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Success Story: शॉर्टकट नहीं, बरगद जैसा बनने की चाहत थी, छोड़ दी सरकारी नौकरी, बना डाला ₹150 करोड़ का ब्रांड

Namam Sharma
Last updated: 2026/06/11 at 1:08 अपराह्न
Namam Sharma - Senior Editor – Newsjagran
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10 Min Read
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नई दिल्ली: भारत में सरकारी नौकरी को आज भी स्थिरता, सम्मान और सुरक्षित भविष्य का प्रतीक माना जाता है। अधिकांश लोग ऐसी नौकरी पाने के लिए वर्षों तक मेहनत करते हैं, लेकिन कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जो सुरक्षित करियर छोड़कर अपने सपनों को हकीकत में बदलने का जोखिम उठाते हैं। ऐसी ही प्रेरणादायक कहानी है चंडीगढ़ के रहने वाले डॉ. हिमांशु गांधी की, जिन्होंने सरकारी क्षेत्र में वरिष्ठ प्रशासनिक पद छोड़कर एक ऐसा स्टार्टअप खड़ा किया, जिसकी पहचान आज देश के प्रमुख बेबी केयर ब्रांड्स में होती है।

Contents
सरकारी नौकरी छोड़कर शुरू किया नया सफरभारतीय बेबी केयर मार्केट में देखा बड़ा अवसरशॉर्टकट नहीं, भरोसे का रास्ता चुनासीमित पूंजी में खड़ा किया मजबूत ब्रांडअस्पतालों में सैंपलिंग बनी गेम चेंजर रणनीतिकैसे बनी ₹150 करोड़ से अधिक राजस्व वाली कंपनी?ITC ने बढ़ाई हिस्सेदारी, बढ़ा निवेशकों का भरोसाअब बेबी केयर से आगे फैमिली वेलनेस पर नजरसफलता का सबसे बड़ा सबक

डॉ. हिमांशु गांधी द्वारा स्थापित Mother Sparsh आज भारतीय बेबी केयर इंडस्ट्री में एक जाना-पहचाना नाम बन चुका है। कंपनी ने वित्त वर्ष 2024-25 तक 150 करोड़ रुपये से अधिक का राजस्व हासिल किया है। यह सफलता केवल एक बिजनेस की कहानी नहीं, बल्कि उस सोच की मिसाल है जिसमें तेज सफलता के बजाय लंबे समय तक टिकाऊ विकास को प्राथमिकता दी गई।

सरकारी नौकरी छोड़कर शुरू किया नया सफर

डॉ. हिमांशु गांधी ने अपने करियर की शुरुआत एक प्रतिष्ठित सरकारी पद से की थी। उनके पास स्थिर आय, सामाजिक प्रतिष्ठा और सुरक्षित भविष्य जैसी सभी सुविधाएं थीं। हालांकि, उनके मन में हमेशा कुछ अलग करने की इच्छा थी। उन्होंने महसूस किया कि यदि किसी बड़े बदलाव का सपना देखा जाए तो उसके लिए जोखिम उठाना भी जरूरी होता है।

इसी सोच के साथ उन्होंने सरकारी नौकरी छोड़ने का साहसिक फैसला लिया। शुरुआत में परिवार और करीबी लोगों के मन में स्वाभाविक रूप से चिंता थी। आखिरकार कोई भी व्यक्ति सुरक्षित नौकरी छोड़कर अनिश्चितता से भरे उद्यमिता के रास्ते पर आसानी से नहीं निकलता। लेकिन हिमांशु गांधी को अपने विचार और बिजनेस मॉडल पर पूरा भरोसा था।

भारतीय बेबी केयर मार्केट में देखा बड़ा अवसर

जब उन्होंने बाजार का अध्ययन किया तो उन्हें एक महत्वपूर्ण कमी दिखाई दी। भारत में बेबी केयर प्रोडक्ट्स की मांग लगातार बढ़ रही थी, लेकिन अधिकांश ब्रांड या तो विदेशी थे या फिर भारतीय परिस्थितियों के अनुरूप उत्पाद विकसित नहीं कर रहे थे।

