पश्चिमी एशिया में जारी संघर्ष अब भारत के निर्यात कारोबार पर भारी पड़ने लगा है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Hormuz Strait) में बढ़ते तनाव और समुद्री मार्गों में बाधा के कारण भारत से बासमती चावल और चाय का निर्यात गंभीर रूप से प्रभावित हो गया है। हालात ऐसे हैं कि कांडला बंदरगाह पर करीब 1 लाख टन बासमती चावल से लदे जहाज पिछले कई दिनों से फंसे हुए हैं और रास्ता खुलने का इंतजार कर रहे हैं।
व्यापार पर पड़ा सीधा असर
पश्चिमी एशिया भारत के लिए बासमती चावल और चाय का सबसे बड़ा बाजार माना जाता है। लेकिन क्षेत्र में बढ़ते सैन्य तनाव और समुद्री मार्गों की अनिश्चितता ने निर्यातकों की चिंता बढ़ा दी है। निर्यातकों का कहना है कि पहले सामान की शिपमेंट रुक-रुक कर हो रही थी, लेकिन अब पिछले एक सप्ताह से कारोबार लगभग पूरी तरह ठप हो गया है।
1 लाख टन चावल बंदरगाह पर फंसा
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार कांडला बंदरगाह पर करीब 100,000 टन बासमती चावल से लदे तीन बड़े जहाज खड़े हैं। ये जहाज पश्चिमी एशिया के देशों के लिए रवाना होने वाले थे, लेकिन होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ते संकट के कारण इन्हें रोक दिया गया है।
निर्यातकों का कहना है कि यदि जल्द स्थिति सामान्य नहीं हुई तो लाखों डॉलर का व्यापार प्रभावित हो सकता है और किसानों से लेकर व्यापारियों तक सभी को नुकसान उठाना पड़ सकता है।
एक सप्ताह से पूरी तरह बंद हुआ निर्यात
इंडियन राइस एक्सपोर्टर्स फेडरेशन के उपाध्यक्ष देव गर्ग के अनुसार अमेरिका और ईरान के बीच संभावित शांति समझौते की उम्मीद में निर्यातक इंतजार कर रहे हैं। हालांकि फरवरी के अंत से क्षेत्र में जारी तनाव के कारण निर्यात गतिविधियां प्रभावित थीं, लेकिन पिछले लगभग एक सप्ताह से हालात और खराब हो गए हैं।
सऊदी अरब, ईरान, इराक, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और यमन जैसे देश भारत के कुल बासमती चावल निर्यात का लगभग 50 प्रतिशत हिस्सा खरीदते हैं। यही कारण है कि इस क्षेत्र में संकट का सीधा असर भारतीय निर्यातकों पर पड़ रहा है।
चाय उद्योग को भी बड़ा झटका
सिर्फ चावल ही नहीं, भारतीय चाय उद्योग भी इस संकट की मार झेल रहा है। चाय निर्यातकों का कहना है कि खाड़ी देशों से प्रीमियम सेकंड फ्लश ऑर्थोडॉक्स चाय के बड़े ऑर्डर मिल रहे हैं, लेकिन समुद्री मार्ग बाधित होने के कारण सप्लाई नहीं की जा पा रही है।
पश्चिम एशिया भारतीय चाय निर्यात का लगभग 46 प्रतिशत हिस्सा खरीदता है। ऐसे में निर्यात रुकने से उद्योग को भारी नुकसान की आशंका है।
हर साल कितना बासमती चावल निर्यात करता है भारत?
भारत दुनिया का सबसे बड़ा बासमती चावल निर्यातक देश है। आंकड़ों के अनुसार देश में हर साल लगभग 72 लाख टन बासमती चावल का उत्पादन होता है, जिसमें से करीब 60 लाख टन विदेशों में निर्यात किया जाता है।
वहीं वर्ष 2025 में पश्चिम एशियाई देशों ने भारत से लगभग 129.19 करोड़ किलोग्राम चाय का आयात किया था। यह क्षेत्र भारतीय चाय उद्योग के लिए विदेशी मुद्रा कमाने वाले सबसे बड़े बाजारों में शामिल है।
अगर संकट लंबा चला तो बढ़ सकती हैं मुश्किलें
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव लंबे समय तक बना रहता है तो भारतीय निर्यातकों को वैकल्पिक मार्ग तलाशने पड़ सकते हैं। इससे परिवहन लागत बढ़ेगी और अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मकता प्रभावित हो सकती है।
बासमती चावल और चाय जैसे प्रमुख निर्यात उत्पादों पर पड़ रहा यह असर भारत के कृषि और व्यापार क्षेत्र के लिए चिंता का विषय बन गया है। अब सभी की नजरें पश्चिमी एशिया की स्थिति और समुद्री मार्गों के सामान्य होने पर टिकी हैं।


