IDFC First Bank ने Chandigarh ब्रांच में ₹590 करोड़ धोखाधड़ी का खुलासा किया, जिससे शेयर 20% गिरकर लोअर सर्किट पर पहुंचा; सरकार ने बैंक को डी-एम्पैनल किया।
IDFC First Bank के शेयरों में सोमवार को तेज गिरावट आई, जब बैंक ने चंडीगढ़ ब्रांच में हरियाणा सरकार से जुड़े खातों में ₹590 करोड़ की धोखाधड़ी का खुलासा किया। इस खबर के बाद शेयर मूल्य लगभग 20% तक टूट गया और लोअर सर्किट पर पहुंच गया।
यह मामला न सिर्फ शेयर बाजार में असर डाल रहा है, बल्कि बैंकिंग प्रणाली के नियंत्रण और निवेशकों के भरोसे पर भी सवाल उठा रहा है।
🏦 क्या हुआ – फ्रॉड की पूरी कहानी
बैंकिंग कंपनी ने राजस्व प्रकटीकरण में बताया कि कुछ कर्मचारियों और बाहरी व्यक्तियों ने हरियाणा सरकार से जुड़े खातों में धोखाधड़ी की है, जिसकी कुल राशि करीब ₹590 करोड़ आंकी गई है। इस धोखाधड़ी का पता तब चला जब हरियाणा सरकार ने एक विभाग के खाते को बंद करने और राशि दूसरे बैंक में ट्रांसफर करने का अनुरोध किया था। जांच में खाते में दिखाए गए राशि और वास्तविक बैलेंस में बड़ा अंतर मिला।
बैंक ने यह स्पष्ट किया कि प्रारंभिक समीक्षा के अनुसार यह मामला केवल कुछ सरकारी-लिंक्ड खातों तक सीमित लगता है और अन्य ग्राहकों पर इसका कोई असर नहीं है। बैंक ने पहले ही 4 कर्मचारियों को निलंबित कर दिया है और पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है। साथ ही, एक फोरेंसिक ऑडिट (जांच) भी शुरू कर दी गई है।
📉 शेयर बाजार में तेज गिरावट
इस फ्रॉड की जानकारी के बाद IDFC First Bank के शेयरों में भारी बिकवाली शुरू हो गई। शेयरों ने सुबह ट्रेडिंग में ही लगभग 20% की गिरावट दर्ज की, और कुछ समय के लिए यह लोअर सर्किट (lower circuit) तक पहुंच गया। मार्केट कैप में बढ़ती गिरावट ने निवेशकों को चिंता में डाल दिया है।
शेयर की गिरावट भारत के प्रमुख बेंचमार्क इंडेक्स के विपरीत आई, जिससे यह साफ हुआ कि यह सिर्फ बैंक की ख़ास खबर का प्रभाव है।
🧑💼 बैंक का रिएक्शन और कार्रवाई
IDFC First Bank ने स्पष्ट किया है कि यह मामला बैंक की साख और अन्य ग्राहक खातों तक सीमित नहीं है। बैंक ने कहा है कि यह शुरुआती जांच का हिस्सा है, और फाइनल राशि एक रिकंसिलिएशन एक्सरसाइज के बाद तय होगी। साथ ही बैंक ने कहा कि वह सख्त अनुशासनात्मक, नागरिक और आपराधिक कार्रवाई करेगा।
बैंक ने नियामक एजेंसियों और ऑडिट में पूरी सहयोग की बात कही है, और संभावित रिकवरी प्रयास भी किए जा रहे हैं।
🏛️ हरियाणा सरकार की स्थिति
घोटाले के सामने आने के बाद हरियाणा सरकार ने IDFC First Bank और AU Small Finance Bank दोनों को सरकारी काम के लिए डी-एम्पैनल कर दिया। इसका मतलब है कि फिलहाल इन बैंकों के साथ कोई भी सरकारी वित्तीय लेन-देन नहीं किया जाएगा।
सरकार ने अधिकारियों से खातों की तुरंत बैलेंस ट्रांसफर और पूरा मिलान रिपोर्ट 31 मार्च 2026 तक जमा करने को कहा है।
📊 निवेशकों पर असर और आगे क्या हो सकता है
शेयरों की गिरावट ने निवेशकों को झटका दिया है, खासकर उन लोगों को जिनके पास लंबे समय से IDFC First Bank के स्टॉक्स हैं। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि इस फ्रॉड की वजह से बैंक पर लंबी अवधि का सिस्टमिक जोखिम नहीं है, पर नियंत्रण और भरोसे के मुद्दे सामने आए हैं।
फोरेंसिक ऑडिट और आगे की जांच से ही पता चलेगा कि धोखाधड़ी का पूरा असर कितना है, और क्या बैंक को नुकसान पूर्ण रूप से रिकवर करने में सफलता मिलेगी।
📌 निष्कर्ष
IDFC First Bank में सामने आया ₹590 करोड़ का फ्रॉड रिपोर्ट होने के बाद बैंक के शेयर में 20% तक गिरावट आई है। यह गिरावट निवेशक विश्वास पर भारी प्रभाव डाल रही है और बैंकिंग नियंत्रण प्रणाली पर सवाल उठा रही है। हालाँकि बैंक और सरकार ने कहा है कि धन सुरक्षित है और विस्तृत जांच जारी है।
Source: कंपनी की एक्सचेंज फाइलिंग, सार्वजनिक रूप से उपलब्ध मार्केट डेटा
Author Box:
Author: Rohit Negi
About Author:
Rohit Negi NewsJagran में बिज़नेस और फाइनेंस खबरों को कवर करते हैं।
Also Read;


