15 August Flag Hoisting: 15 अगस्त यानी स्वतंत्रता दिवस पर देशभर में तिरंगा फहराया जाता है। स्कूल, कॉलेज, सरकारी कार्यालय, निजी संस्थान, सोसाइटी और अन्य जगहों पर ध्वजारोहण कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। तिरंगा फहराना सिर्फ एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि देश के राष्ट्रीय ध्वज के प्रति सम्मान और गौरव का प्रतीक है। इसलिए ध्वजारोहण से पहले तिरंगे को सही तरीके से तैयार करना और पोल पर बांधना बेहद जरूरी है।
15 अगस्त को ध्वजारोहण के दौरान कई जगहों पर तिरंगे के साथ फूलों की पंखुड़ियां भी रखी जाती हैं। रस्सी खींचने पर झंडा खुलता है और उसके साथ फूलों की पंखुड़ियां नीचे गिरती हैं। इससे ध्वजारोहण का दृश्य बेहद आकर्षक दिखाई देता है। हालांकि, इसके लिए तिरंगे को पहले से सही तरीके से फोल्ड करना, फूल रखना और रस्सी से बांधना जरूरी है।
अगर आप भी इस स्वतंत्रता दिवस पर ध्वजारोहण की तैयारी कर रहे हैं, तो कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखें। आइए जानते हैं तिरंगे को पोल पर लगाने और ध्वजारोहण से पहले तैयार करने का आसान तरीका।
सबसे पहले तिरंगे की अच्छी तरह जांच करें
तिरंगे को पोल पर बांधने से पहले उसकी स्थिति जरूर जांच लें। राष्ट्रीय ध्वज साफ, सही स्थिति में और किसी तरह की क्षति से मुक्त होना चाहिए। झंडे पर धूल, गंदगी, दाग या सिलवटों की स्थिति को भी पहले देख लें।
भारतीय तिरंगे में ऊपर केसरिया, बीच में सफेद और नीचे हरा रंग होता है। सफेद पट्टी के बीच में नीले रंग का अशोक चक्र बना होता है। यह सुनिश्चित करें कि ध्वज सही दिशा में रखा गया है और अशोक चक्र स्पष्ट दिखाई दे रहा है।
तिरंगे को तैयार करते समय उसे जमीन पर रखने से बचना चाहिए। इसके लिए साफ और सूखी जगह का इस्तेमाल करें। राष्ट्रीय ध्वज की गरिमा बनाए रखना ध्वजारोहण की तैयारी का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है।
तिरंगे को फोल्ड करने का सही तरीका
तिरंगे को फोल्ड करते समय जल्दबाजी न करें। सबसे पहले उसे किसी साफ और समतल जगह पर सावधानी से फैलाएं। इसके बाद झंडे को इस तरह मोड़ें कि उसकी पट्टियां व्यवस्थित रहें और वह पोल की रस्सी से आसानी से जुड़ सके।
फोल्ड करते समय झंडे को मरोड़ना, खींचना या जरूरत से ज्यादा दबाना नहीं चाहिए। ध्यान रखें कि ध्वजारोहण के समय रस्सी खींचने पर तिरंगा आसानी से खुल सके।
फोल्डिंग के बाद एक बार यह जरूर जांच लें कि झंडे का कोई हिस्सा उलझा हुआ तो नहीं है। अगर कपड़ा या रस्सी आपस में फंस गई है, तो झंडा ऊपर जाने के बाद ठीक से नहीं खुलेगा।
तिरंगे के अंदर फूल कैसे रखें?
स्वतंत्रता दिवस के ध्वजारोहण में कई जगह तिरंगे के अंदर फूलों की पंखुड़ियां रखी जाती हैं। झंडा खुलने पर पंखुड़ियां नीचे गिरती हैं, जिससे ध्वजारोहण का कार्यक्रम और भी खास दिखाई देता है।
इसके लिए गुलाब या गेंदे की ताजी पंखुड़ियों का इस्तेमाल किया जा सकता है। हालांकि, फूलों की मात्रा बहुत अधिक नहीं होनी चाहिए। ज्यादा पंखुड़ियां रखने से फोल्ड किया हुआ झंडा भारी हो सकता है और उसके खुलने में परेशानी आ सकती है।
फूलों को फोल्ड किए गए झंडे के अंदर इस तरह रखें कि वे झंडे के कपड़े में फंसें नहीं। उद्देश्य यह होना चाहिए कि रस्सी खींचते ही तिरंगा आसानी से खुले और पंखुड़ियां नीचे गिर जाएं।
पोल की रस्सी से तिरंगा कैसे बांधें?
