8th Pay Commission: आठवें वेतन आयोग की सिफारिशें लागू होने के बाद सरकारी कर्मचारियों की आय और खर्च करने की क्षमता में बढ़ोतरी हो सकती है। इसका सीधा फायदा कंजम्प्शन यानी खपत से जुड़े सेक्टर और कंपनियों को मिलने की उम्मीद है। एडलवाइज एसेट मैनेजमेंट कंपनी के सीआईओ (इक्विटीज) त्रिदीप भट्टाचार्य का मानना है कि भारतीय शेयर बाजार अब कई नकारात्मक कारकों का असर पीछे छोड़ चुका है और आने वाले समय में चुनिंदा सेक्टर बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं।
11 अगस्त को हालांकि भारतीय शेयर बाजार में दबाव देखने को मिला। दोपहर करीब 1 बजे निफ्टी 0.49 फीसदी यानी करीब 120 अंक गिरकर 24,462 के आसपास कारोबार कर रहा था। वहीं सेंसेक्स 0.47 फीसदी यानी करीब 367 अंक की गिरावट के साथ 78,172 के स्तर पर था। बैंक निफ्टी में भी कमजोरी रही, जबकि निफ्टी आईटी इंडेक्स करीब 0.44 फीसदी की बढ़त में था।
8वें वेतन आयोग से कंजम्प्शन शेयरों को फायदा क्यों?
त्रिदीप भट्टाचार्य के मुताबिक, आठवें वेतन आयोग की सिफारिशें लागू होने पर सरकारी कर्मचारियों की डिस्पोजेबल इनकम बढ़ सकती है। इसका असर रोजमर्रा की खपत से लेकर ऑटोमोबाइल, होटल, रिटेल और दूसरी डिस्क्रेशनरी कैटेगरी पर दिखाई दे सकता है।
जब लोगों की आय बढ़ती है तो जरूरी खर्चों के अलावा गैर-जरूरी और बड़े खर्चों के लिए भी उनकी क्षमता बढ़ती है। ऐसे में कार, दोपहिया वाहन, इलेक्ट्रॉनिक्स, ट्रैवल, होटल और रिटेल जैसी कैटेगरी में मांग मजबूत हो सकती है।
यही वजह है कि वेतन आयोग का असर सिर्फ सरकारी कर्मचारियों तक सीमित नहीं रह सकता, बल्कि इसका अप्रत्यक्ष प्रभाव पूरी कंजम्प्शन इकोनॉमी पर देखने को मिल सकता है।
जीएसटी कटौती के बाद भी दिखा था ऐसा असर
भट्टाचार्य ने आठवें वेतन आयोग के संभावित असर की तुलना पिछले साल हुई जीएसटी दरों में कमी से की। उनके मुताबिक, सितंबर में जीएसटी में कमी लागू होने के बाद अगले 3 से 5 महीनों में कंजम्प्शन से जुड़े शेयरों में अच्छी तेजी देखने को मिली थी।
उनका मानना है कि अगर वेतन आयोग के जरिए लोगों की खर्च करने योग्य आय में वास्तविक बढ़ोतरी होती है, तो इसका असर भी इसी तरह कंजम्प्शन सेक्टर में दिखाई दे सकता है।
हालांकि, निवेशकों को यह ध्यान रखना चाहिए कि किसी भी नीति के लागू होने और उसका कंपनियों की कमाई पर असर पड़ने के बीच समय का अंतर हो सकता है। इसलिए केवल वेतन आयोग की उम्मीद के आधार पर किसी शेयर में निवेश करना उचित नहीं माना जा सकता।
भारतीय बाजार ने निगेटिव फैक्टर्स को पीछे छोड़ा
त्रिदीप भट्टाचार्य का भारतीय शेयर बाजार को लेकर नजरिया सकारात्मक है। उनका कहना है कि बाजार कई नकारात्मक चीजों को पीछे छोड़ चुका है। यही वजह है कि मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी एक नया ट्रेंड देखने को मिल रहा है।
उनके मुताबिक, आने वाले समय में बैंकिंग सेक्टर में क्रेडिट ग्रोथ भी मजबूत हो सकती है। उनका अनुमान है कि बैंकिंग क्रेडिट ग्रोथ पिछले साल के 10-12 फीसदी के मुकाबले बढ़कर 18-20 फीसदी तक पहुंच सकती है।
दिलचस्प बात यह है कि अभी तक इस संभावित क्रेडिट ग्रोथ का पूरा फायदा मिडकैप प्राइवेट बैंक शेयरों में दिखाई नहीं दिया है। ऐसे में अगर क्रेडिट डिमांड मजबूत होती है, तो इस कैटेगरी के चुनिंदा शेयरों पर निवेशकों की नजर रह सकती है।
ऑटो और होटल सेक्टर पर बुलिश नजरिया
भट्टाचार्य को ऑटो और होटल जैसे डिस्क्रेशनरी सेक्टर में इस साल की दूसरी छमाही में बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद है। डिस्क्रेशनरी सेक्टर में वे खर्च शामिल होते हैं जिन्हें उपभोक्ता अपनी जरूरतों के अलावा अतिरिक्त आय या बेहतर आर्थिक स्थिति होने पर करते हैं।
ऑटो सेक्टर में अगर उपभोक्ता मांग मजबूत होती है और ब्याज दरों तथा फाइनेंसिंग की स्थिति अनुकूल रहती है, तो यात्री वाहन और दोपहिया वाहनों की बिक्री को सपोर्ट मिल सकता है।
इसी तरह होटल और हॉस्पिटैलिटी सेक्टर को घरेलू यात्रा, बिजनेस ट्रैवल और बढ़ते उपभोक्ता खर्च से फायदा मिल सकता है। भट्टाचार्य ने ऑटो के साथ होटल और रिटेल सेक्टर को भी अपनी पसंदीदा थीम में शामिल किया है।
