Zee Entertainment Share Price: जून तिमाही के नतीजों के बाद Zee Entertainment Enterprises के शेयरों में मंगलवार को दबाव देखने को मिला। कारोबार के दौरान शेयर करीब 5% तक टूटकर ₹89.90 के इंट्रा-डे लो पर पहुंच गया। हालांकि बाद में इसमें कुछ रिकवरी हुई। कंपनी के नतीजों के बाद ब्रोकरेज फर्मों की राय भी बंटी हुई है। जहां CLSA ने शेयर पर Outperform रेटिंग देते हुए ₹125 का टारगेट दिया है, वहीं Citi ने Sell रेटिंग के साथ ₹80 का लक्ष्य तय किया है। घरेलू ब्रोकरेज Motilal Oswal ने शेयर पर Neutral रेटिंग रखते हुए ₹100 का टारगेट दिया है।
यानी मौजूदा स्तर से ब्रोकरेज के टारगेट में काफी बड़ा अंतर है। ऐसे में निवेशकों के लिए यह समझना जरूरी है कि कंपनी के कारोबार में आखिर कौन-से मजबूत संकेत हैं और किन चुनौतियों की वजह से कुछ ब्रोकरेज अभी भी सतर्क हैं।
शेयर में क्यों आई गिरावट?
जून तिमाही के नतीजों के बाद Zee Entertainment के शेयर पर बिकवाली देखने को मिली। कंपनी का कंसोलिडेटेड रेवेन्यू सालाना आधार पर करीब 5% बढ़कर ₹1,900 करोड़ रहा, लेकिन यह बाजार के अनुमान से कम रहा।
कंपनी के प्रदर्शन में सबसे बड़ी चिंता विज्ञापन कारोबार की कमजोरी रही। जून तिमाही में विज्ञापन से होने वाली कमाई में सालाना आधार पर करीब 11% की गिरावट आई। इसके उलट सब्सक्रिप्शन कारोबार और डिजिटल प्लेटफॉर्म Zee5 ने कंपनी को सहारा दिया।
यही वजह है कि नतीजों के बाद ब्रोकरेज हाउस के आकलन में काफी अंतर देखने को मिला है।
CLSA ने दिया ₹125 का टारगेट
CLSA Zee Entertainment को लेकर सबसे ज्यादा बुलिश ब्रोकरेज में शामिल है। उसने शेयर पर Outperform रेटिंग बरकरार रखते हुए ₹125 का टारगेट प्राइस तय किया है।
ब्रोकरेज के मुताबिक जून तिमाही में कंपनी का कंसोलिडेटेड रेवेन्यू सालाना आधार पर 5% बढ़कर करीब ₹1,900 करोड़ रहा, हालांकि यह अनुमान से कम था। विज्ञापन कारोबार में 11% की गिरावट चिंता का विषय रही।
दूसरी तरफ सब्सक्रिप्शन रेवेन्यू में मजबूत ग्रोथ देखने को मिली। FIFA 2026 से जुड़े कंटेंट, OTT कारोबार और Zee5 के विस्तार से कंपनी की सब्सक्रिप्शन कमाई जून तिमाही में सालाना आधार पर 16% और पिछली तिमाही के मुकाबले 11% बढ़ी।
CLSA के मुताबिक स्पोर्ट्स कंटेंट में निवेश और नए स्पोर्ट्स चैनल की लॉन्चिंग से कंपनी को भविष्य में व्यूअरशिप और सब्सक्रिप्शन के मोर्चे पर फायदा मिल सकता है।
हालांकि इन निवेशों के कारण कंपनी के खर्च में भी बढ़ोतरी हुई। FIFA से जुड़े प्रोग्रामिंग खर्च और ऐडवर्टाइजिंग एंड प्रमोशन यानी A&P पर अधिक खर्च की वजह से मार्जिन पर दबाव आया।
Citi की राय: ₹80 तक गिर सकता है शेयर
