भारत के शेयर बाजार में 2026 की शुरुआत आईटी सेक्टर के लिए आसान नहीं रही, और इसका सबसे बड़ा उदाहरण बनकर उभरी है Infosys। देश की दूसरी सबसे बड़ी आईटी कंपनी का मार्केट कैप इस साल अब तक करीब 2 लाख करोड़ रुपये घट चुका है, जिससे कंपनी टॉप-10 वैल्यूएबल कंपनियों की सूची से बाहर हो गई है।
यह बदलाव सिर्फ एक कंपनी की गिरावट नहीं, बल्कि बाजार के बदलते ट्रेंड और सेक्टर रोटेशन की कहानी भी बयां करता है, जहां निवेशकों का भरोसा धीरे-धीरे आईटी से हटकर बैंकिंग और PSU कंपनियों की तरफ शिफ्ट होता दिख रहा है।
मार्केट कैप में गिरावट: क्या है पूरा मामला?
2025 के अंत में Infosys का मार्केट कैप करीब 6.8 लाख करोड़ रुपये था, लेकिन 2026 में आई गिरावट के बाद यह घटकर लगभग 4.76 लाख करोड़ रुपये रह गया है।
यानी कुछ ही महीनों में कंपनी ने वैल्यूएशन के लिहाज से बड़ा नुकसान झेला। इसके पीछे कई वजहें मानी जा रही हैं — ग्लोबल आईटी डिमांड में सुस्ती, क्लाइंट स्पेंडिंग में कटौती और मैक्रोइकोनॉमिक अनिश्चितता।
हालांकि, दिलचस्प बात यह है कि हालिया ट्रेडिंग सेशन में कंपनी के शेयरों में करीब 2% की तेजी भी देखी गई, जिससे स्टॉक इंट्रा-डे में 1178 रुपये तक पहुंच गया। लेकिन यह उछाल फिलहाल बड़ी गिरावट की भरपाई करने के लिए पर्याप्त नहीं दिख रहा।
LIC की एंट्री: PSU का दम
आईटी सेक्टर की कमजोरी के बीच सरकारी बीमा दिग्गज Life Insurance Corporation of India ने मौका भुनाया और टॉप-10 में अपनी जगह बना ली।
LIC का मार्केट कैप अब 5 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो चुका है, जो यह दिखाता है कि निवेशकों का भरोसा PSU स्टॉक्स पर मजबूत हो रहा है।
पिछले कुछ महीनों में सरकारी कंपनियों में तेजी का ट्रेंड देखने को मिला है — खासकर बैंकिंग, डिफेंस और इंश्योरेंस सेक्टर में।
भारत की टॉप-10 वैल्यूएबल कंपनियां (2026)
मार्केट कैप के आधार पर देश की प्रमुख कंपनियों की सूची इस तरह है:
- Reliance Industries – 19.02 लाख करोड़
- HDFC Bank – 12.08 लाख करोड़
- Bharti Airtel – 11.41 लाख करोड़
- State Bank of India – 10.09 लाख करोड़
- ICICI Bank – 9.21 लाख करोड़
- Tata Consultancy Services – 8.96 लाख करोड़
- Bajaj Finance – 5.73 लाख करोड़
- Larsen & Toubro – 5.60 लाख करोड़
- Hindustan Unilever – 5.41 लाख करोड़
- Life Insurance Corporation of India – 5.19 लाख करोड़
शेयर परफॉर्मेंस: निवेशकों की चिंता क्यों बढ़ी?
अगर शेयर के प्रदर्शन को देखें तो Infosys के लिए हालात ज्यादा उत्साहजनक नहीं हैं।
पिछले 6 महीनों में स्टॉक 22% से ज्यादा गिर चुका है, जबकि एक साल में करीब 21% की गिरावट दर्ज की गई है।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि 5 साल के लंबे समय में भी स्टॉक ने निगेटिव रिटर्न दिया है, जो लॉन्ग-टर्म निवेशकों के लिए चिंता का संकेत है।
तिमाही नतीजे: आंकड़े मजबूत, फिर भी दबाव क्यों?
कंपनी के फंडामेंटल्स पूरी तरह कमजोर नहीं हैं।
- Q4 राजस्व: 46,402 करोड़ रुपये
- YoY ग्रोथ: 13.40%
- नेट प्रॉफिट: 8,501 करोड़ रुपये (27.80% की बढ़ोतरी)
ये आंकड़े बताते हैं कि बिजनेस ऑपरेशन स्थिर हैं, लेकिन बाजार भविष्य की ग्रोथ को लेकर ज्यादा सतर्क है।
आईटी सेक्टर पर ग्लोबल क्लाइंट्स की खर्च में कटौती और AI ट्रांजिशन का असर भी दिख रहा है।
बड़ा सवाल: आगे क्या होगा?
अब सबसे अहम सवाल यही है — क्या Infosys वापसी कर पाएगी?
मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर ग्लोबल IT डिमांड में सुधार आता है और कंपनियां डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन पर खर्च बढ़ाती हैं, तो सेक्टर में रिकवरी संभव है।
वहीं दूसरी ओर, अगर ब्याज दरें ऊंची रहती हैं और आर्थिक अनिश्चितता जारी रहती है, तो आईटी स्टॉक्स पर दबाव बना रह सकता है।
निष्कर्ष
यह कहानी सिर्फ Infosys की गिरावट नहीं, बल्कि “India Market Rotation” का संकेत है।
जहां पहले IT सेक्टर निवेशकों का पसंदीदा था, वहीं अब PSU + बैंकिंग + इंफ्रा सेक्टर तेजी से उभर रहे हैं।
इसका सीधा मतलब है —
बाजार अब सिर्फ ग्रोथ नहीं, बल्कि स्टेबिलिटी और वैल्यू को भी उतनी ही अहमियत दे रहा है।
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