देश के तीन अहम राज्यों—Kerala, Assam और Puducherry—में विधानसभा चुनाव से पहले चुनाव प्रचार खत्म हो गया है। अब सभी की नजरें मतदान पर टिकी हैं, जो गुरुवार को होने वाला है। लगभग एक महीने चले हाई-वोल्टेज कैंपेन के बाद राजनीतिक दलों ने आखिरी दिन पूरी ताकत झोंक दी।
इसी बीच Nagaland के कोरिडांग सीट पर उपचुनाव के लिए भी प्रचार समाप्त हो गया, जहां हाल के दिनों में हिंसा की घटनाओं ने माहौल को और संवेदनशील बना दिया है।
असम: आरोप-प्रत्यारोप और ध्रुवीकरण के बीच चुनाव
Assam में इस बार का चुनाव सबसे ज्यादा आक्रामक और विवादों से भरा रहा। 126 सीटों वाली विधानसभा के लिए:
- Narendra Modi और Amit Shah ने बीजेपी के लिए कई रैलियां कीं
- मुख्यमंत्री Himanta Biswa Sarma लगातार विपक्ष पर हमलावर रहे
मुख्य मुद्दे:
- घुसपैठ और वोट बैंक की राजनीति
- विकास और रोजगार
- कानून-व्यवस्था
बीजेपी ने कांग्रेस पर “घुसपैठियों को बसाने” का आरोप लगाया, जबकि Indian National Congress ने बीजेपी पर “नफरत की राजनीति” करने का आरोप लगाया।
यह चुनाव सिर्फ विकास नहीं, बल्कि पहचान और ध्रुवीकरण की राजनीति पर भी केंद्रित रहा।
केरल: तीन मोर्चों के बीच सीधी टक्कर
Kerala में मुकाबला पारंपरिक तौर पर तीन प्रमुख गठबंधनों के बीच है:
- LDF (लेफ्ट) – नेतृत्व: Pinarayi Vijayan
- UDF (कांग्रेस)
- NDA (बीजेपी)
बड़े चेहरे:
- Narendra Modi
- Amit Shah
- Rahul Gandhi
- Priyanka Gandhi Vadra
चुनावी मुद्दे:
- भ्रष्टाचार के आरोप
- विकास बनाम वैचारिक राजनीति
- Sabarimala Temple entry case
कांग्रेस ने LDF और बीजेपी के बीच “अंदरूनी समझौते” का आरोप लगाया, जबकि बीजेपी ने दोनों गठबंधनों को “विकास में विफल” बताया।
पुडुचेरी: छोटी सीट, बड़ा दांव
Puducherry में 30 सीटों के लिए चुनाव हो रहा है, लेकिन राजनीतिक महत्व काफी बड़ा है।
- कुल 294 उम्मीदवार मैदान में
- NDA और INDIA ब्लॉक के बीच सीधी टक्कर
यहां चुनाव को “prestige battle” माना जा रहा है, क्योंकि छोटी विधानसभा होने के बावजूद इसका राजनीतिक संदेश राष्ट्रीय स्तर तक जाता है।
नागालैंड: उपचुनाव में हिंसा से बढ़ी चिंता
Nagaland के कोरिडांग सीट पर उपचुनाव:
- हाल के 48 घंटों में हिंसा
- 1 व्यक्ति की मौत
- कई घायल
- 16 लोग हिरासत में
यह उपचुनाव Imkong L Imchen के निधन के बाद हो रहा है, जो पांच बार विधायक रह चुके थे।
यहां का तनाव चुनाव आयोग और सुरक्षा एजेंसियों के लिए चुनौती बना हुआ है।
चुनावी माहौल: आखिरी दिन क्या दिखा?
अंतिम दिन सभी राज्यों में:
- रोड शो, रैलियां, डोर-टू-डोर कैंपेन
- सोशल मीडिया पर आखिरी अपील
- स्थानीय मुद्दों के साथ राष्ट्रीय मुद्दों की एंट्री
यह साफ दिखा कि चुनाव अब सिर्फ स्थानीय नहीं, बल्कि राष्ट्रीय राजनीति से भी जुड़ चुका है।
आगे क्या?
- 9 अप्रैल: मतदान
- इसके बाद एग्जिट पोल
- फिर मतगणना और नतीजे
इन चुनावों के नतीजे:
- 2026 की राजनीति की दिशा तय कर सकते हैं
- राष्ट्रीय पार्टियों की पकड़ का संकेत देंगे
- आने वाले बड़े चुनावों के लिए माहौल बनाएंगे
निष्कर्ष
Kerala, Assam और Puducherry में चुनाव प्रचार खत्म होने के साथ अब असली परीक्षा वोटिंग की है।
जहां एक तरफ बड़े नेता और बड़े मुद्दे रहे, वहीं दूसरी तरफ स्थानीय समस्याएं भी उतनी ही अहम रहीं। अब देखना यह है कि जनता किसे चुनती है—विकास, पहचान या राजनीतिक वादों को।
नतीजे आने के बाद ही साफ होगा कि किसकी रणनीति काम आई और किसकी नहीं।
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