मुंबई, 29 अप्रैल: भारत में साल 2026 की पहली तिमाही (जनवरी–मार्च) के दौरान सोने (Gold) की मांग में मजबूत बढ़त दर्ज की गई। World Gold Council (WGC) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, देश की कुल गोल्ड डिमांड 10% बढ़कर 151 टन पहुंच गई।
निवेश मांग में जबरदस्त उछाल
इस तिमाही की सबसे बड़ी खासियत रही निवेश आधारित खरीदारी (Investment Demand) में तेज बढ़ोतरी।
- बार, कॉइन और ETF में निवेश 54% बढ़कर 82 टन
- कुल डिमांड में निवेश का हिस्सा तेजी से बढ़ा
- निवेशकों ने सोने को सुरक्षित विकल्प (Safe Haven) के रूप में अपनाया
रिपोर्ट बताती है कि यह एक स्ट्रक्चरल शिफ्ट है, जहां पारंपरिक ज्वेलरी डिमांड की जगह निवेश डिमांड मजबूत हो रही है।
ज्वेलरी डिमांड में गिरावट
जहां निवेश में तेजी आई, वहीं ज्वेलरी सेक्टर दबाव में रहा:
- ज्वेलरी डिमांड 19% घटकर 66 टन
- ऊंची कीमतों और महंगाई का असर
- कीमत-संवेदनशील ग्राहकों में खरीदारी कम
इससे साफ है कि बढ़ती कीमतों ने आम उपभोक्ता की पहुंच को प्रभावित किया है।
क्यों बदल रहा है गोल्ड डिमांड का पैटर्न?
विशेषज्ञों के अनुसार, भारत में गोल्ड डिमांड का यह बदलाव कई कारणों से हो रहा है:
- लगातार बढ़ती सोने की कीमतें
- आर्थिक अनिश्चितता और सुरक्षित निवेश की तलाश
- डिजिटल गोल्ड और ETF जैसे नए निवेश विकल्प
- पारंपरिक खरीद से निवेश-आधारित सोच की ओर झुकाव
भारत के बाजार पर क्या असर?
इस ट्रेंड का भारतीय बाजार पर व्यापक असर पड़ सकता है:
- ज्वेलरी इंडस्ट्री पर दबाव बढ़ेगा
- निवेश उत्पादों (ETF, बार, कॉइन) की मांग बढ़ेगी
- गोल्ड को एक इन्वेस्टमेंट एसेट के रूप में ज्यादा स्वीकार्यता मिलेगी
निष्कर्ष
World Gold Council की रिपोर्ट से स्पष्ट है कि भारत में गोल्ड डिमांड का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। निवेश मांग के बढ़ते प्रभाव ने पारंपरिक ज्वेलरी खपत को पीछे छोड़ दिया है, जो आने वाले समय में बाजार की दिशा तय करेगा।
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