NewsjagranNewsjagranNewsjagran
  • बिजनेस न्यूज़
    बिजनेस न्यूज़Show More
    oldest-sweet-shops-in-india-bhagat-halwai-ghasitaram-kc-das
    भारत की सबसे पुरानी मिठाई की दुकानें: 231 साल पुराना भगत हलवाई, लाहौर-कराची से दिल्ली-मुंबई तक पहुंचा इन ब्रांड्स का स्वाद
    7 नवम्बर 2026
    # UP के सरकारी इंजीनियर ने खड़ा किया था खरबों का JP साम्राज्य, फिर कर्ज ने किया बर्बाद; अब अदाणी के हाथों में कंपनी की कमान **JP Associates Story:** उत्तर प्रदेश के एक सरकारी इंजीनियर ने अपनी नौकरी छोड़कर कारोबार की दुनिया में कदम रखा और देखते ही देखते हजारों करोड़ रुपये का कारोबारी साम्राज्य खड़ा कर दिया। यह कहानी है जयप्रकाश गौड़ और जयप्रकाश एसोसिएट्स (JP Associates) की। यमुना एक्सप्रेसवे, बड़े बांध, सीमेंट प्लांट, बिजली परियोजनाएं और रियल एस्टेट जैसे क्षेत्रों में अपनी पहचान बनाने वाला यह समूह कभी देश के प्रमुख इंफ्रास्ट्रक्चर कारोबारियों में गिना जाता था। लेकिन जरूरत से ज्यादा कर्ज, आर्थिक मंदी और कारोबार में आई मुश्किलों ने इस साम्राज्य की नींव हिला दी। आखिरकार कंपनी दिवालिया प्रक्रिया में पहुंच गई और अब इसका अधिग्रहण अदाणी समूह ने कर लिया है। **बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली।** कारोबार की दुनिया में कई ऐसी कहानियां हैं, जहां एक छोटे से सफर की शुरुआत करने वाला व्यक्ति बड़ा कारोबारी साम्राज्य खड़ा कर देता है। लेकिन कभी-कभी यही साम्राज्य समय के साथ कर्ज और आर्थिक चुनौतियों के कारण ढह भी जाता है। जयप्रकाश एसोसिएट्स की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। एक समय उत्तर भारत में जेपी समूह का नाम बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के लिए जाना जाता था। कंपनी ने सड़क निर्माण से लेकर बिजली उत्पादन, सीमेंट, होटल और रियल एस्टेट तक कई क्षेत्रों में अपनी मौजूदगी बनाई। ग्रेटर नोएडा से आगरा को जोड़ने वाला यमुना एक्सप्रेसवे भी इसी समूह की बड़ी उपलब्धियों में शामिल रहा। जेपी समूह की पहचान केवल बड़े प्रोजेक्ट तक सीमित नहीं थी। लाखों निवेशकों और कर्मचारियों का भी इस कंपनी से जुड़ाव था। लेकिन लगातार बढ़ते कर्ज और कारोबार में आई गिरावट ने कंपनी को ऐसी स्थिति में पहुंचा दिया, जहां से वापसी मुश्किल हो गई। अब अदाणी समूह ने दिवालिया समाधान प्रक्रिया के जरिए जयप्रकाश एसोसिएट्स के अधिग्रहण का रास्ता साफ कर लिया है। आइए जानते हैं कि आखिर कैसे एक सरकारी इंजीनियर ने यह कारोबारी साम्राज्य खड़ा किया और फिर यह आर्थिक संकट में कैसे फंस गया। ## सरकारी इंजीनियर से कारोबारी बनने तक का सफर जयप्रकाश गौड़ का जन्म वर्ष 1931 में उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर जिले में हुआ था। उन्होंने सिविल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा हासिल किया और इसके बाद उत्तर प्रदेश सरकार के सिंचाई विभाग में जूनियर इंजीनियर के तौर पर नौकरी शुरू की। सरकारी सेवा के दौरान उन्हें निर्माण और इंजीनियरिंग से जुड़ी परियोजनाओं को समझने का मौका मिला। हालांकि, उनके मन में खुद का कारोबार शुरू करने की इच्छा थी। करीब सात साल तक सरकारी नौकरी करने के बाद उन्होंने नौकरी छोड़ दी और निर्माण कार्यों की ठेकेदारी शुरू कर दी। शुरुआत में उनके पास कारोबार के लिए बहुत ज्यादा पूंजी नहीं थी। उन्होंने अपनी करीब 10 हजार रुपये की बचत से छोटे-मोटे निर्माण और सड़क निर्माण के ठेके लेने शुरू किए। धीरे-धीरे अनुभव और काम के आधार पर उन्हें बड़ी परियोजनाएं मिलने लगीं। वर्ष 1979 में उन्होंने जयप्रकाश एसोसिएट्स की स्थापना की। शुरुआत में कंपनी का मुख्य कारोबार निर्माण और इंजीनियरिंग से जुड़ा था। समय के साथ कंपनी ने बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में अपनी जगह बनाई और जेपी समूह का विस्तार होता चला गया। ## बांध से लेकर बिजली और सीमेंट तक फैला कारोबार जेपी समूह ने निर्माण क्षेत्र में अपनी पहचान मजबूत करने के बाद जलविद्युत परियोजनाओं की तरफ कदम बढ़ाया। टिहरी बांध और विष्णुप्रयाग जलविद्युत परियोजना जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स से कंपनी की पहचान राष्ट्रीय स्तर पर मजबूत हुई। इसके बाद समूह ने सीमेंट, बिजली उत्पादन, होटल और रियल एस्टेट जैसे क्षेत्रों में भी कारोबार शुरू किया। कंपनी का उद्देश्य केवल निर्माण ठेके लेने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के विकास और संचालन तक पहुंच गया। इस विस्तार ने जयप्रकाश एसोसिएट्स को देश के प्रमुख इंफ्रास्ट्रक्चर समूहों में शामिल कर दिया। कंपनी के पास अलग-अलग क्षेत्रों में कारोबार था और निवेशकों के बीच भी इसकी अच्छी पहचान बन गई थी। ## यमुना एक्सप्रेसवे ने दिलाई देशभर में पहचान जेपी समूह के इतिहास में यमुना एक्सप्रेसवे परियोजना को एक बड़ा पड़ाव माना जाता है। वर्ष 2003 में ग्रेटर नोएडा से आगरा के बीच एक्सप्रेसवे बनाने की परियोजना जेपी समूह को मिली। करीब 165 किलोमीटर लंबे इस एक्सप्रेसवे का निर्माण समूह की कंपनी जेपी इंफ्राटेक ने किया। इस परियोजना के तहत सड़क निर्माण के साथ-साथ एक्सप्रेसवे के आसपास रियल एस्टेट विकास के अधिकार भी मिले। इससे कंपनी को इंफ्रास्ट्रक्चर और प्रॉपर्टी कारोबार दोनों में विस्तार का अवसर मिला। वर्ष 2012 में यमुना एक्सप्रेसवे को आम लोगों के लिए खोल दिया गया। इसके बाद दिल्ली-एनसीआर और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बीच सड़क संपर्क बेहतर हुआ। इस परियोजना ने जेपी समूह को देशभर में पहचान दिलाई। इसी दौरान कंपनी ने ग्रेटर नोएडा में बुद्ध इंटरनेशनल सर्किट का निर्माण भी किया। इस रेसिंग सर्किट पर वर्ष 2011 से 2013 तक फॉर्मूला-1 इंडियन ग्रां प्री का आयोजन हुआ। यह परियोजना भारत में मोटरस्पोर्ट्स के लिहाज से काफी चर्चित रही। ## 2008 की मंदी के बाद बिगड़ने लगे हालात तेजी से विस्तार कर रहे जेपी समूह के लिए वर्ष 2008 की वैश्विक आर्थिक मंदी बड़ा झटका साबित हुई। मंदी के बाद रियल एस्टेट बाजार में सुस्ती आने लगी। मकानों की बिक्री प्रभावित हुई और निर्माण परियोजनाओं से मिलने वाली रकम में देरी होने लगी। दूसरी तरफ बिजली और सीमेंट कारोबार में भी कंपनी को उम्मीद के मुताबिक कमाई नहीं हो रही थी। बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में भारी निवेश की जरूरत थी, जबकि कारोबार से पर्याप्त नकदी नहीं आ रही थी। बुद्ध इंटरनेशनल सर्किट जैसी बड़ी परियोजनाओं पर हुआ निवेश भी कंपनी के वित्तीय दबाव को बढ़ाने वाले कारकों में शामिल रहा। कंपनी ने अपने कारोबार को बढ़ाने के लिए बड़ी रकम उधार ली थी, लेकिन आमदनी और नकदी का प्रवाह कर्ज चुकाने की रफ्तार के अनुरूप नहीं रहा। कर्ज का बोझ बढ़ने के साथ कंपनी को अपनी कई संपत्तियां और कारोबारी हिस्सेदारियां बेचनी पड़ीं। इसके बावजूद वित्तीय स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ। धीरे-धीरे जेपी समूह का संकट गहराता चला गया। ## घर खरीदारों से लेकर बैंकों तक, हर कोई हुआ परेशान जेपी समूह का आर्थिक संकट केवल कंपनी और बैंकों तक सीमित नहीं रहा। इसका असर उन हजारों लोगों पर भी पड़ा, जिन्होंने कंपनी के रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स में अपने घर बुक किए थे। नोएडा और ग्रेटर नोएडा में जेपी विशटाउन जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स में बड़ी संख्या में घर खरीदारों का पैसा फंस गया। कई लोगों ने अपनी जीवनभर की बचत लगाकर घर खरीदे