देशभर के राष्ट्रीय और राज्य हाईवे पर बढ़ती आवारा पशुओं की समस्या को लेकर Supreme Court of India ने केंद्र सरकार, राज्यों और अन्य संबंधित संस्थाओं से जवाब मांगा है।
कोर्ट का नोटिस और निर्देश
जस्टिस Vikram Nath और Sandeep Mehta की बेंच ने केंद्र, राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों और Animal Welfare Board of India को नोटिस जारी कर 4 हफ्तों में जवाब देने को कहा है।
कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि कई राज्य 10% ‘काउ सेस’ वसूल रहे हैं, लेकिन जमीन पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं दिख रही।
क्या है याचिका की मांग?
याचिकाकर्ता Lawyers For Human Rights International ने कोर्ट से कई अहम निर्देश देने की मांग की है:
- राष्ट्रीय स्तर पर एक समान गाइडलाइंस बनाई जाएं
- हाईवे और एक्सप्रेसवे पर अनिवार्य फेंसिंग की जाए
- दुर्घटना-प्रवण क्षेत्रों में विशेष सुरक्षा उपाय
- वैज्ञानिक तरीके से संचालित गौशालाओं (cattle shelters) की स्थापना
- आवारा पशुओं को छोड़ने पर सख्त सजा
- दुर्घटनाओं के पीड़ितों के लिए नो-फॉल्ट मुआवजा व्यवस्था
NHAI का पक्ष
कोर्ट में National Highways Authority of India ने बताया कि आवारा पशुओं का मुद्दा पहले से चल रहे “stray dogs case” से भी जुड़ा हुआ है, जिस पर सुप्रीम कोर्ट फैसला सुरक्षित रख चुका है।
पहले भी कोर्ट दे चुका है निर्देश
- NHAI को सुझाव दिया गया था कि रोड प्रोजेक्ट कंपनियां CSR के तहत गौशालाएं बनाएं
- 7 नवंबर 2025 के आदेश में आवारा कुत्तों को शेल्टर में स्थानांतरित करने के निर्देश दिए गए
- हाईवे से सभी आवारा पशुओं को हटाने के निर्देश पहले भी दिए जा चुके हैं
क्यों है यह मामला गंभीर?
- हाईवे पर आवारा पशुओं के कारण सड़क हादसे बढ़ रहे हैं
- जान-माल का नुकसान होता है
- प्रशासनिक लापरवाही उजागर होती है
निष्कर्ष
सुप्रीम कोर्ट का यह कदम सड़क सुरक्षा और पशु प्रबंधन दोनों के लिए महत्वपूर्ण है। अगर कोर्ट के निर्देशों के अनुसार ठोस नीति और कार्रवाई होती है, तो इससे न केवल हादसों में कमी आएगी, बल्कि पशुओं की देखभाल भी बेहतर होगी।
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