नई दिल्ली। भारत में जल संकट लगातार एक बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। कई राज्यों के ग्रामीण और सूखाग्रस्त इलाकों में आज भी लोगों को साफ पीने का पानी आसानी से उपलब्ध नहीं हो पाता। ऐसे समय में भारतीय रेलवे ने एक अनोखी और आधुनिक तकनीक अपनाने का फैसला किया है, जो भविष्य में लाखों यात्रियों और रेलवे कर्मचारियों के लिए राहत का कारण बन सकती है।
रेलवे बोर्ड ने हाल ही में सभी रेलवे जोन, प्रोडक्शन यूनिट्स और रेल मंत्रालय के अधीन आने वाली कंपनियों को एक पत्र भेजकर उन स्थानों की पहचान करने को कहा है, जहां “एटमॉस्फेरिक वाटर जनरेटर” (Atmospheric Water Generator – AWG) लगाए जा सकते हैं। यह ऐसी मशीन है जो हवा में मौजूद नमी को इकट्ठा करके उसे शुद्ध पेयजल में बदल देती है।
क्या है Atmospheric Water Generator (AWG)?
Atmospheric Water Generator एक ऐसी तकनीक है जो वातावरण में मौजूद जलवाष्प को संघनित (Condense) करके पानी तैयार करती है। सामान्य शब्दों में कहें तो यह मशीन हवा से नमी खींचती है और फिर उसे फिल्टर तथा शुद्धिकरण प्रक्रिया से गुजारकर पीने योग्य पानी में बदल देती है।
विशेषज्ञों के अनुसार, जिन क्षेत्रों में आर्द्रता (Humidity) का स्तर पर्याप्त होता है, वहां ये मशीनें काफी प्रभावी साबित हो सकती हैं। यही वजह है कि दुनिया के कई देशों में जल संकट से निपटने के लिए इस तकनीक का उपयोग बढ़ रहा है।
रेलवे ने क्यों लिया यह फैसला?
रेलवे बोर्ड के अनुसार देश के कई ऐसे रेलवे स्टेशन, कर्मचारी कॉलोनियां, लेवल क्रॉसिंग और सेवा क्षेत्र हैं, जहां नियमित रूप से साफ पेयजल उपलब्ध कराना चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।
विशेष रूप से राजस्थान, मध्य भारत और कुछ दूरदराज़ इलाकों में गर्मियों के दौरान पानी की समस्या गंभीर हो जाती है। रेलवे का मानना है कि AWG जैसी तकनीक पारंपरिक जल स्रोतों पर निर्भरता कम कर सकती है और यात्रियों को बेहतर सुविधाएं प्रदान कर सकती है।
रेलवे बोर्ड की ओर से जारी पत्र में कहा गया है कि यह तकनीक सतत जल प्रबंधन (Sustainable Water Management) की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हो सकती है।
किन जगहों पर लगाए जा सकते हैं AWG?
रेलवे बोर्ड ने जिन संभावित स्थानों का उल्लेख किया है, उनमें शामिल हैं:
- रेलवे स्टेशन
- रेलवे अस्पताल
- कर्मचारी कॉलोनियां
- रेलवे कार्यालय
- लेवल क्रॉसिंग
- सेवा एवं रखरखाव केंद्र
- दूरदराज़ और जल संकट वाले क्षेत्र
इन स्थानों पर प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोगों की आवाजाही होती है, इसलिए साफ पानी की उपलब्धता बेहद महत्वपूर्ण है।
पहले भी हो चुका है सफल परीक्षण
यह तकनीक रेलवे के लिए पूरी तरह नई नहीं है। दिसंबर 2019 में पहली बार सिकंदराबाद रेलवे स्टेशन पर Atmospheric Water Generator लगाया गया था।
रेलवे अधिकारियों के अनुसार वहां से सकारात्मक परिणाम मिले थे। यात्रियों और कर्मचारियों दोनों ने इस सुविधा का स्वागत किया था।
इसके बाद अगस्त 2022 में सेंट्रल रेलवे के मुंबई मंडल के छह रेलवे स्टेशनों पर भी AWG मशीनें लगाई गई थीं। इन परियोजनाओं से मिले अनुभवों के आधार पर अब रेलवे इसे बड़े स्तर पर लागू करने की योजना बना रहा है।
यात्रियों को क्या होगा फायदा?
यदि यह योजना बड़े पैमाने पर लागू होती है तो यात्रियों को कई लाभ मिल सकते हैं।
सबसे पहला फायदा होगा साफ और सुरक्षित पेयजल की उपलब्धता। कई छोटे स्टेशनों पर आज भी यात्रियों को बोतलबंद पानी खरीदना पड़ता है या फिर स्थानीय जल स्रोतों पर निर्भर रहना पड़ता है।
दूसरा बड़ा फायदा पर्यावरण से जुड़ा है। यदि स्टेशन स्तर पर पीने का पानी उपलब्ध होगा तो प्लास्टिक बोतलों की खपत में कमी आ सकती है। इससे रेलवे के ग्रीन और सस्टेनेबल इंफ्रास्ट्रक्चर मिशन को भी मजबूती मिलेगी।
क्या सूखाग्रस्त क्षेत्रों में कारगर होगी यह तकनीक?
यह सवाल सबसे महत्वपूर्ण है। विशेषज्ञों का मानना है कि AWG मशीनों की कार्यक्षमता काफी हद तक वातावरण में मौजूद नमी पर निर्भर करती है।
जहां आर्द्रता का स्तर बहुत कम होता है, वहां मशीन की उत्पादन क्षमता प्रभावित हो सकती है। हालांकि आधुनिक तकनीक वाली नई मशीनें कम आर्द्रता वाले क्षेत्रों में भी सीमित मात्रा में पानी तैयार करने में सक्षम हैं।
रेलवे संभवतः ऐसे स्थानों का चयन करेगा जहां यह तकनीक आर्थिक और तकनीकी रूप से व्यवहार्य हो।
रेलवे के हरित मिशन को मिलेगा बल
भारतीय रेलवे पहले से ही सौर ऊर्जा, वर्षा जल संचयन, ऊर्जा दक्षता और कार्बन उत्सर्जन कम करने जैसे कई हरित कार्यक्रम चला रहा है।
AWG तकनीक को अपनाने से रेलवे जल संरक्षण के क्षेत्र में भी एक नई मिसाल पेश कर सकता है। इससे भूजल पर निर्भरता कम होगी और जल संकट से प्रभावित क्षेत्रों में वैकल्पिक समाधान विकसित होंगे।
आगे क्या?
फिलहाल रेलवे बोर्ड ने विभिन्न जोनों और इकाइयों से संभावित स्थानों की पहचान करने को कहा है। इसके बाद तकनीकी और आर्थिक व्यवहार्यता का आकलन किया जाएगा।
यदि योजना सफल रहती है तो आने वाले वर्षों में देश के कई रेलवे स्टेशनों पर यात्रियों को हवा से तैयार किया गया शुद्ध पेयजल उपलब्ध हो सकता है। यह न केवल रेलवे सुविधाओं को आधुनिक बनाएगा बल्कि जल संकट जैसी गंभीर समस्या से निपटने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
भारतीय रेलवे का यह कदम दिखाता है कि भविष्य की चुनौतियों का समाधान केवल पारंपरिक संसाधनों में नहीं, बल्कि नई तकनीकों और नवाचारों में भी छिपा हुआ है।