थे, लेकिन उन्हें तय समय पर फ्लैट नहीं मिल पाए। इस स्थिति ने जेपी समूह की मुश्किलें और बढ़ा दीं। एक तरफ बैंक और वित्तीय संस्थान अपना कर्ज वापस मांग रहे थे, वहीं दूसरी तरफ घर खरीदार अपने घरों का इंतजार कर रहे थे। ## 2017 में शुरू हुई दिवालिया प्रक्रिया जेपी समूह की मुश्किलें सबसे पहले उसकी सहायक कंपनी जेपी इंफ्राटेक के मामले में सामने आईं। अगस्त 2017 में कंपनी के खिलाफ दिवालिया प्रक्रिया शुरू की गई। बाद में सुरक्षा समूह ने समाधान प्रक्रिया के तहत जेपी इंफ्राटेक के अधिग्रहण की जिम्मेदारी संभाली। हालांकि, इससे पूरे जेपी समूह की वित्तीय परेशानियां खत्म नहीं हुईं। समूह की प्रमुख कंपनी जयप्रकाश एसोसिएट्स लिमिटेड भी भारी कर्ज के कारण संकट में फंस गई। 3 जून 2024 को नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) की इलाहाबाद पीठ ने जयप्रकाश एसोसिएट्स के खिलाफ कॉरपोरेट दिवालिया समाधान प्रक्रिया शुरू करने का आदेश दिया। इस मामले में वित्तीय लेनदारों ने करीब 57,185 करोड़ रुपये के बकाये का दावा किया था। इसके बाद कंपनी के कारोबार और संपत्तियों के समाधान के लिए बोली प्रक्रिया शुरू हुई। कई बड़े कारोबारी समूहों ने कंपनी को खरीदने में दिलचस्पी दिखाई। ## वेदांता ने लगाई बड़ी बोली, लेकिन अदाणी ने मारी बाजी जयप्रकाश एसोसिएट्स के अधिग्रहण की प्रक्रिया में वेदांता समूह और अदाणी समूह समेत कई कंपनियों ने हिस्सा लिया। सितंबर 2025 में वेदांता समूह की 17,000 करोड़ रुपये से अधिक की बोली की खबर सामने आई थी। इससे माना जा रहा था कि कंपनी का नियंत्रण अनिल अग्रवाल के नेतृत्व वाले वेदांता समूह के पास जा सकता है। हालांकि, बाद में समाधान प्रक्रिया में स्थिति बदल गई। नवंबर 2025 में वित्तीय लेनदारों ने अदाणी एंटरप्राइजेज की 14,535 करोड़ रुपये की समाधान योजना को मंजूरी दे दी। इस प्रस्ताव को कर्जदाताओं के करीब 89 फीसदी वोट मिले। इसके बाद 17 मार्च 2026 को NCLT की इलाहाबाद पीठ ने अदाणी एंटरप्राइजेज की समाधान योजना को मंजूरी दे दी। इस फैसले के साथ जयप्रकाश एसोसिएट्स के अधिग्रहण का रास्ता साफ हो गया। हालांकि, वेदांता समूह ने इस फैसले को नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल (NCLAT) में चुनौती दी थी। मई 2026 में NCLAT ने वेदांता की अपील खारिज कर दी। इससे अदाणी समूह के अधिग्रहण की प्रक्रिया को आगे बढ़ने का रास्ता मिला। ## अब अदाणी समूह के नियंत्रण में जेपी की संपत्तियां जयप्रकाश एसोसिएट्स के समाधान के बाद समूह की कई संपत्तियां और कारोबार अदाणी समूह की रणनीति का हिस्सा बन गए हैं। अदाणी समूह की अलग-अलग कंपनियां जेपी समूह की विभिन्न कारोबारी इकाइयों और परिसंपत्तियों में हिस्सेदारी हासिल कर रही हैं। इसी क्रम में अदाणी पावर ने जेपी पावर से जुड़ी हिस्सेदारी का अधिग्रहण किया। वहीं, जेपी समूह के कुछ सीमेंट प्लांटों को अदाणी समूह ने डालमिया भारत को बेचने का फैसला किया। इस तरह जिस जेपी समूह ने कभी उत्तर भारत में बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के जरिए अपनी अलग पहचान बनाई थी, उसका कारोबारी स्वरूप अब पूरी तरह बदल चुका है। जयप्रकाश गौड़ की कहानी कारोबार की दुनिया में बड़े सपने, तेजी से विस्तार और वित्तीय अनुशासन के महत्व को समझाती है। महज 10 हजार रुपये की बचत से शुरू हुआ सफर देश के बड़े कारोबारी साम्राज्य तक पहुंचा, लेकिन भारी कर्ज और नकदी की कमी ने अंततः इस साम्राज्य को दिवालिया प्रक्रिया तक पहुंचा दिया। **Source:** उपलब्ध कारोबारी रिपोर्टों और दिवालिया समाधान प्रक्रिया से जुड़ी जानकारी पर आधारित। jp-associates-jayprakash-gaur-rise-fall-adani-takeover-story
