नई दिल्ली: अगले सप्ताह कमोडिटी बाजार में निवेशकों के लिए बेहद अहम समय रहने वाला है। मिडिल ईस्ट में बढ़ते सैन्य तनाव, हॉर्मुज स्ट्रेट और बाब-अल-मंदेब जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों पर बढ़ते जोखिम, अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दर नीति को लेकर अनिश्चितता और वैश्विक आर्थिक संकेतों के बीच गोल्ड, सिल्वर, क्रूड ऑयल और बेस मेटल्स में तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में बाजार की दिशा केवल आर्थिक आंकड़ों से तय नहीं होगी, बल्कि मिडिल ईस्ट में होने वाली हर नई घटना कमोडिटी की कीमतों पर सीधा असर डाल सकती है। ऐसे माहौल में निवेशकों और ट्रेडर्स को अतिरिक्त सतर्क रहने की जरूरत होगी।
मिडिल ईस्ट का तनाव बना सबसे बड़ा ट्रिगर
ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव ने वैश्विक बाजारों की चिंता बढ़ा दी है। हॉर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में से एक है, जहां से वैश्विक कच्चे तेल की बड़ी हिस्सेदारी गुजरती है। इसके अलावा बाब-अल-मंदेब स्ट्रेट पर भी खतरा बढ़ने से सप्लाई चेन प्रभावित होने की आशंका है।
यदि इन दोनों समुद्री मार्गों पर कोई बड़ा व्यवधान आता है तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में और तेजी आ सकती है। इसका असर केवल ऊर्जा बाजार तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि महंगाई और अन्य कमोडिटी पर भी दिखाई देगा।
अमेरिकी महंगाई के आंकड़ों से मिला मिश्रित संकेत
अमेरिका में जून महीने का उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) 3.8% दर्ज किया गया, जो मई के 4.2% से कम रहा और बाजार के अनुमान से भी नीचे आया। पेट्रोल की कीमतों में नरमी के कारण महंगाई पर दबाव कम हुआ। वहीं प्रोड्यूसर प्राइस इंडेक्स (PPI) भी अपेक्षा से नरम रहा।
हालांकि दूसरी ओर मजबूत रिटेल सेल्स और बेहतर आर्थिक गतिविधियों ने यह संकेत दिया कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था अभी भी मजबूती बनाए हुए है। यही कारण है कि बाजार में ब्याज दरों को लेकर असमंजस बना हुआ है।
फेड की सख्त नीति बनी चिंता
अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने फिलहाल ब्याज दरों में कटौती का कोई स्पष्ट संकेत नहीं दिया है। फेड चेयरमैन ने दोहराया कि महंगाई को नियंत्रित करना उनकी प्राथमिकता है।
डलास फेड और कैनसस सिटी फेड के अधिकारियों ने भी जल्द नरमी की उम्मीदों को खारिज किया। इसके बाद सीएमई फेडवॉच के अनुसार बाजार में सितंबर की बैठक को लेकर ब्याज दरों के ऊंचे स्तर पर बने रहने की संभावना मजबूत हुई है।
इसी बीच डॉलर इंडेक्स 101 के नीचे बंद हुआ, जिससे कुछ समय के लिए कमोडिटी बाजार को समर्थन मिला, लेकिन भू-राजनीतिक तनाव ने निवेशकों की चिंता फिर बढ़ा दी।
गोल्ड और सिल्वर में बढ़ सकती है अस्थिरता
इस सप्ताह स्पॉट गोल्ड 4,000 डॉलर प्रति औंस के ऊपर बंद होने के बावजूद पूरे सप्ताह लगभग 2.5% कमजोर रहा। शुरुआती दौर में कमजोर महंगाई के आंकड़ों से सोने को सहारा मिला, लेकिन बाद में बढ़ते युद्ध जोखिम और ऊर्जा कीमतों ने बाजार का रुख बदल दिया।
विशेषज्ञों के अनुसार यदि कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं और महंगाई दोबारा बढ़ने लगती है तो सोने और चांदी की तेजी सीमित रह सकती है।
