मुंबई | 28 अप्रैल 2026
भारतीय रुपया मंगलवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 53 पैसे कमजोर होकर 94.68 के स्तर पर बंद हुआ। विदेशी बाजारों में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी, विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली और वैश्विक भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं ने रुपये पर दबाव बढ़ा दिया है।
रुपये में गिरावट की मुख्य वजह क्या रही?
फॉरेक्स ट्रेडर्स के अनुसार, रुपये में गिरावट के पीछे कई बड़े कारण रहे:
1. कच्चे तेल की ऊंची कीमतें
अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें लगातार ऊंची बनी हुई हैं, जिससे भारत का आयात बिल बढ़ रहा है और डॉलर की मांग तेज हो रही है।
2. विदेशी निवेशकों की बिकवाली
इस साल अब तक विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने भारतीय शेयर बाजार से 19 अरब डॉलर से अधिक की निकासी की है। इससे रुपये पर दबाव और बढ़ गया है।
3. वैश्विक अनिश्चितता
भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक आर्थिक अस्थिरता के कारण निवेशक सुरक्षित निवेश की ओर बढ़ रहे हैं, जिससे उभरते बाजारों की मुद्राएं प्रभावित हो रही हैं।
करेंट अकाउंट डेफिसिट (CAD) का असर
विशेषज्ञों का मानना है कि बाजार पहले से ही करेंट अकाउंट डेफिसिट (CAD) के बढ़ने की संभावना को कीमतों में शामिल कर रहा है।
CAD बढ़ने का मतलब होता है कि देश का आयात, निर्यात से अधिक है, जिससे विदेशी मुद्रा पर दबाव बढ़ता है।
रुपये पर लगातार दबाव क्यों बना हुआ है?
फॉरेक्स मार्केट के अनुसार, रुपये में कमजोरी का ट्रेंड अचानक नहीं है, बल्कि यह कई आर्थिक कारणों का परिणाम है:
- लगातार FII आउटफ्लो
- ऊंचा तेल आयात बिल
- डॉलर इंडेक्स में मजबूती
- वैश्विक आर्थिक मंदी की आशंका
इन सभी कारणों से रुपये की रिकवरी मुश्किल हो रही है।
विशेषज्ञ क्या कह रहे हैं?
मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर वैश्विक परिस्थितियां इसी तरह बनी रहती हैं, तो रुपये पर दबाव आगे भी जारी रह सकता है। हालांकि, रिजर्व बैंक (RBI) जरूरत पड़ने पर हस्तक्षेप कर सकता है ताकि अत्यधिक गिरावट को रोका जा सके।
आम जनता पर क्या असर पड़ेगा?
रुपये की कमजोरी का सीधा असर आम लोगों पर भी पड़ सकता है:
- पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी का दबाव
- आयातित सामान महंगा होना
- विदेश यात्रा और शिक्षा खर्च बढ़ना
- महंगाई दर पर असर
निष्कर्ष
रुपये में आई यह गिरावट वैश्विक और घरेलू दोनों कारणों का नतीजा है। जब तक विदेशी निवेश का प्रवाह स्थिर नहीं होता और कच्चे तेल की कीमतों में राहत नहीं मिलती, तब तक रुपये पर दबाव बने रहने की संभावना है।
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