भारतीय शेयर बाजार में जुलाई 2026 की शुरुआत विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की मजबूत वापसी के साथ हुई है। जून के अंतिम पखवाड़े में नेट खरीदार बनने के बाद जुलाई के पहले 15 दिनों में भी एफआईआई ने भारतीय इक्विटी बाजार में जमकर निवेश किया। इस दौरान उन्होंने कुल ₹15,559 करोड़ की शुद्ध खरीदारी की। सबसे ज्यादा निवेश कंज्यूमर सर्विसेज, मेटल्स एंड माइनिंग, हेल्थकेयर, रियल्टी और फाइनेंशियल्स सेक्टर में देखने को मिला, जबकि ऑटो, कैपिटल गुड्स, टेलीकॉम, पावर और FMCG सेक्टर से बड़ी निकासी की गई।
विदेशी निवेशकों की वापसी के पीछे बेहतर वैल्यूएशन, अमेरिका-ईरान के बीच भू-राजनीतिक तनाव में कमी, कच्चे तेल की कीमतों में नरमी और एआई से जुड़े शेयरों में हालिया गिरावट जैसे प्रमुख कारण बताए जा रहे हैं। इससे भारतीय बाजारों के प्रति विदेशी निवेशकों का भरोसा एक बार फिर मजबूत होता दिखाई दे रहा है।
जुलाई के पहले हाफ में इन सेक्टर्स पर रहा FII का सबसे ज्यादा भरोसा

जुलाई के पहले पखवाड़े में विदेशी निवेशकों की पहली पसंद कंज्यूमर सर्विसेज सेक्टर रहा। जून के दूसरे हाफ में इस सेक्टर में ₹3,081 करोड़ की खरीदारी के बाद जुलाई के पहले हाफ में निवेश बढ़कर ₹7,361 करोड़ तक पहुंच गया।
इसके अलावा मेटल्स एंड माइनिंग सेक्टर में निवेशकों का रुख पूरी तरह बदल गया। जून के दूसरे पखवाड़े में जहां इस सेक्टर से ₹4,370 करोड़ की बिकवाली हुई थी, वहीं जुलाई के पहले 15 दिनों में विदेशी निवेशकों ने ₹5,993 करोड़ की शुद्ध खरीदारी की।
हेल्थकेयर, रियल्टी और फाइनेंशियल्स में भी बढ़ा निवेश
हेल्थकेयर सेक्टर में भी विदेशी निवेशकों ने अपना निवेश काफी बढ़ाया। जून के दूसरे हाफ में जहां इस सेक्टर में ₹1,435 करोड़ का निवेश हुआ था, वहीं जुलाई के पहले हाफ में यह बढ़कर ₹4,101 करोड़ हो गया।
सर्विसेज सेक्टर में निवेश मामूली घटकर ₹2,405 करोड़ रहा, जबकि जून के दूसरे हाफ में यह ₹2,592 करोड़ था।
इसके अलावा विदेशी निवेशकों ने—
- कंज्यूमर ड्यूरेबल्स: ₹2,384 करोड़
- रियल्टी: ₹1,975 करोड़
- फाइनेंशियल्स: ₹1,975 करोड़
- कंस्ट्रक्शन मैटेरियल्स: ₹1,574 करोड़
का शुद्ध निवेश किया। खास बात यह रही कि कंस्ट्रक्शन मैटेरियल्स सेक्टर से जून के दूसरे हाफ में ₹850 करोड़ की निकासी हुई थी, लेकिन जुलाई में इसमें फिर से निवेश लौट आया।
इन सेक्टर्स से FII ने की सबसे ज्यादा बिकवाली
जहां कुछ सेक्टर्स में खरीदारी बढ़ी, वहीं कई सेक्टर्स में विदेशी निवेशकों ने अपनी बिकवाली भी तेज कर दी।
सबसे अधिक दबाव ऑटो सेक्टर पर देखने को मिला। जून के दूसरे हाफ में ऑटो सेक्टर से ₹1,324 करोड़ की निकासी हुई थी, जो जुलाई के पहले हाफ में बढ़कर ₹6,936 करोड़ हो गई।
इसके अलावा—
- कैपिटल गुड्स: ₹2,657 करोड़ की निकासी
- टेलीकॉम: ₹2,454 करोड़ की निकासी
- पावर सेक्टर: बिकवाली जारी
- FMCG: निवेश में कटौती
से यह संकेत मिलता है कि विदेशी निवेशक फिलहाल इन सेक्टर्स में सतर्क रुख अपनाए हुए हैं।
विदेशी निवेशकों की वापसी के पीछे क्या हैं प्रमुख वजहें?
विश्लेषकों के मुताबिक विदेशी निवेशकों की भारतीय बाजार में वापसी के पीछे कई सकारात्मक कारण हैं।
- भारतीय बाजार का आकर्षक वैल्यूएशन
- अमेरिका-ईरान तनाव में कमी
- कच्चे तेल की कीमतों में नरमी
- वैश्विक स्तर पर जोखिम लेने की बढ़ती क्षमता
- AI सेक्टर के शेयरों में हालिया करेक्शन के बाद निवेश का अन्य सेक्टर्स की ओर रुख
इन कारणों ने विदेशी निवेशकों का भरोसा भारतीय इक्विटी बाजार में फिर से मजबूत किया है।
गोल्डमैन सैक्स की क्या है राय?
वैश्विक ब्रोकरेज गोल्डमैन सैक्स का कहना है कि यह खरीदारी ऐसे समय में हो रही है जब भारतीय शेयर बाजार में विदेशी निवेशकों की हिस्सेदारी कई वर्षों के निचले स्तर के करीब है। ऐसे में उनके पास भारतीय बाजार में अपनी हिस्सेदारी दोबारा बढ़ाने का पर्याप्त अवसर मौजूद है।
ब्रोकरेज के अनुसार, यह केवल बाजार के प्रति सकारात्मक भावना (Sentiment) का संकेत नहीं है, बल्कि एक पोजिशनिंग ट्रेड भी है, जहां विदेशी निवेशक भविष्य की संभावित तेजी को देखते हुए अपनी होल्डिंग बढ़ा रहे हैं।
निवेशकों के लिए क्या है संकेत?
विदेशी निवेशकों की लगातार खरीदारी भारतीय शेयर बाजार के लिए सकारात्मक संकेत मानी जाती है। हालांकि, सभी सेक्टर्स में समान तेजी देखने को नहीं मिल रही है। ऐसे में निवेशकों को केवल एफआईआई की खरीदारी देखकर निवेश करने के बजाय कंपनियों के फंडामेंटल, वैल्यूएशन और अपने निवेश लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए ही फैसला लेना चाहिए।
डिस्क्लेमर: यह लेख केवल जानकारी के उद्देश्य से तैयार किया गया है। शेयर बाजार में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। किसी भी निवेश निर्णय से पहले अपने वित्तीय सलाहकार या प्रमाणित निवेश विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य लें। NewsJagran किसी भी शेयर में निवेश की सलाह नहीं देता।


