केरल के महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट Kozhikode-Wayanad टनल को लेकर Supreme Court of India ने बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने इस प्रोजेक्ट को मिली पर्यावरण मंजूरी (Environmental Clearance) में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया।
क्या है कोर्ट का फैसला?
चीफ जस्टिस Surya Kant और जस्टिस Joymalya Bagchi की बेंच ने कहा कि यह प्रोजेक्ट केरल के लोगों के लिए “लाइफलाइन” साबित होगा।
कोर्ट ने केरल हाई कोर्ट के उस फैसले को भी बरकरार रखा, जिसमें इस प्रोजेक्ट के खिलाफ दायर याचिका को खारिज किया गया था।
किसने दी थी चुनौती?
इस प्रोजेक्ट को Wayanad Prakrithi Samrakshana Samithi नामक NGO ने चुनौती दी थी।
NGO का तर्क था कि यह इलाका पर्यावरण के लिहाज से संवेदनशील है और यहां भूस्खलन (landslides) का खतरा रहता है।
SC ने क्या कहा?
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा:
- यह प्रोजेक्ट राष्ट्रीय महत्व का है
- केरल में ट्रैफिक और भूमि की समस्या को देखते हुए यह जरूरी है
- विशेषज्ञों ने पर्यावरणीय सुरक्षा उपाय सुझाए हैं
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि अगर प्रोजेक्ट के दौरान पर्यावरण नियमों का उल्लंघन होता है, तो NGO National Green Tribunal (NGT) का रुख कर सकता है।
क्या है टनल प्रोजेक्ट?
- 8.735 किमी लंबा ट्विन ट्यूब टनल
- Kozhikode और Wayanad को जोड़ेगा
- वेस्टर्न घाट्स के जरिए डायरेक्ट कनेक्टिविटी
- चार लेन अप्रोच रोड के साथ विकसित किया जाएगा
पर्यावरण मंजूरी किसने दी?
इस प्रोजेक्ट को Ministry of Environment, Forest and Climate Change ने पर्यावरण मंजूरी दी थी, जिसे चुनौती दी गई थी।
निष्कर्ष
सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन को दर्शाता है। जहां एक ओर यह प्रोजेक्ट केरल के लोगों के लिए बेहतर कनेक्टिविटी और राहत लेकर आ सकता है, वहीं दूसरी ओर पर्यावरणीय सुरक्षा पर भी नजर रखने की जरूरत बनी रहेगी।
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