डॉ. गांधी का मानना था कि भारत का मौसम, यहां का वातावरण और बच्चों की त्वचा की जरूरतें पश्चिमी देशों से अलग हैं। ऐसे में भारतीय परिवारों को ऐसे उत्पादों की आवश्यकता है जो विशेष रूप से भारतीय परिस्थितियों को ध्यान में रखकर तैयार किए गए हों।

उन्होंने यह भी समझा कि बेबी केयर ऐसा क्षेत्र है जहां माता-पिता कीमत या विज्ञापन के आधार पर निर्णय नहीं लेते। वे अपने बच्चों के लिए सबसे सुरक्षित और भरोसेमंद उत्पाद चुनना चाहते हैं। यही सोच Mother Sparsh की नींव बनी।

शॉर्टकट नहीं, भरोसे का रास्ता चुना

कई स्टार्टअप्स तेजी से पहचान बनाने के लिए बड़े विज्ञापन अभियानों और भारी मार्केटिंग बजट का सहारा लेते हैं। लेकिन डॉ. हिमांशु गांधी ने अलग रास्ता चुना। उन्होंने ब्रांड निर्माण को एक लंबी प्रक्रिया माना और ग्राहकों का भरोसा जीतने पर फोकस किया।

कंपनी ने डॉक्टरों की सलाह, पारंपरिक भारतीय ज्ञान और आधुनिक गुणवत्ता मानकों का संयोजन तैयार किया। उत्पाद विकास के दौरान इस बात का विशेष ध्यान रखा गया कि वे सुरक्षित, प्रभावी और बच्चों की संवेदनशील त्वचा के अनुकूल हों।

यही वजह है कि Mother Sparsh ने शुरुआत से ही खुद को केवल एक उत्पाद बेचने वाली कंपनी के रूप में नहीं, बल्कि एक भरोसेमंद बेबी केयर ब्रांड के रूप में स्थापित करने की कोशिश की।

सीमित पूंजी में खड़ा किया मजबूत ब्रांड

किसी भी स्टार्टअप की शुरुआती चुनौती फंडिंग होती है। Mother Sparsh के साथ भी ऐसा ही हुआ। कंपनी के शुरुआती दिनों में बड़े निवेशक मौजूद नहीं थे और न ही करोड़ों रुपये का मार्केटिंग बजट उपलब्ध था।

डॉ. गांधी ने अपनी व्यक्तिगत बचत के सहारे कारोबार शुरू किया। संसाधन सीमित थे, इसलिए हर निर्णय सोच-समझकर लिया गया। कंपनी ने शुरुआती दौर में खर्च कम रखने और ग्राहकों से सीधा जुड़ने की रणनीति अपनाई।

यह वही समय था जब ब्रांड की वास्तविक पहचान बन रही थी। बिना बड़े निवेश के केवल उत्पाद की गुणवत्ता और ग्राहक अनुभव के दम पर बाजार में जगह बनाना आसान नहीं था, लेकिन टीम ने इसी दिशा में लगातार काम किया।

अस्पतालों में सैंपलिंग बनी गेम चेंजर रणनीति

Mother Sparsh की सफलता में अस्पताल आधारित सैंपलिंग कार्यक्रमों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। कंपनी ने महंगे टीवी विज्ञापनों और बड़े सेलिब्रिटी अभियानों की बजाय सीधे नए माता-पिता तक पहुंचने का फैसला किया।

अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में उत्पादों के सैंपल उपलब्ध कराए गए। इससे माता-पिता को उत्पाद इस्तेमाल करने का मौका मिला और कंपनी को वास्तविक फीडबैक प्राप्त हुआ।

जब ग्राहकों ने उत्पादों की गुणवत्ता को महसूस किया तो माउथ-पब्लिसिटी के जरिए ब्रांड की लोकप्रियता बढ़ने लगी। यह रणनीति धीरे-धीरे कंपनी की सबसे बड़ी ताकत बन गई। ग्राहकों की सिफारिश ने विज्ञापन से कहीं अधिक प्रभावी भूमिका निभाई।

कैसे बनी ₹150 करोड़ से अधिक राजस्व वाली कंपनी?

