Share Market Crash Today: भारतीय शेयर बाजार में आज उतार-चढ़ाव भरे कारोबार के बीच सेंसेक्स और निफ्टी दोनों दबाव में दिखाई दिए। निफ्टी की साप्ताहिक (Weekly Expiry) एक्सपायरी वाले दिन बाजार की शुरुआत भले ही सपाट रही, लेकिन कुछ ही देर बाद बिकवाली तेज हो गई। सेंसेक्स करीब 300 अंक तक टूट गया, जबकि निफ्टी 50 फिसलकर 24,200 के महत्वपूर्ण स्तर के नीचे पहुंच गया। वैश्विक तनाव, विदेशी निवेशकों की बिकवाली और सेक्टोरल दबाव ने बाजार की धारणा को कमजोर किया।
हालांकि बड़ी कंपनियों के शेयरों में कमजोरी देखने को मिली, लेकिन मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में अपेक्षाकृत मजबूती बनी रही, जिससे व्यापक बाजार (Broader Market) में पूरी तरह से घबराहट का माहौल नहीं दिखा।
शुरुआती कारोबार में बाजार का हाल
एक कारोबारी दिन पहले यानी 20 जुलाई को बीएसई सेंसेक्स 442.93 अंक यानी 0.57% गिरकर 77,708.52 पर बंद हुआ था, जबकि निफ्टी 50 95.80 अंक यानी 0.39% टूटकर 24,238.50 पर बंद हुआ था।
आज बाजार की शुरुआत फ्लैट रही, लेकिन सुबह 10:56 बजे तक बिकवाली तेज हो गई।
- सेंसेक्स: 77,463.01 (245.51 अंक या 0.32% की गिरावट)
- निफ्टी 50: 24,179.45 (59.05 अंक या 0.24% की कमजोरी)
इंट्राडे कारोबार में सेंसेक्स 77,413.40 तक और निफ्टी 24,163.75 तक फिसल गया।
बाजार में गिरावट की 4 बड़ी वजहें
1. अमेरिका-ईरान युद्ध से बढ़ी वैश्विक चिंता
शेयर बाजार पर सबसे बड़ा दबाव पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का रहा। अमेरिका और ईरान के बीच जारी सैन्य संघर्ष लगातार गंभीर होता जा रहा है। अमेरिकी सेना द्वारा लगातार कई दिनों तक ईरान के सैन्य ठिकानों पर हवाई हमले किए जाने से वैश्विक निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता कम हुई है।
जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तनाव बढ़ता है, तब निवेशक जोखिम वाले एसेट्स से पैसा निकालकर सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर रुख करते हैं। इसका असर भारतीय शेयर बाजार पर भी देखने को मिला।
2. विदेशी निवेशकों (FIIs) की लगातार बिकवाली
विदेशी संस्थागत निवेशक (FIIs) लगातार भारतीय बाजार से पैसा निकाल रहे हैं।
20 जुलाई को:
- नेट बिकवाली: ₹1,121.04 करोड़
- लगातार छठे कारोबारी दिन बिकवाली
- छह दिनों में कुल ₹10,240.8 करोड़ की नेट बिक्री
FII की लगातार बिकवाली बाजार में कमजोरी का बड़ा कारण मानी जाती है क्योंकि बड़े निवेशकों के बाहर निकलने से बाजार पर दबाव बढ़ जाता है।
3. आईटी, ऑटो और बैंकिंग शेयरों में दबाव
आज अधिकांश सेक्टर दबाव में दिखाई दिए।
सबसे अधिक कमजोरी:
- आईटी सेक्टर
- ऑटो सेक्टर
- सरकारी बैंक
- फार्मा
आईटी और ऑटो इंडेक्स में लगभग आधा फीसदी तक की गिरावट देखने को मिली। सरकारी बैंकों और फार्मा शेयरों में भी बिकवाली हावी रही।
हालांकि राहत की बात यह रही कि मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स हल्की बढ़त के साथ कारोबार करते रहे, जिससे व्यापक बाजार में गिरावट सीमित रही।
4. निफ्टी की वीकली एक्सपायरी
आज निफ्टी इंडेक्स डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट्स की साप्ताहिक एक्सपायरी भी थी।
एक्सपायरी वाले दिन आमतौर पर बाजार में:
- उतार-चढ़ाव बढ़ जाता है।
- ट्रेडर्स अपनी पोजीशन काटते या रोलओवर करते हैं।
- ऑप्शन और फ्यूचर्स में भारी गतिविधि रहती है।
इसी वजह से आज बाजार में वोलैटिलिटी अधिक देखने को मिली।
मिडकैप और स्मॉलकैप में रही मजबूती
जहां लार्जकैप शेयर दबाव में रहे, वहीं मिडकैप और स्मॉलकैप कंपनियों के शेयरों में खरीदारी देखने को मिली।
- Nifty Midcap 100 हल्की बढ़त में रहा।
- Nifty Smallcap 100 भी सकारात्मक दायरे में कारोबार करता दिखा।
इससे संकेत मिलता है कि निवेशकों ने चुनिंदा शेयरों में खरीदारी जारी रखी।
निवेशकों को आगे किन बातों पर रखनी चाहिए नजर?
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार आने वाले कारोबारी सत्रों में निवेशकों को इन प्रमुख कारकों पर नजर रखनी चाहिए—
- अमेरिका-ईरान युद्ध से जुड़े नए घटनाक्रम
- विदेशी निवेशकों (FIIs) की खरीदारी या बिकवाली
- रुपये और डॉलर की चाल
- कच्चे तेल की कीमतें
- कॉर्पोरेट तिमाही नतीजे
- वैश्विक बाजारों का रुख
यदि वैश्विक तनाव कम होता है और विदेशी निवेशकों की बिकवाली थमती है, तो बाजार में रिकवरी देखने को मिल सकती है।
निष्कर्ष
आज का कारोबारी सत्र यह दिखाता है कि वैश्विक घटनाक्रम, विदेशी निवेशकों की रणनीति और डेरिवेटिव एक्सपायरी जैसे कारक भारतीय शेयर बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। हालांकि सेंसेक्स और निफ्टी दबाव में रहे, लेकिन मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में मजबूती यह संकेत देती है कि बाजार में पूरी तरह नकारात्मक माहौल नहीं है। निवेशकों को जल्दबाजी में फैसले लेने के बजाय जोखिम प्रबंधन और लंबी अवधि की निवेश रणनीति पर ध्यान देना चाहिए।
डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से तैयार किया गया है। शेयर बाजार में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। किसी भी निवेश निर्णय से पहले अपने वित्तीय सलाहकार या प्रमाणित निवेश विशेषज्ञ से सलाह अवश्य लें।