    UP के सरकारी इंजीनियर ने खड़ा किया था खरबों का JP साम्राज्य, फिर कर्ज ने किया बर्बाद; अब अदाणी के हाथों में कंपनी की कमान
    7 नवम्बर 2026
    triumph-tracker-400-new-tft-display-features-launch-price
    Triumph Tracker 400: नए TFT डिस्प्ले और अपडेटेड फीचर्स के साथ जल्द होगी लॉन्च, जानें इंजन और संभावित कीमत
    7 नवम्बर 2026
    sugar-msp-increase-demand-42-rupees-per-kg-farmers-payment-ethanol-production
    चीनी का MSP ₹31 से बढ़ाकर ₹42 प्रति किलो करने की मांग, गन्ना किसानों को मिलेंगे भुगतान के 2 विकल्प; एथनॉल उत्पादन पर भी संकट
    7 नवम्बर 2026
    vijay-mallya-dhanteras-post-sbi-bank-loan-users-reaction
    ‘कुछ धन तो छोड़ जाते विजय भाई…’, माल्या ने दी धनतेरस की बधाई तो भड़के यूजर्स, SBI के नाम पर खूब लिए मजे
    7 नवम्बर 2026
  • कमोडिटी
    कमोडिटीShow More
    gold-silver-price-dhanteras-gold-silver-rate-today
    Gold Silver Price: धनतेरस पर सस्ता हुआ सोना-चांदी, खरीदारों की मौज! कीमतों में आई इतनी गिरावट
    6 नवम्बर 2026
    gold-silver-price-today-dhanteras-gold-silver-rates
    Gold Silver Price Today: धनतेरस से एक दिन पहले सोना-चांदी महंगे, ₹5,500 तक चढ़े दाम; जानिए 24K, 22K और 18K गोल्ड के लेटेस्ट रेट
    5 नवम्बर 2026
    gold-silver-price-today-dhanteras-diwali-gold-silver-rate
    Gold Silver Price: धनतेरस से पहले सोने-चांदी ने तोड़े सारे रिकॉर्ड! खूब सस्ता हुआ गोल्ड, खरीदारी का है सही मौका?
    4 नवम्बर 2026
    iran-us-attack-crude-oil-price-petrol-diesel-india
    ईरान पर अमेरिकी हमले से कच्चे तेल में फिर उबाल, 7% की गिरावट के बाद चढ़े दाम; क्या भारत में महंगा होगा पेट्रोल-डीजल?
    3 नवम्बर 2026
    gold-silver-price-today-dhanteras-gold-silver-rates
    Gold Silver Price Today: दिवाली से पहले सोने-चांदी में लौटी चमक, ₹3,000 तक चढ़ी कीमतें; चेक करें आज का लेटेस्ट रेट
    2 नवम्बर 2026
  • शेयर बाज़ार
    शेयर बाज़ारShow More
    sebi-mutual-fund-net-settlement-rules-april-2027
    म्यूचुअल फंड निवेशकों के लिए सेबी का बड़ा फैसला, 1 अप्रैल 2027 से बदल जाएगा सेटलमेंट का तरीका; जानिए क्या होगा असर
    7 नवम्बर 2026
    mtnl-9000-crore-property-monetisation-government-debt-share-price
    MTNL की ₹9,000 करोड़ की संपत्ति बेचेगी सरकार, कर्ज घटाने की तैयारी; सोमवार को शेयर में दिख सकता है बड़ा उतार-चढ़ाव
    7 नवम्बर 2026
    indian-stock-market-rally-fii-buying-investors-wealth
    दुनिया के बाजारों में हाहाकार, फिर भी भारतीय शेयर बाजार में तूफानी तेजी, निवेशकों ने एक दिन में कमाए ₹1.5 लाख करोड़
    7 नवम्बर 2026
    bosch-share-stock-split-bonus-share-1-share-20-shares
    Bosch Share: ₹50,000 का एक शेयर बनेगा 20 शेयर, स्टॉक स्प्लिट और बोनस को बोर्ड की मंजूरी, निवेशकों को मिलेगा डबल फायदा
    6 नवम्बर 2026
    share-market-closed-dhanteras-sensex-1718-points-nifty-crosses-25000
    Share Market Closed: धनतेरस पर शेयर बाजार में दिवाली से पहले धमाका, सेंसेक्स 1,718 अंक उछला; निफ्टी 25,000 के पार बंद
    6 नवम्बर 2026
Search
© 2026 News Jagran Digital Media. All Rights Reserved. | Udyam-HR-05-0178310
Reading: Crude Oil Import: भारत का तेल आयात 18% गिरा, फिर भी जून तिमाही में 26% बढ़ा बिल; जानिए पूरी वजह
Share
Notification Show More
Font ResizerAa
NewsjagranNewsjagran
Font ResizerAa
  • बिजनेस न्यूज़
  • कमोडिटी
  • शेयर बाज़ार
Search
  • बिजनेस न्यूज़
  • कमोडिटी
  • शेयर बाज़ार
Follow US
© 2026 News Jagran. All Rights Reserved.
कमोडिटी