आईटी शेयरों पर न्यूट्रल रुख
आईटी सेक्टर को लेकर भट्टाचार्य का रुख फिलहाल न्यूट्रल है। इसका मतलब है कि वह इस सेक्टर में बहुत आक्रामक तेजी की उम्मीद नहीं कर रहे हैं।
11 अगस्त को बाजार में व्यापक कमजोरी के बावजूद निफ्टी आईटी इंडेक्स करीब 0.44 फीसदी ऊपर कारोबार कर रहा था। ज्यादातर प्रमुख आईटी शेयरों में भी मजबूती दिखाई दे रही थी।
फिर भी भट्टाचार्य की निवेश रणनीति में फिलहाल ऑटो, होटल और रिटेल जैसे घरेलू खपत से जुड़े सेक्टर ज्यादा आकर्षक नजर आ रहे हैं।
ऑटो एंसिलियरी कंपनियों में भी अवसर
ऑटो सेक्टर के साथ ऑटो एंसिलियरी कंपनियां भी उनकी पसंद में शामिल हैं। हालांकि, यहां एक अहम बदलाव उन कंपनियों में देखने को मिल सकता है जो पारंपरिक ऑटो कारोबार पर पूरी तरह निर्भर नहीं हैं।
भट्टाचार्य के मुताबिक, रुपये में कमजोरी से एक्सपोर्ट करने वाली ऑटो एंसिलियरी कंपनियों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता को फायदा मिल सकता है। कमजोर रुपया भारतीय निर्यातकों के लिए विदेशी बाजारों में कीमतों के लिहाज से अनुकूल स्थिति पैदा कर सकता है, हालांकि इसका वास्तविक लाभ कंपनी के कॉस्ट स्ट्रक्चर और हेजिंग पर भी निर्भर करता है।
सेमीकंडक्टर, एयरोस्पेस और डिफेंस में डायवर्सिफिकेशन
ऑटो एंसिलियरी सेक्टर में उन कंपनियों पर भी नजर रखी जा सकती है जो अपने कारोबार को ऑटो से आगे बढ़ाकर सेमीकंडक्टर, एयरोस्पेस और डिफेंस एक्सपोर्ट जैसे क्षेत्रों में डायवर्सिफाई कर रही हैं।
इस तरह का डायवर्सिफिकेशन कंपनियों के लिए लंबे समय में नए ग्रोथ इंजन तैयार कर सकता है। अगर घरेलू ऑटो मांग में किसी समय कमजोरी आती है, तो दूसरे क्षेत्रों से मिलने वाला कारोबार कंपनी की आय को सपोर्ट कर सकता है।
हालांकि, भट्टाचार्य ने इस संदर्भ में किसी विशेष कंपनी का नाम नहीं बताया है। इसलिए निवेशकों को केवल इस थीम के आधार पर किसी खास स्टॉक को चुनने के बजाय कंपनी की वैल्यूएशन, ऑर्डर बुक, मुनाफे, कर्ज और कैश फ्लो जैसे बुनियादी पहलुओं का भी आकलन करना चाहिए।
11 अगस्त को शेयर बाजार में दिखी कमजोरी
11 अगस्त के कारोबारी सत्र में भारतीय शेयर बाजार पर दबाव बना हुआ था। दोपहर करीब 1 बजे निफ्टी 0.49 फीसदी की गिरावट के साथ 24,462 के आसपास कारोबार कर रहा था। सेंसेक्स भी करीब 367 अंक टूटकर 78,172 के स्तर पर था।
बैंक निफ्टी में भी कमजोरी रही। हालांकि, आईटी इंडेक्स ने बाजार के मुकाबले बेहतर प्रदर्शन किया और करीब 0.44 फीसदी की तेजी में कारोबार कर रहा था।
इससे संकेत मिलता है कि बाजार में फिलहाल सेक्टरल रोटेशन देखने को मिल रहा है। एक तरफ व्यापक बाजार में दबाव है, वहीं दूसरी तरफ कुछ चुनिंदा सेक्टरों में खरीदारी बनी हुई है।
निवेशकों के लिए क्या है संकेत?
त्रिदीप भट्टाचार्य की राय को देखें तो आने वाले समय में घरेलू खपत और आर्थिक गतिविधियों से जुड़े सेक्टर बाजार के फोकस में रह सकते हैं। आठवें वेतन आयोग से सरकारी कर्मचारियों की आय में संभावित बढ़ोतरी, क्रेडिट ग्रोथ में तेजी और घरेलू मांग में सुधार जैसे फैक्टर कंजम्प्शन थीम को सपोर्ट कर सकते हैं।
ऑटो, होटल, रिटेल और ऑटो एंसिलियरी जैसे सेक्टर इस थीम के संभावित लाभार्थी हो सकते हैं। वहीं सेमीकंडक्टर, एयरोस्पेस और डिफेंस जैसे क्षेत्रों में डायवर्सिफिकेशन करने वाली कंपनियां लंबी अवधि में अतिरिक्त ग्रोथ का फायदा उठा सकती हैं।
फिर भी शेयर बाजार में किसी भी थीम का मजबूत होना यह गारंटी नहीं देता कि उससे जुड़े हर शेयर में तेजी आएगी। निवेशकों को कंपनी के फंडामेंटल, वैल्यूएशन और जोखिमों को ध्यान में रखकर ही निवेश का फैसला करना चाहिए।
डिस्क्लेमर: यह लेख बाजार विशेषज्ञ की राय और उपलब्ध कारोबारी जानकारी पर आधारित है। इसे निवेश की सलाह न समझें। शेयर बाजार में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। किसी भी निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से सलाह लें।


