पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के बीच एक नाम अचानक सुर्खियों में आ गया है—Ajay Pal Sharma। उत्तर प्रदेश पुलिस के इस वरिष्ठ अधिकारी की दक्षिण 24 परगना जिले में बतौर पुलिस ऑब्जर्वर तैनाती ने राजनीतिक हलकों में तीखी बहस छेड़ दी है।
उनकी पहचान लंबे समय से यूपी पुलिस के “encounter specialist” के रूप में होती रही है, और यही कारण है कि उनकी तैनाती को लेकर सियासी आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं।
कौन हैं IPS Ajay Pal Sharma?
Ajay Pal Sharma 2011 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं और उत्तर प्रदेश कैडर से आते हैं। फिलहाल वे प्रयागराज में अतिरिक्त पुलिस आयुक्त के पद पर कार्यरत हैं।
उनका जन्म अक्टूबर 1985 में पंजाब के लुधियाना में हुआ था। दिलचस्प बात यह है कि उन्होंने शुरुआत में डेंटिस्ट्री (दंत चिकित्सा) की पढ़ाई की थी, लेकिन बाद में उन्होंने करियर बदलकर भारतीय पुलिस सेवा (IPS) को चुना।
“Encounter Specialist” की पहचान कैसे बनी?
उत्तर प्रदेश में अपने कार्यकाल के दौरान Ajay Pal Sharma ने कई हाई-प्रोफाइल सुरक्षा और अपराध विरोधी अभियानों में हिस्सा लिया। इन अभियानों में उनकी सख्त कार्यशैली के कारण उन्हें मीडिया और सोशल मीडिया पर “encounter specialist” की पहचान मिली।
उनकी छवि एक ऐसे पुलिस अधिकारी की बनी, जो कानून-व्यवस्था को लेकर बेहद सख्त रुख अपनाते हैं। इसी कारण उन्हें कई बार “UP Police का Singham” भी कहा गया।
बंगाल में तैनाती और नया विवाद
अब उन्हें पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले में पुलिस ऑब्जर्वर के तौर पर तैनात किया गया है। यह जिम्मेदारी चुनाव प्रक्रिया के दौरान कानून-व्यवस्था पर निगरानी रखने के लिए दी जाती है।
हालांकि, उनकी तैनाती को लेकर राजनीतिक विवाद शुरू हो गया है।
TMC और BJP आमने-सामने
Trinamool Congress (TMC) ने इस नियुक्ति पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया है कि यह चुनावी निष्पक्षता को प्रभावित कर सकती है।
दूसरी ओर, Bharatiya Janata Party (BJP) ने इस फैसले का समर्थन किया है। पार्टी नेताओं का कहना है कि चुनाव आयोग का यह कदम स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए है।
BJP का बचाव
BJP नेताओं, जिनमें अमित मालवीय जैसे प्रमुख नाम शामिल हैं, ने Ajay Pal Sharma की तैनाती का समर्थन किया है।
पार्टी का दावा है कि शर्मा एक सख्त और ईमानदार अधिकारी हैं, जो किसी भी तरह की चुनावी गड़बड़ी या दबाव को रोकने में सक्षम हैं।
BJP का कहना है कि उनकी मौजूदगी से मतदाताओं को सुरक्षा का भरोसा मिलेगा।
TMC का आरोप
वहीं Trinamool Congress के नेताओं ने इस तैनाती को राजनीतिक रूप से प्रेरित बताया है।
TMC सांसद महुआ मोइत्रा ने सोशल मीडिया पर कुछ वीडियो साझा करते हुए सवाल उठाए और उनकी सार्वजनिक छवि पर भी टिप्पणी की।
पार्टी का आरोप है कि इस तरह की तैनाती से चुनावी माहौल प्रभावित हो सकता है।
सोशल मीडिया पर बढ़ी बहस
Ajay Pal Sharma की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं। समर्थक उन्हें “कड़क अधिकारी” और “law & order enforcer” के रूप में देख रहे हैं, जबकि आलोचक उनकी भूमिका पर सवाल उठा रहे हैं।
चुनाव आयोग की भूमिका
ऐसी तैनातियां आमतौर पर चुनाव आयोग द्वारा सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के लिए की जाती हैं। हालांकि, इस मामले में राजनीतिक बयानबाजी ने मुद्दे को और अधिक संवेदनशील बना दिया है।
निष्कर्ष
Ajay Pal Sharma की पश्चिम बंगाल में तैनाती सिर्फ एक प्रशासनिक फैसला नहीं रह गया है, बल्कि यह अब एक राजनीतिक बहस का विषय बन चुका है।
जहां एक ओर उन्हें सख्त और प्रभावी पुलिस अधिकारी के रूप में देखा जाता है, वहीं दूसरी ओर उनकी भूमिका को लेकर राजनीतिक दलों के बीच मतभेद गहराते जा रहे हैं।
आने वाले चुनावी चरणों में यह विवाद और भी तेज हो सकता है, खासकर तब जब राज्य में मतदान प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
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