Crude Oil Import: भारत का तेल आयात 18% गिरा, फिर भी जून तिमाही में 26% बढ़ा बिल; जानिए पूरी वजह

Namam Sharma
Last updated: 2026/08/08 at 1:49 अपराह्न
Namam Sharma - Senior Editor – Newsjagran
Share
9 Min Read
global-fuel-crisis-india-america-refineries-profit
SHARE

भारत दुनिया के सबसे बड़े कच्चे तेल आयातक देशों में शामिल है और अपनी घरेलू जरूरत का करीब 88% क्रूड विदेशों से खरीदता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में होने वाला छोटा बदलाव भी भारत के आयात बिल और अर्थव्यवस्था पर बड़ा असर डालता है। वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में इसका असर साफ देखने को मिला।

Contents
59.7 मिलियन टन कच्चा तेल आयातकम तेल खरीदने के बाद भी क्यों बढ़ गया बिल?होर्मुज स्ट्रेट भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण?हर 1 डॉलर की तेजी से कितना बढ़ता है भारत का खर्च?रूस से सस्ता तेल मिलने का फायदा भी सीमित रहाभारत का सबसे बड़ा क्रूड सप्लायर कौन?ऊर्जा सुरक्षा के लिए भारत ने बढ़ाई खरीद के विकल्परुपये की कमजोरी ने भी बढ़ाया दबावआगे भारत के लिए क्या चुनौती?

अप्रैल-जून 2026 के दौरान भारत ने पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 18% कम कच्चा तेल आयात किया, लेकिन इसके बावजूद देश का क्रूड ऑयल इंपोर्ट बिल 26% बढ़ गया। यानी भारत ने कम मात्रा में तेल खरीदा, फिर भी इसके लिए ज्यादा रकम चुकानी पड़ी।

59.7 मिलियन टन कच्चा तेल आयात

वाणिज्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, अप्रैल से जून 2026 के बीच भारत ने करीब 59.7 मिलियन टन कच्चे तेल का आयात किया। पिछले वित्त वर्ष की पहली तिमाही में यह आंकड़ा लगभग 73 मिलियन टन था। इस तरह आयात की मात्रा में करीब 18% की कमी आई।

इसके बावजूद भारत का कच्चे तेल का आयात बिल अप्रैल-जून 2025 के करीब 39 अरब डॉलर से बढ़कर 49 अरब डॉलर हो गया। यानी करीब 10 अरब डॉलर की अतिरिक्त राशि भारत को कच्चा तेल खरीदने में खर्च करनी पड़ी।

इसका सबसे बड़ा कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड की कीमतों में आया तेज उछाल रहा।

कम तेल खरीदने के बाद भी क्यों बढ़ गया बिल?

भारत के क्रूड ऑयल इंपोर्ट बिल में बढ़ोतरी के पीछे सबसे अहम वजह पश्चिम एशिया में बढ़ा तनाव और इसके कारण सप्लाई पर आया दबाव रहा।

संघर्ष शुरू होने से पहले कच्चे तेल की कीमतें 70 डॉलर प्रति बैरल से नीचे थीं। लेकिन होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास शिपमेंट में रुकावट और सप्लाई को लेकर बढ़ी चिंताओं ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों को तेजी से ऊपर पहुंचा दिया।

इस दौरान ब्रेंट क्रूड की कीमत करीब 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थी। हालांकि इसके बाद कीमतों में कुछ नरमी आई। शुक्रवार को ब्रेंट क्रूड करीब 83.55 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ।

भारत के लिए यह स्थिति इसलिए ज्यादा महत्वपूर्ण है क्योंकि देश अपनी कुल क्रूड जरूरत का लगभग 88% हिस्सा आयात करता है।

होर्मुज स्ट्रेट भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण?

होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में से एक है। दुनिया के कुल कच्चे तेल का करीब 20% हिस्सा इस रास्ते से होकर गुजरता है।

भारत के लिए इसकी अहमियत और भी ज्यादा है क्योंकि देश के लगभग 40% कच्चे तेल का आयात इसी मार्ग से आता है। ऐसे में यहां किसी भी तरह की सैन्य कार्रवाई, तनाव या शिपमेंट में बाधा से तेल की कीमत और भारत के आयात खर्च पर सीधा असर पड़ सकता है।

यही वजह है कि पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ते ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी देखने को मिली।

हर 1 डॉलर की तेजी से कितना बढ़ता है भारत का खर्च?

भारत हर साल करीब 1.8 से 2 अरब बैरल कच्चा तेल आयात करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत में सिर्फ 1 डॉलर प्रति बैरल की बढ़ोतरी भी भारत के लिए करीब 2 अरब डॉलर तक अतिरिक्त आयात खर्च का कारण बन सकती है।

इसके अलावा केवल क्रूड की कीमत ही भारत के लिए लागत नहीं बढ़ाती। फ्रेट, इंश्योरेंस और वॉर-रिस्क प्रीमियम जैसे खर्च भी आयातित तेल की अंतिम लागत को प्रभावित करते हैं।

पश्चिम एशिया में संघर्ष के दौरान इन अतिरिक्त लागतों में भी बढ़ोतरी हुई, जिससे भारतीय रिफाइनरों के लिए कच्चे तेल की औसत खरीद लागत बढ़ गई।

रूस से सस्ता तेल मिलने का फायदा भी सीमित रहा

पहली तिमाही में रूस भारत का सबसे बड़ा कच्चा तेल सप्लायर बना रहा। कुल क्रूड इंपोर्ट में रूस की हिस्सेदारी 40% से ज्यादा रही।

हालांकि संघर्ष के दौरान रूस से मिलने वाली पहले की छूट में कमी आई। इसके साथ ही रिफाइनरों को अतिरिक्त वॉर-रिस्क प्रीमियम और अन्य लॉजिस्टिक लागत का भुगतान करना पड़ा।

आंकड़ों के मुताबिक, जून तिमाही के दौरान रूस से आने वाले कच्चे तेल की औसत लागत करीब 2,408 डॉलर प्रति टन रही। इसके मुकाबले संयुक्त अरब अमीरात यानी UAE से आयात किए गए क्रूड की औसत लागत करीब 2,213 डॉलर प्रति टन थी।

इससे पता चलता है कि अलग-अलग देशों से मिलने वाले कच्चे तेल की कीमत में अंतर केवल अंतरराष्ट्रीय क्रूड कीमतों की वजह से नहीं होता, बल्कि परिवहन, बीमा, जोखिम और व्यापारिक शर्तों का भी बड़ा असर होता है।

भारत का सबसे बड़ा क्रूड सप्लायर कौन?

वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में रूस भारत का सबसे बड़ा कच्चा तेल सप्लायर रहा। कुल आयात में उसकी हिस्सेदारी 40% से अधिक रही।

भारत के प्रमुख क्रूड सप्लायर्स की हिस्सेदारी इस प्रकार रही:

देशभारत के क्रूड आयात में हिस्सेदारी
रूस40% से अधिक
UAE14.6%
सऊदी अरब9.9%
वेनेजुएला5.2%
ओमान4.5%

रूस के बाद UAE और सऊदी अरब भारत के प्रमुख तेल आपूर्तिकर्ता रहे। वहीं वेनेजुएला और ओमान की भी भारत के क्रूड इंपोर्ट में महत्वपूर्ण हिस्सेदारी रही।

ऊर्जा सुरक्षा के लिए भारत ने बढ़ाई खरीद के विकल्प

एक सरकारी रिफाइनिंग कंपनी के अधिकारी के मुताबिक, संघर्ष के दौरान रिफाइनरों की प्राथमिकता देश की ऊर्जा सुरक्षा बनाए रखना थी। करीब 1.4 अरब लोगों की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए कंपनियों को जहां से भी सप्लाई उपलब्ध हुई, वहां से कच्चा तेल खरीदना पड़ा।

संघर्ष से पहले उपलब्ध कुछ छूट खत्म होने और वॉर-रिस्क प्रीमियम बढ़ने से खरीद की लागत भी बढ़ी। यही वजह है कि आयात की मात्रा कम होने के बावजूद कुल बिल में तेज वृद्धि देखने को मिली।

