भारत में डिजिटल भुगतान प्रणाली तेजी से बढ़ रही है और अब लोग हर छोटे-बड़े काम के लिए UPI, कार्ड और ऑटो-डेबिट सुविधाओं का उपयोग कर रहे हैं। इसी बढ़ते उपयोग और ग्राहकों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने एक बड़ा कदम उठाया है।
RBI ने मंगलवार को “Digital Payments – E-Mandate Framework, 2026” जारी किया है, जिसके तहत अब किसी भी recurring payment यानी बार-बार होने वाले ऑटो-डेबिट ट्रांजैक्शन से पहले ग्राहकों को कम से कम 24 घंटे पहले सूचना देना अनिवार्य होगा।
यह कदम सीधे तौर पर उन लाखों ग्राहकों को प्रभावित करेगा जो हर महीने SIP, Netflix-Spotify जैसे सब्सक्रिप्शन, बिजली-पानी के बिल या क्रेडिट कार्ड ऑटो-पे जैसी सेवाओं का उपयोग करते हैं।
क्या है RBI का नया E-Mandate Framework?
RBI ने अपने नए ढांचे में पुराने सभी e-mandate नियमों को एक साथ जोड़कर एक सिंगल और मजबूत सिस्टम तैयार किया है। इसका उद्देश्य डिजिटल पेमेंट्स को ज्यादा पारदर्शी, सुरक्षित और यूज़र-फ्रेंडली बनाना है।
RBI के अनुसार, अब किसी भी recurring payment को प्रोसेस करने से पहले बैंक या पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर को ग्राहक को स्पष्ट रूप से सूचित करना होगा।
नए नियम के अनुसार:
ग्राहक को ट्रांजैक्शन से कम से कम 24 घंटे पहले अलर्ट भेजा जाएगा। इसमें राशि, तारीख और भुगतान की पूरी जानकारी शामिल होगी।
यह बदलाव इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि अब तक कई बार ग्राहकों के खाते से बिना स्पष्ट सूचना के पैसे कट जाते थे, जिससे शिकायतें बढ़ रही थीं।
ग्राहकों को कैसे मिलेगा फायदा?
इस नए नियम का सबसे बड़ा लाभ आम ग्राहकों को मिलेगा, जो हर महीने ऑटो-डेबिट सेवाओं पर निर्भर रहते हैं।
अब किसी भी कटौती से पहले ग्राहक को पूरा समय मिलेगा कि वह ट्रांजैक्शन को रोक सके या उसे मंजूरी दे सके।
इसके अलावा RBI ने यह भी सुनिश्चित किया है कि ग्राहक को हर ट्रांजैक्शन के बाद भी सूचना मिलेगी, ताकि किसी भी अनधिकृत कटौती की तुरंत पहचान की जा सके।
यह बदलाव बैंकिंग सिस्टम में पारदर्शिता को बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है, खासकर उन लोगों के लिए जो डिजिटल भुगतान को लेकर अभी भी सतर्क रहते हैं।
24 घंटे का अलर्ट क्यों जरूरी था?
पिछले कुछ वर्षों में डिजिटल भुगतान तेजी से बढ़ा है। भारत दुनिया के सबसे बड़े डिजिटल पेमेंट मार्केट्स में से एक बन चुका है।
लेकिन इसी के साथ एक बड़ी समस्या सामने आई है—अनचाहे ऑटो-डेबिट और अस्पष्ट चार्ज।
कई ग्राहकों ने शिकायत की थी कि:
- सब्सक्रिप्शन रिन्यू होते समय बिना सूचना पैसे कट जाते हैं
- क्रेडिट कार्ड ऑटो पे में भ्रम की स्थिति रहती है
- कई बार छोटी-छोटी राशि लगातार कटती रहती है
इन समस्याओं को देखते हुए RBI ने यह 24 घंटे का नोटिफिकेशन सिस्टम लागू किया है ताकि ग्राहक को पूरा कंट्रोल मिल सके।
नई सुरक्षा व्यवस्था: AFA अनिवार्य
RBI ने केवल नोटिफिकेशन ही नहीं, बल्कि सुरक्षा पर भी बड़ा ध्यान दिया है।
अब किसी भी e-mandate को रजिस्टर करने के लिए Additional Factor of Authentication (AFA) जरूरी होगा।
इसका मतलब है कि:
- OTP या अन्य सुरक्षा वेरिफिकेशन के बिना कोई ऑटो-डेबिट सेट नहीं किया जा सकेगा
- बैंक ग्राहक की स्पष्ट अनुमति के बिना कोई recurring payment एक्टिव नहीं करेगा
