भारत आज केवल दुनिया का सबसे बड़ा स्मार्टफोन बाजार ही नहीं है, बल्कि मोबाइल निर्माण के क्षेत्र में भी तेजी से वैश्विक ताकत बनता जा रहा है। पिछले कुछ वर्षों में केंद्र सरकार की ‘मेक इन इंडिया’ और उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (PLI) योजनाओं ने इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को नई गति दी है। इसी बदलाव का सबसे बड़ा उदाहरण उत्तर प्रदेश का नोएडा है, जहां दुनिया की सबसे बड़ी मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी मौजूद है।
यह विशाल फैक्ट्री दक्षिण कोरियाई इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनी सैमसंग की है, जो हर साल लगभग 12 करोड़ मोबाइल फोन तैयार करने की क्षमता रखती है। यहां बनाए जाने वाले स्मार्टफोन केवल भारतीय बाजार तक सीमित नहीं हैं, बल्कि एशिया, यूरोप, अफ्रीका और मध्य पूर्व सहित कई देशों में निर्यात भी किए जाते हैं।
नोएडा में क्यों स्थापित की गई दुनिया की सबसे बड़ी मोबाइल फैक्ट्री?
साल 2018 में सैमसंग ने उत्तर प्रदेश के नोएडा सेक्टर-81 में इस मेगा मैन्युफैक्चरिंग यूनिट का उद्घाटन किया था। इसका उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और दक्षिण कोरिया के तत्कालीन राष्ट्रपति मून जे-इन ने संयुक्त रूप से किया था।
इस परियोजना का उद्देश्य केवल भारत की घरेलू मांग को पूरा करना नहीं था, बल्कि भारत को वैश्विक स्मार्टफोन उत्पादन केंद्र के रूप में विकसित करना भी था। इसी रणनीति के तहत कंपनी ने “Make for the World” पहल शुरू की, जिसके माध्यम से भारत में निर्मित स्मार्टफोन दुनिया के विभिन्न बाजारों तक पहुंचाए जा रहे हैं।
सैमसंग पहले से नोएडा में मोबाइल उत्पादन कर रही थी, लेकिन नई फैक्ट्री शुरू होने के बाद उत्पादन क्षमता में भारी वृद्धि हुई। कंपनी की वार्षिक उत्पादन क्षमता 6.8 करोड़ यूनिट से बढ़कर 12 करोड़ यूनिट तक पहुंच गई।
कितनी बड़ी है यह फैक्ट्री?
नोएडा सेक्टर-81 में स्थित यह फैक्ट्री लगभग 35 एकड़ क्षेत्र में फैली हुई है। अत्याधुनिक तकनीक से लैस इस परिसर में मोबाइल निर्माण से जुड़े लगभग सभी प्रमुख चरणों को एकीकृत किया गया है।
यहां एंट्री लेवल स्मार्टफोन से लेकर सैमसंग की प्रीमियम और फ्लैगशिप सीरीज तक के विभिन्न मॉडल तैयार किए जाते हैं। उत्पादन प्रक्रिया में ऑटोमेशन, गुणवत्ता नियंत्रण और सप्लाई चेन प्रबंधन के आधुनिक मानकों का उपयोग किया जाता है।
कंपनी के अनुसार, यह सुविधा दुनिया की सबसे बड़ी मोबाइल फोन निर्माण इकाइयों में शामिल है और एक वर्ष में 120 मिलियन यानी 12 करोड़ मोबाइल फोन तैयार करने की क्षमता रखती है।
भारत को कैसे मिल रहा है फायदा?
सैमसंग की यह फैक्ट्री केवल एक उत्पादन इकाई नहीं है, बल्कि भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण आर्थिक इंजन भी बन चुकी है।
इस परियोजना से हजारों प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा हुए हैं। फैक्ट्री के आसपास सप्लायर नेटवर्क, लॉजिस्टिक्स कंपनियां, पैकेजिंग यूनिट और अन्य सहायक उद्योग भी तेजी से विकसित हुए हैं।
इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग के जानकारों का मानना है कि ऐसी बड़ी परियोजनाएं भारत को चीन और वियतनाम जैसे देशों के विकल्प के रूप में स्थापित करने में मदद कर रही हैं।
विदेशों में भी भेजे जाते हैं भारत में बने स्मार्टफोन
सैमसंग की “Make for the World” रणनीति के तहत नोएडा में निर्मित मोबाइल फोन कई अंतरराष्ट्रीय बाजारों में निर्यात किए जाते हैं।
भारत से निर्यात होने वाले स्मार्टफोन की संख्या पिछले कुछ वर्षों में लगातार बढ़ी है। सरकार के आंकड़ों के अनुसार, मोबाइल फोन देश के सबसे तेजी से बढ़ते निर्यात उत्पादों में शामिल हो चुके हैं।
नोएडा स्थित यह प्लांट भारत को केवल एक उपभोक्ता बाजार नहीं, बल्कि वैश्विक सप्लाई हब के रूप में स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
भारत में इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग का बढ़ता दबदबा
एक समय था जब भारत स्मार्टफोन के लिए पूरी तरह आयात पर निर्भर था। लेकिन आज स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है। भारत दुनिया के सबसे बड़े मोबाइल फोन उत्पादन केंद्रों में शामिल हो चुका है।
सैमसंग, एप्पल के कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरिंग पार्टनर, डिक्सन टेक्नोलॉजीज, फॉक्सकॉन, लावा और कई अन्य कंपनियां देश में बड़े पैमाने पर उत्पादन कर रही हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वर्तमान गति जारी रहती है तो आने वाले वर्षों में भारत वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स सप्लाई चेन में और मजबूत स्थिति हासिल कर सकता है।
PCB निर्माण में भी आगे है सैमसंग
सैमसंग वर्ष 2007 से भारत में मोबाइल फोन का निर्माण कर रही है। कंपनी केवल मोबाइल असेंबली तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रिंटेड सर्किट बोर्ड (PCB) निर्माण जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में भी सक्रिय है।
यह भारत सरकार के चरणबद्ध विनिर्माण कार्यक्रम (PMP) के अनुरूप स्थानीय उत्पादन को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जाता है। इससे आयात पर निर्भरता कम होती है और घरेलू वैल्यू एडिशन बढ़ता है।
आगे क्या?
भारत सरकार इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए लगातार नई नीतियां और प्रोत्साहन योजनाएं लागू कर रही है। ऐसे में नोएडा की यह मेगा फैक्ट्री आने वाले वर्षों में और अधिक उत्पादन तथा निर्यात का केंद्र बन सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि मोबाइल फोन निर्माण में भारत की बढ़ती भूमिका न केवल रोजगार बढ़ाएगी बल्कि देश को वैश्विक तकनीकी विनिर्माण मानचित्र पर और मजबूत स्थान दिलाने में भी मदद करेगी।
स्रोत: Samsung Electronics, भारत सरकार की मेक इन इंडिया पहल, सैमसंग इंडिया के आधिकारिक बयान और कंपनी द्वारा जारी उत्पादन क्षमता संबंधी जानकारी।