रुपये की कमजोरी ने भी बढ़ाया दबाव

कच्चे तेल की कीमतों के अलावा भारतीय रुपये की कमजोरी ने भी आयात बिल बढ़ाने में भूमिका निभाई। अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड की खरीदारी आमतौर पर डॉलर में होती है। ऐसे में रुपये के कमजोर होने पर भारतीय कंपनियों को समान मात्रा में कच्चा तेल खरीदने के लिए ज्यादा रुपये खर्च करने पड़ते हैं।

इस तरह पहली तिमाही में भारत के क्रूड इंपोर्ट बिल पर तीन प्रमुख दबाव देखने को मिले—अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों में तेजी, सप्लाई से जुड़ा जोखिम और रुपये की कमजोरी।

आगे भारत के लिए क्या चुनौती?

भारत के लिए कच्चे तेल की ऊंची कीमत लंबे समय तक बनी रहना महंगाई और चालू खाते के घाटे के लिहाज से चुनौती बन सकता है। पेट्रोल-डीजल, एविएशन फ्यूल और अन्य पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों पर भी इसका अप्रत्यक्ष असर पड़ सकता है।

हालांकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड की कीमतों में हालिया गिरावट भारत के लिए राहत की बात है। अगर कीमतें आगे भी नियंत्रित रहती हैं और पश्चिम एशिया में सप्लाई संबंधी जोखिम कम होते हैं, तो आने वाली तिमाहियों में भारत के आयात बिल पर दबाव घट सकता है।

कुल मिलाकर, जून तिमाही के आंकड़े बताते हैं कि कच्चे तेल की मात्रा कम करना ही भारत के आयात खर्च को कम करने के लिए पर्याप्त नहीं है। चूंकि देश अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय कीमत, डॉलर-रुपया विनिमय दर, शिपिंग लागत और भू-राजनीतिक जोखिम सभी मिलकर भारत के तेल बिल को प्रभावित करते हैं।

You Might Also Like

Gold Silver Price: धनतेरस पर सस्ता हुआ सोना-चांदी, खरीदारों की मौज! कीमतों में आई इतनी गिरावट

Currency Check: कच्चे तेल में नरमी से रुपये को मिला सपोर्ट, 29 पैसे मजबूत होकर 94.35 प्रति डॉलर पर खुला

Gold Silver Price Today: धनतेरस से एक दिन पहले सोना-चांदी महंगे, ₹5,500 तक चढ़े दाम; जानिए 24K, 22K और 18K गोल्ड के लेटेस्ट रेट

Gold Silver Price: धनतेरस से पहले सोने-चांदी ने तोड़े सारे रिकॉर्ड! खूब सस्ता हुआ गोल्ड, खरीदारी का है सही मौका?

ईरान पर अमेरिकी हमले से कच्चे तेल में फिर उबाल, 7% की गिरावट के बाद चढ़े दाम; क्या भारत में महंगा होगा पेट्रोल-डीजल?

TAGGED: Crude Oil Import, Crude Oil Import Bill, Crude Oil Price, India Crude Oil Import, India Oil Import Bill, कच्चे तेल की कीमत, भारत का कच्चा तेल आयात, भारत का तेल आयात, भारत तेल आयात
Share This Article
Facebook Twitter Copy Link Print
Share
By Namam Sharma Senior Editor – Newsjagran
Follow:
नमम शर्मा, Newsjagran के सीनियर एडिटर हैं। बिज़नेस न्यूज़, कमोडिटी बाज़ार, सोना-चांदी भाव, पेट्रोल-डीजल रेट और फाइनेंस में 9 साल का अनुभव। हिंदी डिजिटल पत्रकारिता के जानकार।
Previous Article business-ideas-for-gen-z-zero-investment-online-course-diy-kit-food-business Business Idea For Gen Z: ये 3 बिजनेस शुरू करके Gen Z कर सकती है जबरदस्त कमाई, पहला तो जीरो निवेश में शुरू होगा
Next Article upi-mdr-framework-iit-bombay-report-merchant-fees UPI पर फीस लगाने की तैयारी के बीच SBI चेयरमैन का बड़ा बयान, बोले- ‘हम मौका चूक गए, खोई जमीन वापस पाना मुश्किल’

आज के लाइव रेट्स

  • आज का सोने का भाव
  • आज का चांदी का भाव
  • आज का पेट्रोल-डीजल भाव
  • आज का LPG रेट
  • CNG रेट
  • PNG रेट
  • कच्चे तेल का भाव
  • डॉलर-रुपया रेट
  • IPO GMP Today