यह कदम डिजिटल फ्रॉड और अनधिकृत ट्रांजैक्शन को रोकने के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
ग्राहकों को मिलेगा पूरा नियंत्रण
नए नियमों में सबसे बड़ा बदलाव यह है कि अब ग्राहक पूरी तरह अपने ऑटो-डेबिट को कंट्रोल कर सकेंगे।
RBI ने साफ कहा है कि:
- ग्राहक कभी भी अपना e-mandate बदल सकता है
- उसे रोक सकता है या पूरी तरह बंद कर सकता है
- किसी भी एक ट्रांजैक्शन को अलग से ब्लॉक किया जा सकता है
यह सुविधा पहले सीमित थी, लेकिन अब इसे हर ग्राहक के लिए आसान और सुलभ बनाया गया है।
ट्रांजैक्शन लिमिट और नियम
RBI ने ट्रांजैक्शन लिमिट को भी स्पष्ट किया है ताकि सुरक्षा और सुविधा दोनों बनी रहें।
अब:
- ₹15,000 तक के recurring payment बिना अतिरिक्त OTP के प्रोसेस हो सकते हैं
- इससे अधिक राशि के लिए अतिरिक्त सुरक्षा (AFA) जरूरी होगी
हालांकि कुछ महत्वपूर्ण भुगतान जैसे:
- इंश्योरेंस प्रीमियम
- म्यूचुअल फंड SIP
- क्रेडिट कार्ड बिल
इनके लिए ₹1,00,000 तक की सीमा पर भी अतिरिक्त प्रमाणीकरण की छूट दी गई है।
यह संतुलन सिस्टम को आसान भी बनाता है और सुरक्षित भी रखता है।
बैंक और कंपनियों पर क्या असर पड़ेगा?
इस बदलाव का असर सिर्फ ग्राहकों पर ही नहीं बल्कि बैंकों और डिजिटल कंपनियों पर भी पड़ेगा।
अब सभी बैंक, फिनटेक कंपनियां और पेमेंट गेटवे को अपने सिस्टम को अपग्रेड करना होगा ताकि:
- 24 घंटे पहले नोटिफिकेशन भेजा जा सके
- रियल-टाइम ट्रैकिंग सिस्टम मौजूद हो
- यूज़र इंटरफेस और अधिक पारदर्शी बने
इससे कंपनियों पर टेक्नोलॉजी सुधार का दबाव बढ़ेगा, लेकिन लंबे समय में यह पूरे सिस्टम के लिए फायदेमंद होगा।
विशेषज्ञों की राय
बैंकिंग और फिनटेक विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम भारत के डिजिटल इकोसिस्टम को और मजबूत करेगा।
विशेषज्ञों के अनुसार:
- यह कदम ग्राहक विश्वास बढ़ाएगा
- डिजिटल फ्रॉड कम होंगे
- ऑटो-डेबिट से जुड़ी शिकायतें घटेंगी
- बैंकिंग सिस्टम अधिक ट्रांसपेरेंट बनेगा
हालांकि कुछ विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि शुरुआती दौर में कंपनियों को तकनीकी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।
डिजिटल भारत की दिशा में बड़ा कदम
भारत पहले ही दुनिया में सबसे तेजी से बढ़ते डिजिटल पेमेंट बाजारों में शामिल है। UPI लेन-देन हर महीने रिकॉर्ड बना रहा है।
ऐसे में RBI का यह नया नियम डिजिटल इंडिया मिशन को और मजबूत करता है।
यह कदम दिखाता है कि भारत अब सिर्फ डिजिटल पेमेंट बढ़ाने पर नहीं, बल्कि उसे सुरक्षित और यूज़र-केंद्रित बनाने पर भी ध्यान दे रहा है।
निष्कर्ष
RBI का नया e-mandate फ्रेमवर्क एक बड़ा और समयानुकूल सुधार है। 24 घंटे पहले अलर्ट की व्यवस्था ग्राहकों को अधिक नियंत्रण और सुरक्षा देगी।
यह बदलाव केवल एक नियम नहीं बल्कि डिजिटल बैंकिंग सिस्टम में एक संरचनात्मक सुधार है, जो आने वाले समय में पूरे फाइनेंशियल इकोसिस्टम को अधिक पारदर्शी और भरोसेमंद बनाएगा।
ग्राहकों के लिए यह एक सकारात्मक कदम है, लेकिन बैंकों और कंपनियों के लिए यह एक तकनीकी चुनौती भी लेकर आएगा।
Disclaimer
यह लेख केवल सूचना के उद्देश्य से है, निवेश या वित्तीय निर्णय से पहले विशेषज्ञ की सलाह लें।
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