नई दिल्ली। नौकरीपेशा कर्मचारियों की सैलरी से हर महीने कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) के तहत अंशदान कटता है। अधिकांश कर्मचारियों को यह पता होता है कि उनके पीएफ खाते में जमा राशि पर हर साल ब्याज मिलता है, लेकिन एक सवाल अक्सर लोगों को उलझन में डाल देता है कि नियोक्ता द्वारा कर्मचारी पेंशन योजना (EPS) में जमा की जाने वाली राशि पर भी क्या ब्याज मिलता है?
हाल ही में EPFO ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए भी ब्याज दर को 8.25 फीसदी पर बरकरार रखा है। ऐसे में लाखों कर्मचारियों के मन में यह सवाल फिर उठने लगा है कि आखिर EPF और EPS में क्या अंतर है और दोनों पर मिलने वाले लाभ कैसे अलग-अलग हैं।
EPF और EPS में क्या अंतर है?
जब किसी कर्मचारी की बेसिक सैलरी और महंगाई भत्ता मिलाकर EPF कटता है, तो कर्मचारी और नियोक्ता दोनों 12-12 फीसदी का योगदान करते हैं।
कर्मचारी का पूरा 12 फीसदी योगदान EPF खाते में जमा होता है। वहीं नियोक्ता के 12 फीसदी योगदान में से 8.33 फीसदी हिस्सा EPS यानी कर्मचारी पेंशन योजना में जाता है और बाकी राशि EPF खाते में जमा होती है।
यही कारण है कि कर्मचारी के EPF खाते में हर साल ब्याज जुड़ता रहता है, जबकि EPS का उद्देश्य भविष्य में पेंशन प्रदान करना होता है।
क्या EPS खाते में जमा राशि पर ब्याज मिलता है?
पर्सनल सीएफओ कंसल्टेंट एलएलपी के संस्थापक एवं सीईओ सुशील जैन के अनुसार, EPS खाते में जमा राशि पर किसी प्रकार का वार्षिक ब्याज नहीं दिया जाता।
उन्होंने स्पष्ट किया कि EPFO केवल EPF खाते में जमा राशि पर ब्याज देता है। EPS में जमा धनराशि पेंशन फंड का हिस्सा होती है और इसका उपयोग कर्मचारी को सेवानिवृत्ति के बाद मासिक पेंशन देने के लिए किया जाता है।
यानी यदि आपके EPS खाते में वर्षों से योगदान जमा हो रहा है, तो उस पर बैंक एफडी या पीएफ की तरह ब्याज नहीं बढ़ता।
फिर EPS का फायदा क्या है?
कई कर्मचारी यह सोचते हैं कि जब ब्याज नहीं मिलता तो EPS का फायदा क्या है। दरअसल EPS का उद्देश्य निवेश पर रिटर्न देना नहीं बल्कि रिटायरमेंट के बाद नियमित आय सुनिश्चित करना है।
यदि कर्मचारी कम से कम 10 वर्ष की पात्र सेवा पूरी कर लेता है तो वह 58 वर्ष की आयु के बाद मासिक पेंशन पाने का हकदार बन जाता है।
यह पेंशन कर्मचारी के अंतिम वेतन और कुल सेवा अवधि के आधार पर तय की जाती है।
10 साल से कम नौकरी करने पर क्या होगा?
यदि किसी कर्मचारी ने 10 वर्ष की सेवा पूरी नहीं की है तो वह कुछ शर्तों के तहत EPS से जुड़े लाभ निकाल सकता है।
हालांकि 10 वर्ष या उससे अधिक की पात्र सेवा पूरी होने के बाद EPS राशि को एकमुश्त निकालने का विकल्प समाप्त हो जाता है और कर्मचारी को पेंशन लाभ के लिए पात्र माना जाता है।
यही वजह है कि नौकरी बदलते समय EPS सेवा अवधि को ट्रांसफर कराना बेहद जरूरी माना जाता है।
EPFO ने ब्याज दर में बदलाव क्यों नहीं किया?