सबसे ज्यादा पढ़ी गई खबरें

live-petrol-diesel-price
Petrol Diesel Price Today: आज आपके शहर में पेट्रोल-डीजल के ताजा रेट
कमोडिटी फाइनेंस
gold-price-today
Gold Price Today: आज भारत के प्रमुख शहरों में 24K, 22K और 18K सोने के ताजा रेट
कमोडिटी फाइनेंस
crude-oil-price-today
Crude Oil Price Today: कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट या तेजी? जानिए आज का लेटेस्ट अपडेट
कमोडिटी फाइनेंस
png-price-today
PNG Price Today: आज भारत के प्रमुख शहरों में PNG गैस के ताजा रेट
कमोडिटी फाइनेंस
cng-price-hike-ahmedabad-adani-gas-price-9847
CNG Price Today: आज भारत के प्रमुख शहरों में CNG के ताजा रेट
कमोडिटी फाइनेंस
lpg-price-today
LPG Price Today: आज भारत के प्रमुख शहरों में घरेलू और कमर्शियल LPG सिलेंडर के ताजा रेट
कमोडिटी फाइनेंस
silver-price-today
Silver Price Today: आज भारत के प्रमुख शहरों में चांदी के ताजा रेट
कमोडिटी फाइनेंस
ipo-gmp-today-mainboard-sme
IPO GMP Today: एंटाला इंडस्ट्रीज का GMP शून्य, वेदांत पॉली फैब्स में सिर्फ ₹1 का प्रीमियम; जानें सब्सक्रिप्शन और लिस्टिंग की पूरी डिटेल
शेयर बाज़ार फाइनेंस
maurya-dth-service-kasganj-sd-hd-plans
Maurya DTH Service: कासगंज में SD और HD चैनलों के लिए खास ऑफर, ₹199 से शुरू रिचार्ज प्लान
बिजनेस न्यूज़ फाइनेंस
57th-gst-council-meeting-2026-refund-compliance-itc-arrest-decisions
GST Council Meeting LIVE: रजिस्ट्रेशन और कंप्लायंस पर बड़े फैसले, गिरफ्तारी पावर से लेकर ITC तक वित्त मंत्री ने किया साफ
बिजनेस न्यूज़ फाइनेंस

महत्वपूर्ण पृष्ठ

  • बिजनेस न्यूज़
  • कमोडिटी
  • शेयर बाज़ार

त्वरित लिंक्स

  • मनोरंजन
  • टेक्नोलॉजी
  • उत्सव
  • स्मार्ट फ़ोन
  • बॉलीवुड
  • बिजनेस न्यूज़
  • Advertise With Us
  • अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
  • Terms of Service

Discover News Jagran

  • About Us
  • Contact Us
  • Privacy Policy
  • Disclaimer & Affiliate Disclosure
  • Editorial Policy
  • Author Bio & Team
  • Career

आज के लाइव रेट्स

  • आज का सोने का भाव
  • आज का चांदी का भाव
  • आज का पेट्रोल-डीजल भाव
  • आज का LPG रेट
  • CNG रेट
  • PNG रेट
  • कच्चे तेल का भाव
  • डॉलर-रुपया रेट
  • IPO GMP Today
NewsjagranNewsjagran
© 2026 News Jagran Digital Media | Google News Approved | MSME: Udyam-HR-05-0178310
  • बिजनेस न्यूज़
  • कमोडिटी
  • शेयर बाज़ार
Manage Consent
To provide the best experiences, we use technologies like cookies to store and/or access device information. Consenting to these technologies will allow us to process data such as browsing behaviour or unique IDs on this site. Not consenting or withdrawing consent, may adversely affect certain features and functions.
Functional Always active
The technical storage or access is strictly necessary for the legitimate purpose of enabling the use of a specific service explicitly requested by the subscriber or user, or for the sole purpose of carrying out the transmission of a communication over an electronic communications network.
Preferences
The technical storage or access is necessary for the legitimate purpose of storing preferences that are not requested by the subscriber or user.
Statistics
The technical storage or access that is used exclusively for statistical purposes. The technical storage or access that is used exclusively for anonymous statistical purposes. Without a subpoena, voluntary compliance on the part of your Internet Service Provider, or additional records from a third party, information stored or retrieved for this purpose alone cannot usually be used to identify you.
Marketing
The technical storage or access is required to create user profiles to send advertising, or to track the user on a website or across several websites for similar marketing purposes.
  • Manage options
  • Manage services
  • Manage {vendor_count} vendors
  • Read more about these purposes
View preferences
  • {title}
  • {title}
  • {title}
Welcome Back!

Sign in to your account

Lost your password?