फूल रखने और तिरंगे को फोल्ड करने के बाद अगला कदम उसे पोल की रस्सी से जोड़ना है। झंडे में दिए गए डोरी या निर्धारित बिंदुओं को पोल की रस्सी से मजबूती से जोड़ा जाना चाहिए।
गांठ इतनी मजबूत होनी चाहिए कि तिरंगे को ऊपर ले जाते समय वह अलग न हो। साथ ही यह भी ध्यान रखें कि ध्वजारोहण के समय रस्सी खींचने पर झंडा आसानी से खुल सके।
तिरंगे को बांधने के बाद ध्वजारोहण से पहले एक बार पूरी व्यवस्था की जांच कर लें। रस्सी को सावधानी से खींचकर देखें कि झंडा बिना अटकाव के ऊपर जा रहा है या नहीं। अगर रस्सी या झंडा कहीं फंस रहा है, तो कार्यक्रम शुरू होने से पहले उसे ठीक कर लें।
ध्वजारोहण से पहले पोल भी चेक करें
सिर्फ तिरंगे की तैयारी करना पर्याप्त नहीं है। जिस पोल पर झंडा फहराया जाना है, उसकी भी जांच कर लें। पोल मजबूत और स्थिर होना चाहिए। रस्सी में किसी तरह की टूट-फूट या उलझन नहीं होनी चाहिए।
अगर पोल पर पुली लगी है, तो यह भी देख लें कि वह सही तरीके से काम कर रही है। ध्वजारोहण के समय रस्सी अचानक अटकने या टूटने से कार्यक्रम में परेशानी हो सकती है।
इसलिए स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रम शुरू होने से पहले एक बार पूरी व्यवस्था का ट्रायल कर लेना बेहतर रहता है।
तिरंगे की गरिमा का रखें पूरा ध्यान
राष्ट्रीय ध्वज के साथ सम्मानजनक व्यवहार करना जरूरी है। तिरंगे को जमीन पर गिरने या गंदा होने से बचाना चाहिए। इसे किसी ऐसी जगह नहीं रखा जाना चाहिए जहां उसके अपवित्र या क्षतिग्रस्त होने की संभावना हो।
तिरंगे का इस्तेमाल सामान्य सजावटी सामान की तरह नहीं किया जाना चाहिए। इसे मेजपोश, पर्दे, कुशन या ऐसे अन्य सामान के रूप में इस्तेमाल करने से बचना चाहिए। इसी तरह झंडे को किसी ऐसे तरीके से नहीं बांधना चाहिए जिससे उसकी गरिमा प्रभावित हो।
ध्वजारोहण के बाद भी तिरंगे को लापरवाही से नहीं छोड़ना चाहिए। कार्यक्रम समाप्त होने पर उसे सम्मानपूर्वक उतारकर साफ और सुरक्षित स्थान पर रखना चाहिए।
ध्वजारोहण के समय इन बातों का रखें ध्यान
ध्वजारोहण के दौरान रस्सी को सावधानी से खींचें। जल्दबाजी में रस्सी खींचने से झंडा उलझ सकता है या रस्सी की गांठ खुल सकती है।
यह भी सुनिश्चित करें कि तिरंगा पूरी तरह खुलने के बाद सही स्थिति में रहे। अगर झंडे का कोई हिस्सा मुड़ा या उलझा हुआ दिखाई दे, तो उसे ठीक करने की व्यवस्था पहले से रखें।
ध्वजारोहण कार्यक्रम में मौजूद लोगों को भी राष्ट्रीय ध्वज के प्रति सम्मान बनाए रखना चाहिए। तिरंगा देश की संप्रभुता, एकता और गौरव का प्रतीक है, इसलिए इसकी तैयारी से लेकर कार्यक्रम समाप्त होने तक हर चरण में सावधानी जरूरी है।
15 अगस्त पर तिरंगा फहराते समय सबसे जरूरी बात
स्वतंत्रता दिवस पर तिरंगा फहराना हर भारतीय के लिए गौरव का क्षण है। इसलिए झंडे को सिर्फ खूबसूरती से फहराना ही नहीं, बल्कि उसकी गरिमा और निर्धारित नियमों का ध्यान रखना भी उतना ही जरूरी है।
तिरंगा पहले से जांच लें, उसे साफ जगह पर सावधानी से फोल्ड करें, जरूरत के अनुसार फूलों की पंखुड़ियां रखें और पोल की रस्सी से इस तरह जोड़ें कि ध्वजारोहण के समय वह आसानी से खुल सके। कार्यक्रम से पहले रस्सी और पोल की भी जांच कर लें।
इन छोटी-छोटी तैयारियों से ध्वजारोहण का कार्यक्रम व्यवस्थित तरीके से किया जा सकता है और राष्ट्रीय ध्वज के प्रति सम्मान भी बना रहता है।


