मध्य पूर्व में जारी तनाव का असर अब भारत की अर्थव्यवस्था और कारोबार पर भी दिखने लगा है। इसी बीच सरकार ₹2.5 लाख करोड़ के बड़े क्रेडिट गारंटी स्कीम पर काम कर रही है, ताकि खासकर MSMEs को राहत मिल सके।
क्या है सरकार की योजना?
- कुल स्कीम साइज: ₹2.5 लाख करोड़
- लक्ष्य: संकट से प्रभावित बिज़नेस को सस्ता और आसान लोन
- फोकस: MSME सेक्टर
इस योजना के तहत बैंकों को दिए जाने वाले लोन पर सरकार की तरफ से गारंटी दी जाएगी।
कैसे काम करेगी स्कीम?
- लोन डिफॉल्ट होने पर 90% तक गारंटी
- प्रति लोन सीमा: ₹100 करोड़ तक
- गारंटी देगा: National Credit Guarantee Trustee Company (NCGTC)
- सरकार का खर्च: लगभग ₹17,000–₹18,000 करोड़
मतलब: बैंकों का जोखिम कम होगा, इसलिए वे आसानी से लोन देंगे
COVID मॉडल से प्रेरित योजना
यह स्कीम 2020 की सफल योजना से प्रेरित है:
- Emergency Credit Line Guarantee Scheme (ECLGS)
- MSMEs को तत्काल लोन मिला
- बिना ज्यादा कागजी प्रक्रिया
- कम ब्याज दर
इस मॉडल ने महामारी के दौरान हजारों बिज़नेस को बचाया था
West Asia संकट का असर
West Asia में जारी संघर्ष (US-Iran-Israel तनाव) का सीधा असर:
- कच्चे तेल की कीमतों में ~50% तक उछाल
- शिपिंग रूट प्रभावित
- कच्चे माल की लागत बढ़ी
- MSMEs पर दबाव
सरकार के अन्य राहत कदम
सरकार ने पहले भी कई कदम उठाए हैं:
- पेट्रोल-डीजल पर एक्साइज ड्यूटी कम
- जरूरी पेट्रोकेमिकल्स पर कस्टम ड्यूटी छूट
- ATF और डीजल पर एक्सपोर्ट ड्यूटी
- SEZ को DTA में ऑपरेशन की छूट
मकसद: आम जनता और उद्योग दोनों को राहत
MSMEs के लिए क्यों अहम है ये स्कीम?
भारत में MSMEs:
- करोड़ों लोगों को रोजगार देते हैं
- सप्लाई चेन का बड़ा हिस्सा हैं
इस स्कीम से:
- कैश फ्लो सुधरेगा
- बिज़नेस बंद होने से बचेंगे
- नई निवेश गतिविधियां बढ़ेंगी
निष्कर्ष
₹2.5 लाख करोड़ की यह प्रस्तावित स्कीम सिर्फ राहत पैकेज नहीं, बल्कि आर्थिक स्थिरता का बड़ा कदम है।
अगर यह योजना लागू होती है, तो West Asia संकट के बीच भारत के MSME सेक्टर को बड़ा सहारा मिल सकता है और अर्थव्यवस्था को झटके से बचाया जा सकता है।
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