नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव, ईरान-अमेरिका टकराव और वैश्विक ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता के बीच भारत सरकार ने देशवासियों को बड़ी राहत दी है। कच्चे तेल, एलपीजी, प्राकृतिक गैस और उर्वरकों की संभावित कमी को लेकर चल रही आशंकाओं पर सरकार ने स्पष्ट कहा है कि देश के पास पर्याप्त भंडार मौजूद है और फिलहाल किसी भी तरह की आपूर्ति बाधित होने का खतरा नहीं है।
केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी और केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अलग-अलग मंचों से भरोसा दिलाया कि भारत की ऊर्जा और खाद सुरक्षा मजबूत स्थिति में है। सरकार का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय संकट के बावजूद देश में आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए पर्याप्त तैयारियां की गई हैं।
60 दिनों से अधिक का तेल और गैस भंडार
हरदीप सिंह पुरी के अनुसार भारत के पास 60 दिनों से अधिक की जरूरत के बराबर कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस का स्टॉक उपलब्ध है। यह भंडार देश को वैश्विक आपूर्ति बाधाओं और भू-राजनीतिक संकटों से निपटने में मदद करता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि होर्मुज जलडमरूमध्य या पश्चिम एशिया के अन्य महत्वपूर्ण मार्गों पर तनाव बढ़ता भी है तो भारत के रणनीतिक और वाणिज्यिक भंडार अल्पकालिक आपूर्ति संकट को काफी हद तक संभाल सकते हैं। भारत पिछले कुछ वर्षों में ऊर्जा स्रोतों के विविधीकरण पर भी लगातार काम कर रहा है, जिसके कारण रूस, अमेरिका, ब्राजील, अफ्रीका और मध्य पूर्व सहित कई देशों से आयात संभव हो पाया है।
ऊर्जा मंत्रालय के अधिकारियों का कहना है कि सरकार लगातार वैश्विक बाजार की निगरानी कर रही है और किसी भी आपात स्थिति में वैकल्पिक आपूर्ति चैनलों को सक्रिय किया जा सकता है।
LPG में बढ़ी आत्मनिर्भरता, 80 दिनों तक का स्टॉक
सरकार के अनुसार एलपीजी यानी रसोई गैस के मामले में भारत पहले की तुलना में कहीं अधिक मजबूत स्थिति में पहुंच चुका है। पिछले कुछ वर्षों में घरेलू उत्पादन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
जहां कुछ वर्ष पहले देश में प्रतिदिन लगभग 32,000 मीट्रिक टन एलपीजी का उत्पादन होता था, वहीं अब यह बढ़कर लगभग 54,000 मीट्रिक टन प्रतिदिन पहुंच गया है। इसका सीधा असर आयात निर्भरता में कमी के रूप में देखने को मिला है।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक वर्तमान में देश के पास 75 से 80 दिनों की जरूरत के बराबर एलपीजी भंडार मौजूद है। इसका मतलब है कि वैश्विक स्तर पर आपूर्ति प्रभावित होने की स्थिति में भी घरेलू उपभोक्ताओं को तुरंत किसी संकट का सामना नहीं करना पड़ेगा।
ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि उज्ज्वला योजना के बाद एलपीजी की मांग लगातार बढ़ी है, लेकिन उत्पादन और भंडारण क्षमता में सुधार के कारण सरकार आपूर्ति को स्थिर बनाए रखने में सफल रही है।
दुनिया में बढ़े दाम, भारत में मिली राहत
हरदीप सिंह पुरी ने बताया कि मई 2022 से मई 2026 के बीच वैश्विक स्तर पर ईंधन की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिला। कई देशों में पेट्रोल और डीजल रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गए, लेकिन भारत ने कीमतों को नियंत्रित रखने का प्रयास किया।
सरकार के अनुसार इस अवधि में भारत में पेट्रोल की कीमतों में लगभग 3.1 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। इसके पीछे टैक्स कटौती और सरकारी हस्तक्षेप को प्रमुख कारण बताया गया।
हाल के वर्षों में केंद्र सरकार द्वारा एक्साइज ड्यूटी में कई बार कटौती की गई। अधिकारियों के मुताबिक केवल एक प्रमुख कटौती से सरकारी खजाने पर लगभग 1 लाख करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ा, लेकिन इसका लाभ सीधे आम उपभोक्ताओं को मिला।
विश्लेषकों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों में तेज वृद्धि के बावजूद भारत ने उपभोक्ताओं पर उसका पूरा असर नहीं पड़ने दिया।
वैकल्पिक ईंधन पर सरकार का बड़ा फोकस
ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत बनाने के लिए सरकार पारंपरिक ईंधनों पर निर्भरता कम करने की रणनीति पर भी तेजी से काम कर रही है।
हरदीप सिंह पुरी ने बताया कि एथेनॉल मिश्रित ईंधन को बढ़ावा देने के लिए देशभर में ई85 फ्यूल पंप नेटवर्क का विस्तार किया जा रहा है। सरकार का लक्ष्य दिसंबर 2026 तक लगभग 500 ई85 पंप स्थापित करना है।
इसके बाद दिसंबर 2027 तक इनकी संख्या बढ़ाकर 5,000 तक पहुंचाने की योजना है। यह कदम पेट्रोलियम आयात पर निर्भरता कम करने के साथ-साथ पर्यावरणीय लक्ष्यों को हासिल करने में भी मदद करेगा।
ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि जैव ईंधन, हरित हाइड्रोजन और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी जैसे क्षेत्रों में निवेश आने वाले वर्षों में भारत की ऊर्जा सुरक्षा को और मजबूत करेगा।
किसानों के लिए राहत: खाद की कोई कमी नहीं
ऊर्जा क्षेत्र के साथ-साथ खेती-किसानी से जुड़े मोर्चे पर भी सरकार ने स्थिति स्पष्ट की है।
ब्रिक्स कृषि बैठक के समापन के बाद केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि देश में खरीफ और रबी दोनों सीजन के लिए पर्याप्त मात्रा में उर्वरक उपलब्ध हैं। किसानों को खाद की कमी को लेकर चिंतित होने की आवश्यकता नहीं है।
उन्होंने बताया कि चालू खरीफ सीजन की मांग को पूरा करने के लिए पर्याप्त स्टॉक पहले से मौजूद है। इसके अलावा आगामी रबी सीजन की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए अग्रिम खरीद और वितरण योजनाओं पर भी काम किया जा रहा है।
कृषि मंत्रालय का कहना है कि राज्य सरकारों के साथ समन्वय कर समय पर उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी ताकि किसानों को किसी तरह की परेशानी न हो।
यूरिया और DAP की कीमतों पर राहत जारी
वैश्विक बाजार में उर्वरकों की कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी है। कई देशों में खाद महंगी हुई है, लेकिन भारत सरकार किसानों को राहत देने की नीति पर कायम है।
शिवराज सिंह चौहान ने स्पष्ट किया कि किसानों को यूरिया और डीएपी जैसी प्रमुख खादें पहले की तरह रियायती दरों पर उपलब्ध कराई जाएंगी। यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें बढ़ती भी हैं तो अतिरिक्त बोझ किसानों पर नहीं डाला जाएगा।
सरकार सब्सिडी के माध्यम से इस अतिरिक्त लागत को वहन करेगी। इससे खेती की लागत को नियंत्रित रखने और खाद्यान्न उत्पादन को स्थिर बनाए रखने में मदद मिलेगी।
कृषि अर्थशास्त्रियों के अनुसार उर्वरक सब्सिडी भारत की खाद्य सुरक्षा नीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बनी हुई है।
अल नीनो की चुनौती पर भी तैयारी पूरी
कृषि मंत्री ने मानसून को प्रभावित करने वाले अल नीनो प्रभाव पर भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि सरकार संभावित मौसम संबंधी चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए पहले से तैयारी कर रही है।
जल संरक्षण, सूखा प्रबंधन, बीज उपलब्धता और फसल विविधीकरण जैसे उपायों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। साथ ही किसानों को प्राकृतिक और जैविक खेती अपनाने के लिए भी प्रोत्साहित किया जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन के बढ़ते प्रभावों के बीच कृषि क्षेत्र को अधिक टिकाऊ और लचीला बनाना समय की आवश्यकता है।
क्या आम लोगों को चिंता करनी चाहिए?
सरकार के ताजा बयानों से संकेत मिलता है कि फिलहाल एलपीजी, कच्चे तेल, प्राकृतिक गैस और उर्वरकों की उपलब्धता को लेकर कोई तात्कालिक संकट नहीं है। पर्याप्त भंडार, विविध आयात स्रोत और सक्रिय सरकारी निगरानी भारत को मौजूदा वैश्विक अनिश्चितताओं से निपटने में मदद कर रहे हैं।
हालांकि पश्चिम एशिया की स्थिति पर नजर बनाए रखना जरूरी है, क्योंकि लंबे समय तक तनाव बने रहने की स्थिति में वैश्विक ऊर्जा बाजार पर असर पड़ सकता है। लेकिन मौजूदा हालात में सरकार का दावा है कि देश की ऊर्जा और खाद सुरक्षा मजबूत है और आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति सामान्य बनी रहेगी।