लगातार गुणवत्ता, भरोसे और ग्राहक संतुष्टि पर ध्यान देने का परिणाम यह हुआ कि Mother Sparsh ने भारतीय बेबी केयर बाजार में अपनी मजबूत पहचान बना ली। कंपनी का कारोबार तेजी से बढ़ा और वित्त वर्ष 2024-25 तक उसका राजस्व 150 करोड़ रुपये से अधिक पहुंच गया।

यह उपलब्धि इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि कंपनी ने अत्यधिक छूट, आक्रामक मार्केटिंग या अल्पकालिक रणनीतियों पर निर्भर रहने के बजाय टिकाऊ विकास मॉडल अपनाया। कंपनी ने अपने उत्पाद पोर्टफोलियो का विस्तार किया और विभिन्न बेबी केयर श्रेणियों में अपनी उपस्थिति मजबूत की।

विशेषज्ञों का मानना है कि भारतीय माता-पिता के बीच सुरक्षित और टॉक्सिन-फ्री उत्पादों की बढ़ती मांग ने भी Mother Sparsh जैसे ब्रांड्स को तेजी से आगे बढ़ने में मदद की है।

ITC ने बढ़ाई हिस्सेदारी, बढ़ा निवेशकों का भरोसा

Mother Sparsh की बढ़ती सफलता ने बड़े निवेशकों का ध्यान भी आकर्षित किया। देश की प्रमुख एफएमसीजी कंपनियों में शामिल ITC ने कंपनी में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाकर लगभग 49.3 प्रतिशत कर ली।

किसी बड़े कॉरपोरेट समूह का निवेश केवल पूंजी उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं होता। यह इस बात का संकेत भी होता है कि कंपनी के बिजनेस मॉडल, प्रबंधन क्षमता और भविष्य की संभावनाओं पर भरोसा किया जा रहा है।

ITC की बढ़ी हुई हिस्सेदारी को Mother Sparsh की विश्वसनीयता और भविष्य की संभावनाओं का बड़ा संकेत माना जा रहा है। इससे कंपनी को नए बाजारों और नए उत्पाद क्षेत्रों में विस्तार करने में भी मदद मिल सकती है।

अब बेबी केयर से आगे फैमिली वेलनेस पर नजर

150 करोड़ रुपये का राजस्व हासिल करने के बाद भी कंपनी का लक्ष्य यहीं रुकना नहीं है। डॉ. हिमांशु गांधी अब Mother Sparsh को केवल बेबी केयर ब्रांड नहीं, बल्कि एक व्यापक फैमिली वेलनेस ब्रांड के रूप में विकसित करना चाहते हैं।

इसके लिए कंपनी पर्सनल केयर, हाइजीन और अन्य जरूरत आधारित उत्पाद श्रेणियों में विस्तार की तैयारी कर रही है। साथ ही ऑफलाइन बाजार में अपनी पहुंच बढ़ाने पर भी फोकस कर रही है।

कंपनी का लक्ष्य केवल तेजी से बिक्री बढ़ाना नहीं बल्कि उपभोक्ताओं के साथ दीर्घकालिक संबंध बनाना है। यही कारण है कि शिक्षा, जागरूकता और गुणवत्ता को आज भी उसकी प्राथमिकताओं में शामिल किया जाता है।

सफलता का सबसे बड़ा सबक

डॉ. हिमांशु गांधी की कहानी यह साबित करती है कि हर बड़ी सफलता रातों-रात नहीं मिलती। कई बार सुरक्षित रास्ता छोड़कर कठिन निर्णय लेने पड़ते हैं। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि बिजनेस में स्थायी सफलता केवल तेज ग्रोथ से नहीं, बल्कि ग्राहकों के भरोसे से हासिल होती है।

सरकारी नौकरी छोड़कर शुरू हुआ यह सफर आज एक ऐसे ब्रांड में बदल चुका है जिसने करोड़ों रुपये का कारोबार खड़ा किया है। Mother Sparsh की कहानी उन लोगों के लिए प्रेरणा है जो किसी बड़े सपने को साकार करने का साहस रखते हैं और शॉर्टकट के बजाय बरगद की तरह मजबूत और लंबे समय तक टिकने वाला भविष्य बनाना चाहते हैं।

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नमम शर्मा, Newsjagran के सीनियर एडिटर हैं। बिज़नेस न्यूज़, कमोडिटी बाज़ार, सोना-चांदी भाव, पेट्रोल-डीजल रेट और फाइनेंस में 9 साल का अनुभव। हिंदी डिजिटल पत्रकारिता के जानकार।
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