चेन्नई: तमिलनाडु सरकार ने राज्य की शराब खरीद प्रणाली में बड़ा बदलाव करते हुए तमिलनाडु राज्य मार्केटिंग कॉर्पोरेशन (TASMAC) की खरीद नीति को संशोधित कर दिया है। नई व्यवस्था के तहत अब TASMAC कुछ चुनिंदा कंपनियों पर अधिक निर्भर रहने के बजाय सभी वैध शराब निर्माताओं (Manufacturers) से लगभग समान मात्रा में शराब खरीदेगा। सरकार का कहना है कि इस कदम का उद्देश्य खरीद प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाना और सभी कंपनियों को समान अवसर देना है।
राज्य सरकार के इस फैसले को शराब कारोबार में प्रतिस्पर्धा बढ़ाने और खरीद प्रक्रिया को अधिक संतुलित बनाने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। हालांकि, TASMAC कर्मचारियों ने इस नीति को लेकर कुछ व्यावहारिक चिंताएं भी जताई हैं।
TASMAC क्या है?
तमिलनाडु राज्य मार्केटिंग कॉर्पोरेशन (TASMAC) राज्य सरकार के स्वामित्व वाला निगम है, जिसके माध्यम से पूरे तमिलनाडु में शराब की खुदरा बिक्री की जाती है। राज्यभर में TASMAC की 4,000 से अधिक शराब दुकानें संचालित होती हैं।
वर्तमान में TASMAC 11 कंपनियों से इंडियन मेड फॉरेन लिकर (IMFL) और छह कंपनियों से बीयर की खरीद करता है। रिपोर्ट्स के अनुसार, इनमें से कुछ कंपनियों को राजनीतिक रूप से प्रभावशाली लोगों का समर्थन भी प्राप्त रहा है।
पहले कैसे होती थी शराब की खरीद?
अब तक TASMAC की खरीद नीति मुख्य रूप से ग्राहकों की मांग पर आधारित थी। जिन ब्रांडों की बिक्री अधिक होती थी, उन्हीं कंपनियों से सबसे ज्यादा ऑर्डर दिए जाते थे।
स्थिति यह थी कि कुल शराब आपूर्ति का लगभग 60 से 70 प्रतिशत हिस्सा केवल कुछ चुनिंदा मैन्युफैक्चरर्स से आता था। इससे छोटे या कम लोकप्रिय निर्माताओं को सीमित अवसर मिलते थे।
नई खरीद नीति में क्या बदला?
टीवीके के नेतृत्व वाली नई सरकार बनने के बाद TASMAC के कामकाज में पारदर्शिता और सुधार लाने के उद्देश्य से कई बदलाव शुरू किए गए हैं।
6 जुलाई को हुई TASMAC बोर्ड की बैठक में यह निर्णय लिया गया कि अब सभी वैध शराब निर्माताओं से लगभग बराबर मात्रा में खरीद की जाएगी। इसके बाद निगम ने सभी कंपनियों को समान आधार पर खरीद आदेश जारी करना शुरू कर दिया है।
सरकार का मानना है कि इससे खरीद प्रक्रिया अधिक निष्पक्ष होगी और किसी एक या कुछ कंपनियों पर अत्यधिक निर्भरता खत्म होगी।
एलीट आउटलेट्स के लिए भी नए निर्देश
नई नीति के तहत TASMAC के प्रीमियम “Elite” शराब आउटलेट्स को भी निर्देश दिए गए हैं कि वे प्रत्येक वैध मैन्युफैक्चरर के प्रीमियम और मीडियम-ग्रेड उत्पादों का कम से कम एक-एक केस स्टॉक में रखें।
इसका उद्देश्य ग्राहकों को अधिक ब्रांड विकल्प उपलब्ध कराना और प्रीमियम शराब की रेंज का विस्तार करना है।
कर्मचारियों ने जताई चिंता
नई खरीद नीति को लेकर TASMAC कर्मचारियों की प्रतिक्रिया मिश्रित रही है।
कर्मचारियों का कहना है कि यदि सभी कंपनियों से समान मात्रा में शराब खरीदी जाएगी तो ग्राहकों की वास्तविक मांग का सही आकलन नहीं हो पाएगा। लोकप्रिय ब्रांडों की मांग अधिक होने के बावजूद उनका स्टॉक जल्दी समाप्त हो सकता है, जबकि कम लोकप्रिय ब्रांड लंबे समय तक दुकानों में बिना बिके पड़े रह सकते हैं।
उनका यह भी कहना है कि इससे इन्वेंट्री प्रबंधन चुनौतीपूर्ण हो सकता है और ग्राहकों को उनकी पसंद का ब्रांड उपलब्ध कराने में परेशानी आ सकती है।
ग्राहकों की क्या मांग है?
इस बीच शराब उपभोक्ताओं ने सरकार से TASMAC दुकानों में उपलब्ध ब्रांडों की संख्या बढ़ाने की मांग की है।
ग्राहकों का कहना है कि तमिलनाडु में कई लोकप्रिय इंटरनेशनल और इम्पोर्टेड शराब ब्रांड उपलब्ध नहीं हैं, जबकि पड़ोसी केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी और अन्य राज्यों में ये आसानी से मिल जाते हैं। इसलिए सरकार को भविष्य में प्रोडक्ट पोर्टफोलियो का भी विस्तार करना चाहिए।
क्या होगा इस बदलाव का असर?
विशेषज्ञों के अनुसार नई खरीद नीति से सभी वैध शराब निर्माताओं को समान अवसर मिल सकता है और खरीद प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ेगी। हालांकि इसकी सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि सरकार ग्राहकों की वास्तविक मांग और स्टॉक प्रबंधन के बीच संतुलन कैसे बनाए रखती है। यदि लोकप्रिय ब्रांडों की उपलब्धता प्रभावित होती है तो इसका असर बिक्री और उपभोक्ता संतुष्टि दोनों पर पड़ सकता है।


