मुंबई | 28 अप्रैल 2026
डच टेक्नोलॉजी कंपनी Philips ने भारत को अपने ग्लोबल इनोवेशन नेटवर्क का केंद्र बनाने की दिशा में बड़ा संकेत दिया है। कंपनी ने साफ किया है कि वह रिसर्च एंड डेवलपमेंट (R&D) में निवेश बढ़ा रही है और आने वाले वर्षों में भारत को “Centre of Excellence” के रूप में विकसित करना चाहती है।
क्यों भारत पर दांव लगा रही है Philips?
Philips के लिए भारत सिर्फ एक बड़ा बाजार नहीं, बल्कि तेजी से उभरता इनोवेशन बेस भी बन चुका है।
- कंपनी अपने कुल रेवेन्यू का 5–6% R&D में निवेश करती है
- जबकि ग्लोबल कंज्यूमर इंडस्ट्री का औसत सिर्फ 2–3% है
- इसका मतलब साफ है — Philips टेक्नोलॉजी और इनोवेशन में आक्रामक रणनीति अपना रही है
कंपनी की वरिष्ठ अधिकारी Deeptha Khanna के मुताबिक, भारत अब केवल मैन्युफैक्चरिंग बेस नहीं, बल्कि प्रोडक्ट डेवलपमेंट और डिजाइन इनोवेशन का भी केंद्र बन सकता है।
100 साल पूरे होने से पहले बड़ा बदलाव
इस दशक के अंत तक Philips भारत में अपने 100 साल पूरे करने वाली है।
इस milestone से पहले कंपनी अपनी भारत रणनीति को और मजबूत कर रही है:
- लोकल इनोवेशन → ग्लोबल प्रोडक्ट्स
- भारतीय बाजार → ग्रोथ इंजन
- R&D हब → वैश्विक टेक्नोलॉजी सपोर्ट
Personal Healthcare से आएगा ग्रोथ
Philips का Personal Healthcare Segment भारत में तेजी से बढ़ रहा है, जिसमें शामिल हैं:
- हेल्थ टेक डिवाइसेस
- वेलनेस प्रोडक्ट्स
- होम हेल्थकेयर सॉल्यूशंस
भारत में बढ़ती हेल्थ अवेयरनेस और मिडिल क्लास की खरीद क्षमता इस ग्रोथ को सपोर्ट कर रही है।
ग्लोबल स्ट्रैटेजी में भारत की भूमिका
Philips की रणनीति अब साफ है:
“भारत = इनोवेशन + मार्केट + टैलेंट”
भारत में मजबूत इंजीनियरिंग टैलेंट, डिजिटल इकोसिस्टम और तेजी से बढ़ता कंज्यूमर बेस कंपनी के लिए बड़ा फायदा है।
क्या बदलेगा आने वाले समय में?
अगर Philips की यह रणनीति सफल होती है, तो:
- भारत में हाई-टेक R&D जॉब्स बढ़ेंगे
- ग्लोबल प्रोडक्ट्स का डिजाइन भारत में होगा
- हेल्थ टेक सेक्टर में नई टेक्नोलॉजी लॉन्च तेज होगी
NewsJagran Insight
यह सिर्फ एक कॉर्पोरेट घोषणा नहीं है—यह संकेत है कि भारत “लो-कॉस्ट मैन्युफैक्चरिंग” से “हाई-वैल्यू इनोवेशन” की ओर शिफ्ट हो रहा है।
Philips जैसी कंपनियों का यह कदम दिखाता है कि आने वाले समय में AI, हेल्थ टेक और स्मार्ट डिवाइसेस का असली विकास भारत जैसे देशों से ही होगा।
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