EPFO के केंद्रीय न्यासी बोर्ड ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए भी ब्याज दर 8.25 फीसदी बनाए रखने की सिफारिश की है। इससे पहले भी वित्त वर्ष 2024-25 में यही ब्याज दर लागू थी।
विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं और निवेश रिटर्न को देखते हुए EPFO ने ब्याज दर को स्थिर रखना उचित समझा है।
हालांकि कर्मचारियों को उम्मीद थी कि ब्याज दर में मामूली बढ़ोतरी हो सकती है, लेकिन फिलहाल ऐसा नहीं हुआ है।
EPF में ब्याज कैसे जुड़ता है?
EPF खाते में जमा राशि पर सालाना ब्याज की गणना मासिक रनिंग बैलेंस के आधार पर की जाती है।
उदाहरण के तौर पर यदि किसी कर्मचारी के EPF खाते में 5 लाख रुपये जमा हैं और ब्याज दर 8.25 फीसदी है तो उसे साल भर में लगभग 41,250 रुपये तक का ब्याज मिल सकता है।
यही ब्याज कंपाउंडिंग के कारण लंबे समय में बड़ी रिटायरमेंट कॉर्पस बनाने में मदद करता है।
क्या EPS पर भी भविष्य में ब्याज देने की मांग उठी है?
कई कर्मचारी संगठनों और विशेषज्ञों ने समय-समय पर EPS लाभों में सुधार की मांग की है। विशेष रूप से न्यूनतम पेंशन बढ़ाने और EPS ढांचे को अधिक आकर्षक बनाने की मांग लगातार उठती रही है।
हालांकि फिलहाल सरकार या EPFO की ओर से EPS पर ब्याज देने का कोई प्रस्ताव लागू नहीं किया गया है।
कर्मचारियों के लिए क्या है सबसे जरूरी बात?
EPF को केवल एक बचत योजना और EPS को केवल पेंशन योजना समझना सबसे सही तरीका है।
EPF में आपका पैसा बढ़ता है क्योंकि उस पर ब्याज मिलता है, जबकि EPS में जमा योगदान भविष्य में मासिक पेंशन के रूप में लाभ देता है। इसलिए दोनों योजनाओं का उद्देश्य अलग-अलग है और दोनों मिलकर कर्मचारी की रिटायरमेंट सुरक्षा को मजबूत बनाते हैं।
निष्कर्ष
EPFO के तहत मिलने वाले दो प्रमुख लाभ EPF और EPS हैं, लेकिन दोनों की कार्यप्रणाली अलग है। EPF खाते में जमा राशि पर वित्त वर्ष 2025-26 के लिए 8.25 फीसदी ब्याज मिलेगा, जबकि EPS खाते में जमा राशि पर कोई ब्याज नहीं दिया जाता। EPS का उद्देश्य रिटायरमेंट के बाद नियमित पेंशन उपलब्ध कराना है। इसलिए कर्मचारियों को यह समझना चाहिए कि EPF और EPS दोनों मिलकर उनके भविष्य की वित्तीय सुरक्षा का आधार बनते हैं।
FAQ
Q1. क्या EPS खाते पर ब्याज मिलता है?
नहीं, EPS खाते में जमा राशि पर EPFO कोई ब्याज नहीं देता।
Q2. EPF पर वर्तमान ब्याज दर कितनी है?
वित्त वर्ष 2025-26 के लिए EPF ब्याज दर 8.25% है।
Q3. EPS से पेंशन पाने के लिए कितनी नौकरी जरूरी है?
कम से कम 10 वर्ष की पात्र सेवा आवश्यक है।
Q4. नियोक्ता का कितना योगदान EPS में जाता है?
नियोक्ता के योगदान का 8.33% हिस्सा EPS में जमा किया जाता है।
Q5. क्या 10 साल से पहले EPS की राशि निकाली जा सकती है?
कुछ निर्धारित नियमों और शर्तों के तहत निकासी संभव है।
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