हरियाणा सरकार से जुड़े IDFC First Bank के ₹590 करोड़ धोखाधड़ी मामले में जांच जारी, मुख्यमंत्री ने कहा पैसा सुरक्षित है और हर रूपया वापस मिलेगा। जानिए पूरा अपडेट।
हरियाणा के सरकारी खातों से जुड़े ₹590 करोड़ के घोटाले (IDFC First Bank fraud) ने वित्तीय जगत और राजनीति दोनों में तहलका मचा दिया है। मामला न सिर्फ बैंकिंग सुरक्षा पर सवाल खड़ा कर रहा है, बल्कि सरकारी वित्तीय नियंत्रण और जवाबदेही पर भी बहस तेज कर रहा है।
🔍 मामला क्या है?
• घोटाला रकम: लगभग ₹590 करोड़
• संस्थान: IDFC First Bank के चंडीगढ़ ब्रांच में
• प्रभावित खाते: हरियाणा सरकार से जुड़े सरकारी खातों में अनियमित लेन-देन पाए गए
• यह मामला बैंक के आंतरिक रिव्यू के दौरान सामने आया था, जब कुछ खातों में बैलेंस और रिकॉर्ड के बीच विसंगतियाँ देखी गईं।
बैंक ने धोखाधड़ी की जानकारी नियामक अथॉरिटीज़ को दे दी है और पुलिस में भी शिकायत दर्ज़ करवाई है। चार कर्मचारियों पर निलंबन की कार्रवाई की गई है और आगे की जाँच के लिए एक स्वतंत्र एजेंसी (forensic audit) को नियुक्त किया जा रहा है।
🛑 हरियाणा सरकार की प्रतिक्रिया
हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने विधानसभा में स्पष्ट किया कि मामले की तफ्तीश की जा रही है और “हर एक पैसा सुरक्षित है”। उन्होंने कहा कि सरकार ने:
✔️ अव संदेहित धन को दूसरे मान्यता प्राप्त बैंक में ट्रांसफर कर दिया है
✔️ जांच Anti-Corruption Bureau और Vigilance Department को सौंप दी है
✔️ दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी
सैनी ने दोहराया कि ₹590 करोड़ वापस मिल जाएगा और “जांच समाप्त होने से पहले किसी निष्कर्ष पर पहुँचना उपयुक्त नहीं है।”
📉 IDFC First Bank और निवेशकों का प्रभाव
घोटाले के खुलासे के बाद IDFC First Bank के शेयरों में भारी गिरावट देखने को मिली। निवेशकों ने बैंक के स्टॉक को बेच दिया, जिससे शेयर लगभग 20% तक नीचे आ गए — यह बैंक के शेयर का मार्च 2020 के बाद का सबसे बड़ा दिन-परिचालन नुकसान रहा है।
इसके अलावा, कुछ सरकारी निर्देशों के तहत IDFC First Bank और AU Small Finance Bank दोनों को सरकारी कामों के लिए डि-एम्पैनल कर दिया गया है, यानी अब वे सरकारी लेन-देन में शामिल नहीं होंगे।
🏛️ RBI का बयान: सिस्टमिक जोखिम नहीं
भारत के केंद्रीय बैंक Reserve Bank of India ने कहा है कि इस धोखाधड़ी से कोई व्यापक बैंकिंग सिस्टमिक जोखिम पैदा नहीं हुआ है। RBI ने स्थिति पर नजर बनाए रखी है और बैंक की अतिरिक्त जांच को जारी रखने की सलाह दी है।
RBI गवर्नर ने स्पष्ट किया कि यह मामला एक विशेष शाखा और कुछ सरकारी खातों तक सीमित लगता है, और बैंक किताबों के बाकी हिस्सों पर इसका कोई प्रभाव नहीं होगा।
🔎 आगे क्या होगा?
• Forensic audit: बैंक ने एक स्वतंत्र एजेंसी नियुक्त की है जो धोखाधड़ी की विस्तृत जांच करेगी।
• कानूनी कार्रवाई: बैंक कर्मचारियों और बाहरी व्यक्तियों के खिलाफ आपराधिक जांच संभव है।
• सरकारी नीति बदलाव: हरियाणा सरकार ने सरकारी खातों के लिए पहले से वित्त विभाग की मंज़ूरी अनिवार्य कर दी है – ताकि वित्तीय पारदर्शिता और सुरक्षा बेहतर बनी रहे।
📌 निष्कर्ष
₹590 करोड़ के इस धोखाधड़ी मामले ने न सिर्फ बैंकिंग प्रक्रिया की समीक्षा की आवश्यकता को उजागर किया है, बल्कि सरकारी वित्तीय नियंत्रण और जवाबदेही की भी परीक्षा ली है। हरियाणा के मुख्यमंत्री अधिकारियों और जांच एजेंसियों से जुड़े कदमों का समर्थन कर रहे हैं और निवेशकों को स्थिति को स्थिर रखने का भरोसा दिया है।
Disclaimer
यह लेख केवल जानकारी के उद्देश्य से लिखा गया है। इसे निवेश सलाह न माना जाए। शेयर बाजार में निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से परामर्श जरूर करें।
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Author: Rohit Negi
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Rohit Negi NewsJagran में बिज़नेस और फाइनेंस खबरों को कवर करते हैं।
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