8th Pay Commission Railway: 8वें वेतन आयोग के गठन के बाद विभिन्न कर्मचारी संगठनों ने अपनी मांगें आयोग के सामने रखना शुरू कर दिया है। इसी कड़ी में रेलवे इंजीनियरों के प्रतिनिधि संगठनों ऑल इंडिया रेलवे इंजीनियर्स फेडरेशन (AIREF) और ईस्ट कोस्ट रेलवे इंजीनियर्स एसोसिएशन (ECoREA) ने वेतन, प्रमोशन और सेवा संरचना से जुड़े कई अहम मुद्दे उठाए हैं। इन संगठनों का कहना है कि मौजूदा वेतन ढांचा इंजीनियरों की जिम्मेदारियों के अनुरूप नहीं है और करियर ग्रोथ के अवसर भी बेहद सीमित हैं।
भुवनेश्वर में आयोजित बैठक के दौरान दोनों संगठनों के प्रतिनिधियों ने 8वें वेतन आयोग के सदस्य सचिव पंकज जैन के समक्ष अपनी मांगें रखीं। उनका मानना है कि यदि इन सुझावों पर अमल होता है तो रेलवे इंजीनियरों के वेतन, पदोन्नति और सेवा शर्तों में बड़ा सुधार देखने को मिल सकता है।
5वें वेतन आयोग जैसी वेतन संरचना बहाल करने की मांग
AIREF के महासचिव बीपी दास के अनुसार, छठे वेतन आयोग के बाद रेलवे इंजीनियरों के वेतन ढांचे में ऐसी विसंगतियां पैदा हुईं, जिनके कारण उनकी सैलरी कई गैर-तकनीकी और गैर-सुरक्षा कैडरों की तुलना में कम हो गई। जबकि रेलवे इंजीनियरों पर ट्रैक, सिग्नल, पुल, इंफ्रास्ट्रक्चर और यात्री सुरक्षा जैसी अत्यंत महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां होती हैं।
फेडरेशन ने मांग की है कि 8वां वेतन आयोग 5वें वेतन आयोग तक लागू वेतन पदानुक्रम (Pay Hierarchy) को दोबारा बहाल करे, ताकि तकनीकी कर्मचारियों के साथ वेतन संबंधी समानता स्थापित हो सके।
गैर-तकनीकी कर्मचारियों से कम वेतन पर जताई नाराजगी
रेलवे इंजीनियरों का कहना है कि सुरक्षा और तकनीकी जिम्मेदारियों के बावजूद कई गैर-तकनीकी कैडरों को उनसे अधिक वेतन और बेहतर करियर अवसर मिल रहे हैं। उनका तर्क है कि इससे तकनीकी सेवाओं का मनोबल प्रभावित होता है और प्रतिभाशाली इंजीनियरों के लिए रेलवे कम आकर्षक बनती जा रही है।
रेलवे इंजीनियरों को मिले ग्रुप-B का दर्जा
AIREF की दूसरी बड़ी मांग रेलवे इंजीनियरों को ग्रुप-B स्टेटस देने की है। संगठन का कहना है कि अन्य केंद्रीय मंत्रालयों में समान जिम्मेदारियां निभाने वाले अधिकारियों को बेहतर सेवा दर्जा और पदोन्नति के अवसर मिलते हैं, जबकि रेलवे इंजीनियर अभी भी अपेक्षाकृत सीमित ढांचे में काम कर रहे हैं।
ग्रुप-B पदों की संख्या बढ़ाने की मांग
फेडरेशन के अनुसार, भारतीय रेलवे में वर्तमान में केवल 0.29% पद ही ग्रुप-B श्रेणी में हैं, जबकि राष्ट्रीय औसत लगभग 7.5% है। संगठन चाहता है कि रेलवे में भी ग्रुप-B पदों की संख्या बढ़ाई जाए ताकि इंजीनियरों को समय पर प्रमोशन और बेहतर करियर ग्रोथ मिल सके।
AIREF के सचिव शिवकांत सिंह ने कहा कि सीमित पदों के कारण इंजीनियर लंबे समय तक एक ही स्तर पर काम करने को मजबूर हैं, जिससे कर्मचारियों का मनोबल और कार्य प्रेरणा प्रभावित होती है।
रेलवे इंजीनियरों की प्रमुख मांगें
| मुद्दा | मौजूदा स्थिति | प्रमुख मांग |
|---|---|---|
| वेतन ढांचा | कई गैर-तकनीकी कैडरों से कम वेतन | 5वें वेतन आयोग जैसी वेतन समानता बहाल हो |
| ग्रुप-B पद | केवल 0.29% हिस्सेदारी | इसे बढ़ाकर राष्ट्रीय औसत 7.5% किया जाए |
| प्रमोशन | करियर ग्रोथ के सीमित अवसर | पदोन्नति के नए अवसर बढ़ाए जाएं |
| सेवा दर्जा | मौजूदा अधीनस्थ ढांचा | अन्य मंत्रालयों की तरह ग्रुप-B स्टेटस दिया जाए |
देशभर में जारी है परामर्श प्रक्रिया
8वें वेतन आयोग की यह बैठक 6 और 7 जुलाई को भुवनेश्वर में आयोजित हुई। यह आयोग की देशभर में चल रही परामर्श प्रक्रिया का हिस्सा है, जिसके तहत कर्मचारी संगठनों, पेंशनभोगियों और अन्य हितधारकों से सुझाव लिए जा रहे हैं।
इससे पहले दिल्ली, लखनऊ, हैदराबाद, श्रीनगर और लद्दाख में भी ऐसी बैठकें आयोजित की जा चुकी हैं। आयोग 10 जुलाई को कोलकाता में अपना परामर्श दौरा पूरा कर रहा है।
अन्य कर्मचारी संगठनों की भी अहम मांगें
रेलवे कर्मचारियों के अलावा कई अन्य केंद्रीय कर्मचारी संगठन भी 8वें वेतन आयोग के सामने अपनी मांगें रख रहे हैं। इनमें प्रमुख रूप से—
- फिटमेंट फैक्टर में वृद्धि
- महंगाई और अन्य भत्तों में संशोधन
- हाउस रेंट अलाउंस (HRA) में सुधार
- पेंशन व्यवस्था में बदलाव
- MACP (Modified Assured Career Progression) योजना में संशोधन
जैसी मांगें शामिल हैं।
आगे क्या होगा?
फिलहाल इन बैठकों में रखे गए सुझावों के आधार पर कोई तत्काल वेतन संशोधन नहीं होगा। हालांकि कर्मचारी संगठनों को अपनी मांगों के समर्थन में तथ्य और जमीनी अनुभव प्रस्तुत करने का अवसर मिल रहा है। 3 नवंबर 2025 को गठित 8वें वेतन आयोग की अंतिम सिफारिशें लागू होने पर करीब 1.1 करोड़ केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों पर इसका सीधा प्रभाव पड़ेगा। ऐसे में रेलवे इंजीनियरों की ये मांगें भी आयोग की समीक्षा प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जा रही हैं।


