LCA Tejas फिर से उड़ान के लिए तैयार है, लेकिन हादसों और देरी ने कई सवाल खड़े किए हैं। जानिए क्या HAL का निवेश सही था और भारतीय वायुसेना के लिए इसका क्या मतलब है।
भारत का स्वदेशी फाइटर जेट HAL Tejas एक बार फिर चर्चा में है। हादसों और देरी के बीच अब इसकी वापसी हो रही है, लेकिन बड़ा सवाल यही है—क्या इतने सालों की मेहनत और हजारों करोड़ का निवेश सही दिशा में गया या नहीं?
तेजस की वापसी: क्या हुआ नया?
- फरवरी 2026 की हार्ड लैंडिंग के बाद पूरा बेड़ा ग्राउंडेड
- लगभग 2 महीने बाद फिर से उड़ान के लिए तैयार
- Hindustan Aeronautics Limited (HAL) ने कहा—समस्या का समाधान हो चुका है
- 8 अप्रैल से तेजस फिर ऑपरेशन में
बार-बार हादसे: क्यों उठ रहे सवाल?
तेजस पर सवालों की वजह हाल के घटनाक्रम हैं:
- 2026: हार्ड लैंडिंग, पायलट ने इजेक्ट किया
- 2025: दुबई एयर शो में दुर्घटना
- 2024: फ्यूल फीड समस्या के कारण क्रैश
इन घटनाओं के बाद आलोचकों ने सवाल उठाया कि क्या प्रोजेक्ट में तकनीकी खामियां हैं।
क्या वाकई “बेकार निवेश” है तेजस?
सीधा जवाब: नहीं, मामला इतना सरल नहीं है।
क्यों नहीं?
- मार्च 2024 तक 50,000+ फ्लाइट घंटे बिना बड़े हादसे के
- कई हादसे:
- हाई-रिस्क एयर शो से जुड़े
- या ज्ञात तकनीकी समस्याओं से
मतलब यह कि पूरा प्लेटफॉर्म फेल नहीं, बल्कि कुछ सिस्टम और सप्लाई से जुड़ी चुनौतियां हैं।
सबसे बड़ी समस्या: इंजन सप्लाई
- General Electric (GE) से इंजन डिलीवरी में देरी
- 2021 की डील के तहत 99 F404 इंजन मिलने थे
- देरी के कारण:
- प्रोडक्शन धीमा
- डिलीवरी अटकी
इससे पूरा प्रोग्राम प्रभावित हुआ।
भारतीय वायुसेना के लिए क्यों जरूरी है तेजस?
Indian Air Force के सामने बड़ी चुनौती है:
- जरूरत: 42 स्क्वाड्रन
- मौजूदा: ~29–32 स्क्वाड्रन
कारण:
- MiG-21 रिटायर हो चुका
- नए फाइटर की तत्काल जरूरत
तेजस इस गैप को भरने का मुख्य विकल्प है
तेजस के वेरिएंट: क्या प्लान है आगे?
- Tejas Mk-1
- Tejas Mk-1A (अपग्रेडेड)
- Tejas Trainer
- Tejas Mk-2 (सबसे एडवांस, विकास जारी)
डील:
- 83 Mk-1A (पहले से ऑर्डर)
- 97 अतिरिक्त विमान की योजना
आगे क्या होगा?
- हर विमान को ASQR (Air Staff Quality Requirement) पास करना होगा
- टेस्ट फ्लाइट + तकनीकी जांच
- रिपोर्ट के बाद ही वायुसेना में शामिल
निष्कर्ष
तेजस प्रोजेक्ट में देरी और चुनौतियां जरूर रही हैं, लेकिन इसे “फेल” कहना सही नहीं होगा।
यह भारत के लिए सिर्फ एक फाइटर जेट नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर रक्षा क्षमता की नींव है।
अगर इंजन सप्लाई और प्रोडक्शन स्पीड सुधरती है, तो आने वाले सालों में तेजस भारतीय वायुसेना की ताकत को काफी मजबूत कर सकता है।
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