नई दिल्ली, 28 अप्रैल (PTI): देश में पान मसाला की पैकेजिंग को लेकर एक बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने प्रस्ताव दिया है कि पान मसाला की पैकेजिंग में इस्तेमाल होने वाले प्लास्टिक को हटाकर उसकी जगह कागज, सेल्यूलोज और अन्य पर्यावरण-अनुकूल (eco-friendly) सामग्री का उपयोग किया जाए।
यह कदम FSSAI की उस व्यापक रणनीति का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य खाद्य क्षेत्र में सुरक्षित और टिकाऊ पैकेजिंग को बढ़ावा देना है। इसके साथ ही प्लास्टिक कचरे से होने वाले पर्यावरणीय नुकसान को कम करना भी इसका मुख्य लक्ष्य है।
पर्यावरण और उद्योग दोनों को ध्यान में रखकर प्रस्ताव
FSSAI ने यह प्रस्ताव खाद्य सुरक्षा एवं मानक (पैकेजिंग) विनियम, 2018 में संशोधन के तहत रखा है। नियामक संस्था का कहना है कि यह बदलाव अचानक लागू नहीं किया जाएगा, बल्कि उद्योग की तैयारी और तकनीकी व्यवहार्यता को ध्यान में रखते हुए धीरे-धीरे लागू होगा।
संस्था का मानना है कि पैकेजिंग सिर्फ उत्पाद को सुरक्षित रखने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह उसकी गुणवत्ता और शेल्फ लाइफ (shelf life) को भी प्रभावित करती है। इसलिए किसी भी बदलाव में सुरक्षा मानकों से समझौता नहीं किया जाएगा।
पान मसाला सेक्टर पर क्यों फोकस?
पान मसाला भारत में सबसे ज्यादा खपत होने वाले पैकेज्ड फूड उत्पादों में से एक है। यह उत्पाद छोटे-छोटे प्लास्टिक पाउच में बड़े पैमाने पर बेचा जाता है, जिससे प्लास्टिक कचरे की समस्या बढ़ती है।
विशेषज्ञों के अनुसार, इन छोटे पाउचों का बड़ा हिस्सा पुनर्चक्रण (recycling) योग्य नहीं होता और अक्सर यह पर्यावरण में फैलकर प्रदूषण बढ़ाता है। इसी वजह से यह सेक्टर लंबे समय से पर्यावरणीय सुधार की बहस में शामिल रहा है।
उद्योग के सामने चुनौती भी बड़ी
हालांकि यह प्रस्ताव पर्यावरण के लिहाज से सकारात्मक माना जा रहा है, लेकिन उद्योग के लिए यह बदलाव आसान नहीं होगा।
इको-फ्रेंडली पैकेजिंग सामग्री जैसे पेपर लैमिनेट और सेल्यूलोज फिल्में आमतौर पर महंगी होती हैं। साथ ही, इनके उपयोग के लिए उत्पादन प्रक्रिया और मशीनरी में भी बदलाव करने पड़ सकते हैं।
इसके अलावा, कंपनियों को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि नई पैकेजिंग नमी, तापमान और लंबे समय तक स्टोरेज में उत्पाद की गुणवत्ता को प्रभावित न करे।
प्लास्टिक कम करने की दिशा में बड़ा कदम
यह प्रस्ताव भारत में प्लास्टिक प्रदूषण को कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। सरकार पहले से ही सिंगल-यूज प्लास्टिक पर नियंत्रण और पर्यावरण-अनुकूल विकल्पों को बढ़ावा देने की नीति पर काम कर रही है।
अगर यह बदलाव लागू होता है, तो यह सिर्फ पान मसाला ही नहीं बल्कि अन्य पैकेज्ड फूड उत्पादों के लिए भी एक मॉडल बन सकता है।
आगे क्या होगा?
FSSAI ने अभी यह प्रस्ताव परामर्श (consultation) के लिए रखा है। उद्योग जगत, विशेषज्ञों और अन्य हितधारकों से सुझाव लेने के बाद ही अंतिम नियम तय किए जाएंगे।
संभावना है कि नियम लागू होने पर कंपनियों को बदलाव के लिए एक निश्चित समय सीमा दी जाएगी, ताकि वे अपनी पैकेजिंग प्रणाली को नए मानकों के अनुसार ढाल सकें।
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