नई दिल्ली। रिलायंस समूह के पूर्व चेयरमैन अनिल अंबानी को 814 करोड़ रुपये से अधिक की कथित विदेशी परिसंपत्तियों से जुड़े टैक्स विवाद में बड़ी राहत मिली है। बंबई हाईकोर्ट ने काला धन (अघोषित विदेशी आय और परिसंपत्तियां) तथा कर अधिरोपण अधिनियम, 2015 के तहत उनके खिलाफ प्रस्तावित अभियोजन, जुर्माना और अन्य दंडात्मक कार्रवाई पर अंतरिम रोक लगा दी है। हालांकि अदालत का यह आदेश अंतिम फैसला नहीं है और मामले की सुनवाई आगे भी जारी रहेगी।
इस फैसले के बाद कारोबारी जगत और टैक्स विशेषज्ञों के बीच इस मामले की चर्चा तेज हो गई है क्योंकि यह केवल अनिल अंबानी तक सीमित नहीं है, बल्कि काला धन अधिनियम के पुराने मामलों पर लागू होने से जुड़े एक बड़े संवैधानिक सवाल को भी सामने लाता है।
अनिल अंबानी को हाईकोर्ट से राहत क्यों मिली और अब आगे क्या होगा?
बंबई हाईकोर्ट की खंडपीठ ने अनिल अंबानी की उस याचिका को स्वीकार किया है जिसमें उन्होंने काला धन अधिनियम की कुछ धाराओं की संवैधानिक वैधता को चुनौती दी है। याचिका में कहा गया है कि जिन लेनदेन और परिसंपत्तियों को लेकर कार्रवाई की जा रही है, वे वर्ष 2006-07 और 2010-11 से संबंधित हैं, जबकि काला धन अधिनियम 2015 में लागू हुआ था।
अनिल अंबानी का तर्क है कि किसी कानून को पूर्व प्रभाव यानी रेट्रोस्पेक्टिव तरीके से लागू नहीं किया जा सकता। यदि कथित लेनदेन कानून लागू होने से पहले के हैं तो बाद में बने कानून के तहत आपराधिक कार्रवाई करना संविधान के अनुरूप नहीं माना जा सकता।
अदालत ने इस संवैधानिक सवाल को गंभीर मानते हुए केंद्र सरकार को जवाब दाखिल करने के लिए कहा है और अंतिम सुनवाई तक दंडात्मक कार्रवाई पर रोक लगा दी है।
क्या है पूरा टैक्स विवाद?
यह मामला आयकर विभाग द्वारा अगस्त 2022 में जारी किए गए नोटिस से जुड़ा है। विभाग का आरोप है कि अनिल अंबानी ने स्विट्जरलैंड में मौजूद दो बैंक खातों से जुड़ी 814 करोड़ रुपये से अधिक की विदेशी परिसंपत्तियों का खुलासा भारतीय कर अधिकारियों के समक्ष नहीं किया।
आयकर विभाग के अनुसार इन परिसंपत्तियों पर लगभग 420 करोड़ रुपये का कर देय था। विभाग का दावा है कि विदेशी बैंक खातों और वित्तीय हितों की जानकारी आयकर रिटर्न में नहीं दी गई, जो काला धन अधिनियम के प्रावधानों का उल्लंघन है।
इसी आधार पर विभाग ने उनके खिलाफ कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की थी।
किन विदेशी संस्थाओं का नाम सामने आया?
आयकर विभाग के नोटिस में कहा गया है कि अनिल अंबानी बहामास स्थित “डायमंड ट्रस्ट” और ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड्स में पंजीकृत “नॉर्दर्न अटलांटिक ट्रेडिंग अनलिमिटेड (NATU)” से जुड़े हुए थे।
विभाग का आरोप है कि वह इन संस्थाओं के आर्थिक योगदानकर्ता और लाभकारी स्वामी थे। अधिकारियों का कहना है कि इन संस्थाओं से संबंधित परिसंपत्तियों और खातों का विवरण भारतीय आयकर रिटर्न में नहीं दिया गया।
विभाग ने दोनों संस्थाओं से जुड़ी कुल परिसंपत्तियों का मूल्य लगभग 814.27 करोड़ रुपये आंका है।
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में क्या कहा?
अदालत ने स्पष्ट किया है कि अनिल अंबानी के खिलाफ पारित आकलन आदेश और उससे संबंधित अपील की प्रक्रिया जारी रह सकती है। आयकर आयुक्त (अपील) के समक्ष लंबित अपील पर भी सुनवाई जारी रहेगी।
हालांकि अदालत ने यह भी कहा कि जब तक रिट याचिका का अंतिम निपटारा नहीं हो जाता, तब तक अनिल अंबानी के खिलाफ अभियोजन, जुर्माना या अन्य दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी।
यानी फिलहाल उन्हें कानूनी राहत मिली है, लेकिन मामला पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है।
काला धन अधिनियम में क्या प्रावधान हैं?
काला धन (अघोषित विदेशी आय और परिसंपत्तियां) तथा कर अधिरोपण अधिनियम, 2015 को विदेशों में छिपाई गई संपत्तियों और आय पर कार्रवाई के लिए लागू किया गया था।
इस कानून के तहत विदेशी परिसंपत्तियों का खुलासा नहीं करने पर भारी आर्थिक दंड लगाया जा सकता है। इसके अलावा गंभीर मामलों में आपराधिक मुकदमा चलाने और जेल की सजा का भी प्रावधान है।
कानून की धारा 50 और 51 के तहत दोषी पाए जाने पर अधिकतम 10 वर्ष तक की जेल और जुर्माना लगाया जा सकता है।
अब आगे क्या होगा?
मामले में अगला महत्वपूर्ण चरण हाईकोर्ट में संवैधानिक चुनौती की सुनवाई होगी। केंद्र सरकार अपना पक्ष हलफनामे के माध्यम से अदालत के सामने रखेगी।
इसके बाद अदालत यह तय करेगी कि काला धन अधिनियम की संबंधित धाराएं संविधान के अनुरूप हैं या नहीं और क्या उन्हें पुराने वित्तीय लेनदेन पर लागू किया जा सकता है।
साथ ही आयकर विभाग द्वारा जारी आकलन आदेश के खिलाफ अनिल अंबानी की अपील भी समानांतर रूप से आगे बढ़ती रहेगी। यदि अपीलीय प्राधिकरण विभाग के पक्ष में फैसला देता है तो कर देनदारी का विवाद अलग स्तर पर जारी रह सकता है।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि इस मामले का अंतिम फैसला भविष्य में ऐसे कई मामलों को प्रभावित कर सकता है जिनमें पुराने लेनदेन पर काला धन अधिनियम लागू करने का सवाल उठता है।
निष्कर्ष
फिलहाल बंबई हाईकोर्ट के आदेश से अनिल अंबानी को बड़ी राहत मिली है क्योंकि उनके खिलाफ अभियोजन और जुर्माने जैसी कार्रवाई पर रोक लग गई है। हालांकि यह अंतिम जीत नहीं है। अदालत ने केवल अंतरिम राहत दी है और मामले की मूल संवैधानिक चुनौती पर फैसला अभी बाकी है। आने वाले समय में इस केस की सुनवाई पर निवेशकों, कारोबारी जगत और टैक्स विशेषज्ञों की नजर बनी रहेगी।
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