सिल्वर की बात करें तो यह सप्ताह के दौरान 54.7 डॉलर प्रति औंस तक फिसल गया, जो नवंबर 2025 के बाद का सबसे निचला स्तर माना जा रहा है। हालांकि सप्ताह के अंत में इसमें हल्की रिकवरी देखने को मिली, लेकिन कुल मिलाकर इसमें 7% से अधिक की गिरावट दर्ज हुई।
बेस मेटल्स में मिला-जुला प्रदर्शन
लंदन मेटल एक्सचेंज (LME) पर कॉपर मामूली मजबूती के साथ लगभग 13,525 डॉलर प्रति टन पर बंद हुआ। वहीं जिंक में 2% से अधिक की गिरावट दर्ज की गई और यह 3,525 डॉलर प्रति टन से नीचे पहुंच गया।
ऊंची ऊर्जा लागत, लंबे समय तक सख्त मौद्रिक नीति और वैश्विक मांग को लेकर चिंता ने अधिकांश बेस मेटल्स पर दबाव बनाए रखा।
हालांकि एल्यूमिनियम ने अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन किया। इसके पीछे प्राकृतिक गैस की ऊंची कीमतें, चीन का उत्पादन नियंत्रण, एलएमई इन्वेंट्री में लगातार गिरावट और हॉर्मुज स्ट्रेट को लेकर बढ़ती चिंता प्रमुख कारण रहे।
क्रूड ऑयल में सबसे ज्यादा तेजी
सप्ताह के दौरान सबसे बड़ा उछाल कच्चे तेल में देखने को मिला। ब्रेंट क्रूड लगभग 15% की तेजी के साथ 88.3 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया, जबकि डब्ल्यूटीआई क्रूड 82.7 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार करता दिखाई दिया।
समुद्री मार्गों पर बढ़ते जोखिम और वैश्विक सप्लाई बाधित होने की आशंकाओं ने तेल की कीमतों को मजबूत समर्थन दिया है।
रिपोर्ट्स के अनुसार यदि हॉर्मुज स्ट्रेट और बाब-अल-मंदेब दोनों प्रभावित होते हैं तो वैश्विक ऊर्जा बाजार में बड़ा संकट पैदा हो सकता है, जिसका सीधा असर महंगाई और आर्थिक विकास पर पड़ेगा।
MCX क्रूड ऑयल का तकनीकी आउटलुक
घरेलू वायदा बाजार एमसीएक्स पर क्रूड ऑयल फ्यूचर्स 7,945 रुपये प्रति बैरल पर लगभग 4.35% की मजबूती के साथ बंद हुआ।
तकनीकी संकेतकों के अनुसार फिलहाल तेजी का रुझान बना हुआ है।
महत्वपूर्ण स्तर
- रेजिस्टेंस: ₹8,350 और ₹8,800 प्रति बैरल
- सपोर्ट: ₹7,480 और ₹7,300 प्रति बैरल
सुपरट्रेंड इंडिकेटर खरीदारी का संकेत दे रहा है, जबकि RSI भी 60 के ऊपर बना हुआ है, जो फिलहाल सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।
अगले सप्ताह किन बातों पर रहेगी बाजार की नजर?
आने वाले सप्ताह में निवेशकों की नजर मुख्य रूप से इन घटनाओं पर रहेगी—
- मिडिल ईस्ट में सैन्य घटनाक्रम
- हॉर्मुज स्ट्रेट और बाब-अल-मंदेब की स्थिति
- अमेरिका के प्रारंभिक PMI आंकड़े
- फेड अधिकारियों के संभावित बयान
- वैश्विक तेल सप्लाई से जुड़ी खबरें
- डॉलर इंडेक्स और बॉन्ड यील्ड की चाल
यदि तनाव कम करने की दिशा में कोई सकारात्मक कूटनीतिक प्रगति होती है तो कमोडिटी बाजार में राहत देखने को मिल सकती है। वहीं यदि संघर्ष और बढ़ता है तो कच्चे तेल में नई तेजी के साथ गोल्ड, सिल्वर और बेस मेटल्स में भी भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।
निवेशकों के लिए क्या है रणनीति?
मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए अगले सप्ताह कमोडिटी बाजार काफी संवेदनशील रहने की संभावना है। किसी भी नई भू-राजनीतिक खबर का असर कुछ ही मिनटों में गोल्ड, सिल्वर और क्रूड ऑयल की कीमतों पर दिखाई दे सकता है। ऐसे में केवल तकनीकी स्तरों पर निर्भर रहने के बजाय अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम, अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों और ऊर्जा बाजार से जुड़ी खबरों पर भी लगातार नजर रखना जरूरी होगा। उच्च अस्थिरता के बीच उचित जोखिम प्रबंधन और स्टॉप लॉस के साथ ही ट्रेडिंग करना अधिक सुरक्षित रणनीति मानी जा सकती है।


