दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण और ईंधन पर निर्भरता को कम करने के लिए सरकार ने Electric Vehicle (EV) Policy 2026–2030 (Draft) पेश की है, जिसे इंडस्ट्री में एक बड़ा और भविष्य की ओर बढ़ने वाला कदम माना जा रहा है।
हालांकि, जहां एक तरफ यह नीति इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को तेजी से अपनाने का रोडमैप देती है, वहीं दूसरी तरफ कुछ अहम चुनौतियां भी सामने आ रही हैं—खासतौर पर फाइनेंसिंग और बैटरी-एज़-ए-सर्विस (BaaS) जैसे क्षेत्रों में स्पष्टता की कमी।
Ayush Lohia, जो EV कंपनी YOUDHA के CEO हैं, ने इस नीति को “future-looking” बताया, लेकिन साथ ही कुछ जरूरी सुधारों की ओर भी इशारा किया।
क्या है Delhi EV Policy 2026–2030?
दिल्ली सरकार की यह ड्राफ्ट नीति साफ तौर पर एक बड़े लक्ष्य की ओर इशारा करती है—
राजधानी में 100% नए वाहन इलेक्ट्रिक बनाना
इसमें सरकार ने अलग-अलग सेगमेंट के लिए incentives, infrastructure और timelines तय किए हैं, जिससे आने वाले 5–7 साल में EV adoption तेजी से बढ़ सके।
Ayush Lohia के अनुसार:
“सरकार ने साफ संकेत दिया है कि वह पेट्रोल-डीजल वाहनों से EV की ओर शिफ्ट चाहती है और इसके लिए स्पष्ट टाइमलाइन भी दी है।”
EV खरीदने पर क्या मिलेंगे फायदे?
इस नीति में आम लोगों को EV अपनाने के लिए कई तरह के आर्थिक लाभ दिए गए हैं:
- इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर पर ₹30,000 तक का इंसेंटिव
- इलेक्ट्रिक थ्री-व्हीलर पर ₹50,000 तक का फायदा
- इलेक्ट्रिक गुड्स व्हीकल पर ₹1 लाख तक की सब्सिडी
इसके अलावा:
- पुरानी गाड़ी स्क्रैप करने पर अतिरिक्त इंसेंटिव
- EV पर 100% रोड टैक्स और रजिस्ट्रेशन फीस माफ
यह कदम सीधे तौर पर EV को किफायती बनाने की दिशा में बड़ा बदलाव ला सकता है।
स्क्रैपेज और इंफ्रास्ट्रक्चर: नीति की बड़ी ताकत
नीति में सिर्फ खरीदारी नहीं, बल्कि पूरे ecosystem पर ध्यान दिया गया है:
स्क्रैपेज बेनिफिट्स
- टू-व्हीलर: ₹10,000
- थ्री-व्हीलर: ₹25,000
- कार: ₹1 लाख तक
चार्जिंग और स्वैपिंग नेटवर्क
- शहरभर में चार्जिंग स्टेशन
- बैटरी स्वैपिंग स्टेशन
- इलेक्ट्रिक बसों के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर
Ayush Lohia ने कहा:
“इंफ्रास्ट्रक्चर और स्क्रैपेज दोनों पर अच्छी तरह काम किया गया है।”
सबसे बड़ी कमी: EV फाइनेंसिंग
जहां नीति कई मामलों में मजबूत है, वहीं सबसे बड़ा gap है—
retail financing
आज की स्थिति में:
- EV लोन महंगे हैं
- interest rates ज्यादा हैं
- priority lending का फायदा नहीं मिलता
Ayush Lohia के अनुसार:
“अगर PSU banks या NBFCs के जरिए सस्ती फाइनेंसिंग मिले, तो adoption और तेज हो सकता है।”
यानी EV खरीदना अभी भी middle-class के लिए आसान नहीं है।
Battery-as-a-Service (BaaS): बड़ा मौका, लेकिन clarity नहीं
Battery-as-a-Service (BaaS) EV सेक्टर का गेमचेंजर माना जाता है।
इसमें क्या होता है?
- गाड़ी खरीदते समय बैटरी नहीं खरीदनी पड़ती
- बैटरी subscription या lease पर मिलती है
- upfront cost काफी कम हो जाता है
लेकिन समस्या ये है:
नीति में इसका जिक्र है, पर clear framework नहीं है
Ayush Lohia ने इस पर चिंता जताते हुए कहा:
“स्वैपिंग की बात है, लेकिन BaaS मॉडल को स्पष्ट रूप से define करना जरूरी है।”
सख्त नियम: EV adoption को मजबूती
सरकार ने कुछ mandatory rules भी प्रस्तावित किए हैं:
- 2027 से नए थ्री-व्हीलर सिर्फ EV होंगे
- 2028 से नए टू-व्हीलर सिर्फ EV होंगे
- 2030 तक स्कूल बसों में 30% EV अनिवार्य
यह rules manufacturers और buyers दोनों को clear direction देते हैं।
क्या Delhi EV adoption के लिए तैयार है?
अगर ground reality देखें तो:
Positive Signs
- चार्जिंग स्टेशन तेजी से बढ़ रहे हैं
- fast charging available हो रही है
- home charging आसान हो रही है
Challenges
- EV cost अभी भी ज्यादा
- battery replacement expensive
- financing मुश्किल
यानी infrastructure तैयार हो रहा है, लेकिन affordability अभी भी challenge है।
प्रदूषण और EV: कितना असर पड़ेगा?
दिल्ली दुनिया के सबसे प्रदूषित शहरों में से एक है।
EV adoption से:
- vehicular pollution कम होगा
- fuel import dependence घटेगी
- long-term health benefits मिलेंगे
यही वजह है कि सरकार इस policy को aggressively push कर रही है।
Global Trend: क्यों जरूरी है EV shift?
पूरी दुनिया EV की ओर बढ़ रही है:
- fossil fuel dependency कम करने के लिए
- climate change से लड़ने के लिए
- sustainable mobility के लिए
India भी इस race में पीछे नहीं रहना चाहता।
आगे क्या होगा?
आने वाले समय में तीन चीजें तय करेंगी कि policy सफल होगी या नहीं:
1. सस्ती फाइनेंसिंग
अगर loan सस्ता हुआ → adoption तेज होगा
2. Battery model clarity
BaaS clear हुआ → EV affordable बनेंगे
3. Infrastructure execution
ground level implementation सबसे जरूरी
Expert View
इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स मानते हैं कि:
- policy direction सही है
- incentives मजबूत हैं
- लेकिन execution और financing critical हैं
यानी policy अच्छी है, पर execution game changer होगा।
निष्कर्ष
Delhi EV Policy 2026–2030 एक बड़ा और जरूरी कदम है, जो राजधानी को petrol-diesel से electric mobility की ओर ले जा सकता है।
Ayush Lohia जैसे इंडस्ट्री लीडर्स भी इसे positive मानते हैं, लेकिन उन्होंने सही समय पर उन gaps की ओर इशारा किया है जो adoption को धीमा कर सकते हैं।
अगर सरकार financing और battery models को लेकर clarity दे देती है, तो यह policy सिर्फ Delhi ही नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए एक benchmark बन सकती है।
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