भारत दुनिया का सबसे बड़ा आम उत्पादक देश है, जहां हर साल लगभग 20 से 25 मिलियन टन आम का उत्पादन होता है। लेकिन इस विशाल उत्पादन के बीच बहुत कम लोग जानते हैं कि भारत में आम की खेती को एक औद्योगिक और पर्यावरणीय मॉडल में बदलने वाला एक अनोखा प्रोजेक्ट भी मौजूद है, जिसे देश के सबसे बड़े कारोबारी घरानों में से एक ने विकसित किया है। यह कहानी सिर्फ खेती की नहीं है, बल्कि पर्यावरण, उद्योग और बिजनेस रणनीति के मेल की भी है।
गुजरात के जामनगर में स्थित “धीरूभाई अंबानी लखीबाग अमराई” आज भारत का सबसे बड़ा आम का बाग माना जाता है और इसे दुनिया के सबसे बड़े संगठित Mango plantations में भी गिना जाता है। इस बाग के पीछे रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड का नाम जुड़ा है, जिसके चेयरमैन मुकेश अंबानी हैं।
कैसे शुरू हुआ यह अनोखा आम का बाग?
इस प्रोजेक्ट की शुरुआत 1990 के दशक के अंत में हुई थी। उस समय जामनगर में रिलायंस की बड़ी रिफाइनरी यूनिट स्थापित की जा रही थी। लेकिन औद्योगिक गतिविधियों के कारण पर्यावरण और प्रदूषण को लेकर गंभीर चिंताएं सामने आने लगीं।
इसी समस्या के समाधान के रूप में एक ऐसा विचार सामने आया, जिसने बाद में एक ऐतिहासिक पर्यावरणीय मॉडल का रूप ले लिया। रिफाइनरी के आसपास की बंजर भूमि को हरियाली में बदलने के लिए बड़े पैमाने पर पेड़ लगाने का फैसला किया गया। इसी योजना के तहत आम के पेड़ों का एक विशाल बाग विकसित किया गया।
यह सिर्फ एक ग्रीन बेल्ट बनाने का प्रयास नहीं था, बल्कि एक ऐसा मॉडल था जो प्रदूषण को कम करे, ऑक्सीजन बढ़ाए और औद्योगिक क्षेत्र को संतुलित वातावरण दे।
600 एकड़ में फैला भारत का सबसे बड़ा Mango Orchard
आज यह बाग लगभग 600 एकड़ में फैला हुआ है और इसमें करीब 1.5 लाख से अधिक आम के पेड़ मौजूद हैं। यह आंकड़ा इसे न केवल भारत का बल्कि दुनिया के सबसे बड़े संगठित आम बागानों में से एक बनाता है।
यहां 200 से अधिक किस्मों के आम उगाए जाते हैं, जिनमें अल्फांसो, केसर, लंगड़ा और कई प्रीमियम वैरायटी शामिल हैं। हर साल इस बाग से सैकड़ों टन आम का उत्पादन किया जाता है, जो घरेलू बाजार के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी निर्यात होता है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, यहां से सालाना लगभग 600 टन आम का निर्यात किया जाता है, जो इसे एक हाई-वैल्यू एग्रीकल्चर मॉडल बनाता है।
प्रदूषण से शुरू हुआ प्रोजेक्ट, अब बना ग्लोबल मॉडल
इस बाग की सबसे खास बात यह है कि इसका उद्देश्य सिर्फ कृषि उत्पादन नहीं था, बल्कि पर्यावरण सुधार भी था। जामनगर क्षेत्र में रिफाइनरी से उत्पन्न प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए यह ग्रीन बेल्ट तैयार किया गया था।
पेड़ों की घनी हरियाली ने हवा की गुणवत्ता में सुधार किया और आसपास के तापमान को भी नियंत्रित करने में मदद की। धीरे-धीरे यह प्रोजेक्ट एक पर्यावरणीय सफलता की कहानी बन गया।
इसी वजह से इसे अक्सर “Industrial Green Belt Model” के रूप में भी देखा जाता है, जिसे कई विशेषज्ञ भारत में कॉर्पोरेट पर्यावरण प्रबंधन का उदाहरण मानते हैं।
पानी और टेक्नोलॉजी का भी अनोखा इस्तेमाल
इस बाग की स्थापना सिर्फ पेड़ लगाने तक सीमित नहीं थी। यहां पानी की व्यवस्था के लिए एक डीसैलिनेशन (Desalination) प्लांट भी लगाया गया, जिससे समुद्री पानी को उपयोगी बनाकर सिंचाई में इस्तेमाल किया जाता है।
यह तकनीकी कदम इस प्रोजेक्ट को और भी आधुनिक बनाता है क्योंकि यह जल संरक्षण और रिसाइक्लिंग पर आधारित है। आज के समय में जब पानी की कमी एक बड़ी चुनौती बन चुकी है, यह मॉडल काफी महत्वपूर्ण माना जाता है।
क्यों माना जाता है इसे दुनिया का अनोखा Mango Export Model?