CLSA के बिल्कुल उलट Citi ने Zee Entertainment पर Sell रेटिंग दी है। ब्रोकरेज ने शेयर का टारगेट प्राइस ₹80 रखा है।
Citi के अनुसार जून तिमाही में कंपनी के रेवेन्यू को सब्सक्रिप्शन कारोबार की 16% ग्रोथ और डिजिटल कारोबार की मजबूत स्थिति से सपोर्ट मिला। Zee5 का रेवेन्यू सालाना आधार पर करीब 58% बढ़ा।
लेकिन कंपनी के लिए विज्ञापन कारोबार अभी भी सबसे बड़ी चुनौती बना हुआ है। मैक्रो-इकोनॉमिक कमजोरी के बीच विज्ञापन रेवेन्यू में 11% की गिरावट आई है।
मैनेजमेंट ने जून तिमाही के दौरान विज्ञापन कारोबार में सुधार के संकेतों पर जोर दिया है और आने वाले फेस्टिव सीजन को लेकर भी सकारात्मक रुख दिखाया है। लेकिन Citi का मानना है कि कंपनी के मार्जिन में टिकाऊ सुधार के लिए विज्ञापन कारोबार का लगातार मजबूत होना जरूरी है।
Citi के मुताबिक FIFA और फुटबॉल से जुड़ी अन्य स्पोर्ट्स प्रॉपर्टीज में वापसी रणनीतिक रूप से फायदेमंद हो सकती है। इससे सब्सक्राइबर बेस, व्यूअरशिप और विज्ञापनदाताओं की दिलचस्पी बढ़ सकती है। हालांकि इन निवेशों से कंपनी को वास्तव में कितना मुनाफा मिलेगा और इन्हें कितने बड़े स्तर तक बढ़ाया जा सकेगा, यह अभी स्पष्ट नहीं है।
Zee5 बना कंपनी के लिए मजबूत सहारा
कंपनी के प्रदर्शन का सबसे सकारात्मक पहलू Zee5 का लगातार बेहतर प्रदर्शन रहा। जून तिमाही में Zee5 के रेवेन्यू में करीब 58% की बढ़ोतरी हुई और इसका एडजस्टेड EBITDA लगातार तीसरी तिमाही पॉजिटिव रहा।
यह संकेत देता है कि कंपनी का डिजिटल कारोबार धीरे-धीरे अपनी स्थिति मजबूत कर रहा है।
हालांकि दूसरी तरफ Linear TV कारोबार में कमजोरी जारी रही। Citi के मुताबिक नेटवर्क शेयर में सुधार और Zee5 की बेहतर स्थिति के बावजूद कंटेंट और मार्केटिंग पर अधिक निवेश की वजह से कंसोलिडेटेड EBITDA मार्जिन घटकर करीब 4.1% रह गया।
यही मार्जिन का दबाव निवेशकों के लिए एक महत्वपूर्ण चिंता बना हुआ है।
Motilal Oswal ने रखा ₹100 का टारगेट
घरेलू ब्रोकरेज Motilal Oswal ने Zee Entertainment पर Neutral रेटिंग देते हुए ₹100 का टारगेट प्राइस रखा है।
ब्रोकरेज के मुताबिक जून तिमाही कंपनी के लिए एक और कमजोर तिमाही रही। सब्सक्रिप्शन रेवेन्यू में 16% की अच्छी ग्रोथ के बावजूद विज्ञापन रेवेन्यू सालाना आधार पर करीब 11.5% घटा। वहीं EBITDA में लगभग 65% की गिरावट आई।
हालांकि Zee5 ने सकारात्मक संकेत दिए हैं। जून तिमाही में इसका एडजस्टेड EBITDA लगातार तीसरी तिमाही पॉजिटिव रहा और रेवेन्यू में करीब 58% की बढ़ोतरी दर्ज हुई।
Motilal Oswal का मानना है कि Zee5 के बेहतर प्रदर्शन के बावजूद Linear TV कारोबार में लगातार कमजोर मुनाफे ने डिजिटल कारोबार से मिलने वाले सकारात्मक प्रभाव को काफी हद तक कम कर दिया।
आगे किन चीजों पर रहेगी नजर?
