े ऊर्जा संसाधन छिपे हो सकते हैं। खास बात यह है कि डांडेवाला क्षेत्र में पहले पारंपरिक गैस उत्पादन होता रहा है, लेकिन सानू फॉर्मेशन में पहली बार गैस की मौजूदगी साबित हुई है।
75 मिलियन स्टैंडर्ड क्यूबिक मीटर गैस का अनुमान
प्रारंभिक तकनीकी मूल्यांकन और भूवैज्ञानिक विश्लेषण के आधार पर इस क्षेत्र में लगभग 75 मिलियन स्टैंडर्ड क्यूबिक मीटर (MMSCM) गैस संसाधन होने का अनुमान लगाया गया है। हालांकि फिलहाल उत्पादन शुरुआती स्तर पर है, लेकिन भविष्य में यहां बड़े पैमाने पर गैस उत्पादन की संभावना जताई जा रही है।
OIL ने इस खोज को अपनी “मिस्ड ऑपर्च्युनिटीज” रणनीति और आधुनिक तकनीकी हस्तक्षेप का नतीजा बताया है। कंपनी अब इस क्षेत्र में आगे और सर्वे तथा विकास कार्य करने की तैयारी में है ताकि उत्पादन क्षमता को बढ़ाया जा सके।
क्यों महत्वपूर्ण है यह खोज?
भारत दुनिया के सबसे बड़े ऊर्जा उपभोक्ता देशों में शामिल है। देश में प्राकृतिक गैस की खपत लगातार बढ़ रही है। वर्तमान में भारत की गैस जरूरत करीब 187 मिलियन स्टैंडर्ड क्यूबिक मीटर प्रतिदिन है, लेकिन इसका लगभग आधा हिस्सा LNG आयात के जरिए पूरा किया जाता है।
यानी भारत अभी भी विदेशी गैस सप्लाई पर काफी निर्भर है। यही वजह है कि जब भी पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ता है या अंतरराष्ट्रीय बाजार में गैस कीमतों में उछाल आता है, उसका सीधा असर भारत की अर्थव्यवस्था और आम लोगों की जेब पर पड़ता है। ऊर्जा क्षेत्र के जानकार मानते हैं कि घरेलू गैस उत्पादन बढ़ने से कई बड़े फायदे हो सकते हैं LNG आयात पर निर्भरता कम होगी, विदेशी मुद्रा की बचत होगी, गैस की घरेलू उपलब्धता बढ़ेगी, उर्वरक, बिजली और उद्योग क्षेत्रों को राहत मिलेगी, ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी
विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि यदि राजस्थान और अन्य ऑनशोर बेसिन में इसी तरह नई खोजें होती रहीं, तो भारत आने वाले वर्षों में गैस आयात बिल को काफी हद तक कम कर सकता है।
मध्य पूर्व संकट के बीच भारत के लिए राहत
यह खोज ऐसे समय में हुई है जब पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव लगातार बढ़ रहा है। ईरान-इजरायल संघर्ष और समुद्री सप्लाई रूट्स पर बढ़ते खतरे ने पूरी दुनिया में ऊर्जा बाजार को अस्थिर कर दिया है। कच्चे तेल और गैस की कीमतों में उतार-चढ़ाव ने कई देशों की चिंता बढ़ा दी है।
भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में होने वाली हर हलचल का असर देश पर पड़ता है। ऐसे में घरेलू स्तर पर गैस भंडार की नई खोज सरकार के लिए रणनीतिक राहत की तरह देखी जा रही है।
सरकार का फोकस: ऊर्जा आत्मनिर्भरता
मोदी सरकार पिछले कुछ वर्षों से “ऊर्जा आत्मनिर्भरता” पर लगातार जोर दे रही है। सरकार का लक्ष्य है कि:
- घरेलू तेल और गैस उत्पादन बढ़ाया जाए
- LNG आयात पर निर्भरता घटाई जाए
- गैस आधारित अर्थव्यवस्था को बढ़ावा दिया जाए
- स्वच्छ ऊर्जा और प्राकृतिक गैस का इस्तेमाल बढ़े
इसी दिशा में सरकार ने कई नीतिगत सुधार किए हैं। नई एक्सप्लोरेशन पॉलिसी, ओपन एकरेज लाइसेंसिंग और निजी निवेश को बढ़ावा देने जैसी योजनाओं के जरिए नए क्षेत्रों में खोज अभियान तेज किए गए हैं।
राजस्थान बन सकता है नया ऊर्जा हब?
ऊर्जा विश्लेषकों का मानना है कि राजस्थान का जैसलमेर बेसिन भविष्य में भारत के लिए बड़ा गैस उत्पादन केंद्र बन सकता है। यहां पहले भी तेल और गैस की खोजें होती रही हैं, लेकिन नई तकनीक और गहरे भूवैज्ञानिक अध्ययन से अब और संभावनाएं सामने आ रही हैं। यदि आगे भी सफल ड्रिलिंग होती है, तो राजस्थान न केवल पश्चिम भारत की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में मदद कर सकता है, बल्कि देश की समग्र ऊर्जा रणनीति में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
आने वाले समय में क्या होगा?
फिलहाल OIL इस नए कुएं के विस्तृत परीक्षण और आगे के विकास कार्यों पर ध्यान दे रही है। कंपनी भविष्य में उत्पादन बढ़ाने और अतिरिक्त संसाधनों की खोज के लिए नए सर्वे भी कर सकती है।
ऊर्जा क्षेत्र के विशेषज्ञों का मानना है कि यह खोज भले अभी शुरुआती स्तर की हो, लेकिन रणनीतिक दृष्टि से यह भारत के लिए बेहद अहम है। अगर इसी तरह घरेलू उत्पादन में लगातार बढ़ोतरी होती रही, तो आने वाले वर्षों में भारत वैश्विक ऊर्जा संकट के प्रभाव को काफी हद तक कम करने में सफल हो सकता है।
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