हालांकि भारत में कई बड़े आम बागान हैं, लेकिन यह प्रोजेक्ट इसलिए अलग माना जाता है क्योंकि यह पूरी तरह एक कॉर्पोरेट प्रबंधन मॉडल पर चलता है।
यहां उत्पादन, पैकेजिंग, गुणवत्ता नियंत्रण और निर्यात सब कुछ एक व्यवस्थित सिस्टम के तहत किया जाता है। इसी वजह से इसे सिर्फ एक खेत नहीं बल्कि एक “Agri-Industrial Ecosystem” कहा जाता है।
यह मॉडल यह भी दिखाता है कि कैसे बड़ी कंपनियां कृषि क्षेत्र में भी प्रभाव डाल सकती हैं।
नामकरण का ऐतिहासिक कनेक्शन
इस बाग का नाम “धीरूभाई अंबानी लखीबाग अमराई” रखा गया है, जो ऐतिहासिक रूप से मुगल काल के “लखीबाग” से प्रेरित माना जाता है। यह नाम भारत की कृषि और सांस्कृतिक विरासत को आधुनिक औद्योगिक मॉडल से जोड़ने का प्रतीक है।
आर्थिक और ब्रांड वैल्यू
रिपोर्ट्स के अनुसार, इस परियोजना से रिलायंस को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से महत्वपूर्ण आर्थिक लाभ भी मिलता है। हालांकि इसका मुख्य उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण था, लेकिन इसका एग्री-एक्सपोर्ट मॉडल धीरे-धीरे एक मजबूत सप्लाई चेन सिस्टम में बदल गया।
यह बाग रिलायंस की ESG (Environmental, Social, Governance) रणनीति का भी हिस्सा माना जाता है, जो वैश्विक निवेशकों के लिए एक सकारात्मक संकेत देता है।
भारत के लिए क्या सीख देता है यह मॉडल?
यह परियोजना भारत के लिए कई मायनों में महत्वपूर्ण है।
पहला, यह दिखाता है कि उद्योग और पर्यावरण एक साथ चल सकते हैं।
दूसरा, यह बताता है कि बड़े कॉर्पोरेट प्रोजेक्ट्स कृषि और ग्रामीण विकास में योगदान दे सकते हैं।
तीसरा, यह मॉडल भविष्य में “Sustainable Agriculture” के लिए एक उदाहरण बन सकता है।
निष्कर्ष
जामनगर का यह आम बाग सिर्फ पेड़ों का समूह नहीं है, बल्कि एक सोच का परिणाम है। प्रदूषण की समस्या से शुरू हुआ यह विचार आज दुनिया के सबसे बड़े और संगठित आम उत्पादन मॉडल में बदल चुका है।
मुकेश अंबानी के नेतृत्व में रिलायंस इंडस्ट्रीज ने इसे एक ऐसे प्रोजेक्ट में बदल दिया है जो पर्यावरण, कृषि और बिजनेस तीनों को एक साथ जोड़ता है। यह कहानी साबित करती है कि अगर विजन बड़ा हो, तो एक समस्या भी एक वैश्विक समाधान में बदल सकती है।
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