Motilal Oswal के मुताबिक मैनेजमेंट को विज्ञापन कारोबार में सुधार की उम्मीद है, लेकिन वह इस मोर्चे पर सतर्क भी है। आने वाले फेस्टिव सीजन से पहले मैक्रो-इकोनॉमिक माहौल में सुधार, स्पोर्ट्स कंटेंट में वापसी और नए सेगमेंट में विस्तार कंपनी के लिए अहम हो सकता है।
कंपनी बच्चों के मनोरंजन और माइक्रो-ड्रामा जैसे नए क्षेत्रों में भी अपनी मौजूदगी बढ़ाने की कोशिश कर रही है।
हालांकि FIFA से जुड़े सब्सक्रिप्शन पैक और कंटेंट की लागत का पूरा प्रभाव अगली तिमाही में देखने को मिल सकता है। विज्ञापन कारोबार में कमजोरी और कंटेंट पर बढ़ते खर्च को देखते हुए Motilal Oswal ने FY27 की कमाई के अनुमान में 24% और FY28 के अनुमान में 14% की कटौती की है।
₹125 बनाम ₹80: निवेशक क्या समझें?
Zee Entertainment को लेकर तीनों ब्रोकरेज की राय से साफ है कि शेयर की दिशा को लेकर बाजार में फिलहाल स्पष्ट सहमति नहीं है।
| ब्रोकरेज फर्म | रेटिंग | टारगेट प्राइस |
|---|---|---|
| CLSA | Outperform | ₹125 |
| Motilal Oswal | Neutral | ₹100 |
| Citi | Sell | ₹80 |
CLSA का बुलिश नजरिया मुख्य रूप से सब्सक्रिप्शन ग्रोथ, Zee5 की बेहतर स्थिति और स्पोर्ट्स कारोबार से मिलने वाले संभावित फायदे पर आधारित है। दूसरी ओर Citi और Motilal Oswal का सतर्क रुख विज्ञापन कारोबार की कमजोरी, मार्जिन पर दबाव और बढ़ते कंटेंट एवं मार्केटिंग खर्च से जुड़ा है।
ऐसे में निवेशकों के लिए केवल किसी एक ब्रोकरेज के टारगेट को देखकर फैसला लेना उचित नहीं होगा। आने वाली तिमाहियों में विज्ञापन रेवेन्यू, Zee5 की ग्रोथ, EBITDA मार्जिन और स्पोर्ट्स कंटेंट पर किए गए निवेश का रिटर्न शेयर की दिशा तय करने वाले प्रमुख फैक्टर हो सकते हैं।
निवेशकों के लिए क्या रणनीति हो सकती है?
अगर कोई निवेशक Zee Entertainment में निवेश पर विचार कर रहा है, तो मौजूदा स्थिति में कंपनी के अगले कुछ तिमाही के प्रदर्शन पर नजर रखना महत्वपूर्ण होगा। खासतौर पर विज्ञापन कारोबार में रिकवरी और मार्जिन में सुधार यह तय करने में अहम भूमिका निभाएगा कि शेयर CLSA के ₹125 वाले बुलिश लक्ष्य की ओर बढ़ता है या Citi के ₹80 वाले डाउनसाइड लक्ष्य की तरफ जाता है।
ब्रोकरेज टारगेट को निश्चित भविष्यवाणी नहीं माना जाना चाहिए। शेयर बाजार में वास्तविक प्रदर्शन कंपनी के नतीजों, बाजार की स्थिति और निवेशकों की धारणा के आधार पर बदल सकता है।
डिस्क्लेमर: इस लेख में दिए गए ब्रोकरेज टारगेट और राय संबंधित ब्रोकरेज फर्मों के विश्लेषण पर आधारित हैं। यह निवेश सलाह नहीं है। शेयर बाजार में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। किसी भी निवेश का फैसला लेने से पहले अपने सर्टिफाइड वित्तीय सलाहकार से सलाह जरूर लें।


