Oil Price Today: वैश्विक तेल बाजार में एक बार फिर बड़ा उछाल देखने को मिला है। मध्य पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, यमन के हूती विद्रोहियों के हमले और होर्मुज स्ट्रेट में तेल आपूर्ति पर बढ़ते संकट के चलते ब्रेंट क्रूड की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि हालात जल्द नहीं सुधरे तो कच्चे तेल की कीमतें 120 डॉलर प्रति बैरल तक जा सकती हैं, जिसका सीधा असर भारत समेत पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।
ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर के पार, WTI में भी तेज उछाल
गुरुवार को अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड 7% की तेजी के साथ 100.71 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। यह लगभग दो महीनों का सबसे ऊंचा स्तर है। वहीं अमेरिकी WTI क्रूड 6% बढ़कर 92.01 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार करता दिखाई दिया।
तेल बाजार में यह तेजी ऐसे समय आई है जब मध्य पूर्व में संघर्ष लगातार गहराता जा रहा है और वैश्विक सप्लाई चेन पर दबाव बढ़ता जा रहा है।
हूती विद्रोहियों के हमले से बढ़ी चिंता
यमन के हूती विद्रोहियों ने दावा किया है कि उन्होंने लाल सागर (Red Sea) में सऊदी अरब के तेल ले जा रहे दो टैंकरों को निशाना बनाया। उनका कहना है कि वे सऊदी तेल निर्यात के खिलाफ समुद्री नाकेबंदी लागू करने की रणनीति पर काम कर रहे हैं।
बाद में सऊदी समाचार एजेंसी ने भी पुष्टि की कि दो टैंकरों में से एक पर हमला हुआ, जिसमें आग लग गई। इस घटना के बाद वैश्विक बाजार में तेल आपूर्ति को लेकर चिंता और बढ़ गई।
होर्मुज स्ट्रेट और बाब-अल-मंदेब क्यों हैं इतने महत्वपूर्ण?
दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री तेल मार्गों में शामिल होर्मुज स्ट्रेट और बाब-अल-मंदेब स्ट्रेट से हर दिन लाखों बैरल कच्चा तेल दुनिया के अलग-अलग देशों तक पहुंचता है।
यदि इन समुद्री मार्गों में बाधा आती है तो:
- वैश्विक तेल सप्लाई प्रभावित होती है।
- शिपिंग लागत बढ़ जाती है।
- बीमा प्रीमियम महंगा हो जाता है।
- कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिलता है।
यही वजह है कि बाजार इस समय बेहद संवेदनशील बना हुआ है।
विशेषज्ञों ने दी बड़ी चेतावनी
मैटाडोर इकोनॉमिक्स के मुख्य अर्थशास्त्री टिम स्नाइडर के अनुसार, सऊदी तेल टैंकरों पर हमला वैश्विक ऊर्जा बाजार के लिए बड़ा झटका है।
उनका कहना है कि यदि ऐसे हमले जारी रहे तो तेल आपूर्ति लंबे समय तक प्रभावित रह सकती है और कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी रह सकती हैं।
गोल्डमैन सैक्स का बड़ा अनुमान
इन्वेस्टमेंट बैंक गोल्डमैन सैक्स ने चेतावनी दी है कि यदि होर्मुज स्ट्रेट में मौजूदा संकट 2027 तक जारी रहता है तो:
- ब्रेंट क्रूड 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकता है।
- अगले वर्ष औसत कीमत करीब 100 डॉलर प्रति बैरल रह सकती है।
- यदि बाब-अल-मंदेब और स्वेज नहर में भी व्यवधान जारी रहा तो तेल की कीमतों में और अधिक तेजी संभव है।
होर्मुज स्ट्रेट में क्या हो रहा है?
ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने दावा किया है कि ओमान के पास एक तेल टैंकर में विस्फोट के बाद आग लग गई। इसके बाद दो अन्य टैंकरों ने अपना रास्ता बदल लिया।
ईरान ने यह भी कहा कि होर्मुज स्ट्रेट उसके नियंत्रण में है और क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य गतिविधियां जारी रहने तक उसकी अनुमति के बिना कोई भी टैंकर सुरक्षित रूप से वहां से नहीं गुजर सकेगा।
इस बयान ने वैश्विक बाजार की चिंता और बढ़ा दी है।
तेल सप्लाई पर कितना असर पड़ा?
यूबीएस की रिपोर्ट के अनुसार:
- होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले गैर-ईरानी तेल टैंकरों की संख्या तेजी से घटी है।
- अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण ईरान का तेल निर्यात लगभग शून्य के करीब पहुंच गया है।
- पिछले सात दिनों में खाड़ी क्षेत्र से तेल लोडिंग घटकर 25 लाख बैरल प्रतिदिन रह गई।
- इससे पहले 30 दिनों का औसत लगभग 60 लाख बैरल प्रतिदिन था।
यह गिरावट वैश्विक सप्लाई पर गंभीर दबाव का संकेत देती है।
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव
अमेरिकी सेना ने जानकारी दी है कि उसने लगातार 12वीं रात ईरान से जुड़े ठिकानों पर कार्रवाई की है।
इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी थी कि यदि ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट में किसी जहाज को निशाना बनाया तो अमेरिका उसके रणनीतिक ठिकानों पर जवाबी कार्रवाई करेगा।
मध्य पूर्व में बढ़ता यह सैन्य तनाव फिलहाल तेल बाजार के लिए सबसे बड़ा जोखिम बना हुआ है।
भारत पर क्या पड़ेगा असर?
भारत अपनी जरूरत का अधिकांश कच्चा तेल आयात करता है। ऐसे में यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल लंबे समय तक 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बना रहता है, तो इसके कई प्रभाव देखने को मिल सकते हैं।
- पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है।
- एलपीजी और एटीएफ (एविएशन फ्यूल) महंगे हो सकते हैं।
- परिवहन लागत बढ़ने से महंगाई में तेजी आ सकती है।
- सरकार पर ईंधन करों में राहत देने का दबाव बढ़ सकता है।
- आयात बिल बढ़ने से चालू खाते के घाटे पर असर पड़ सकता है।
हालांकि भारत के पास रणनीतिक तेल भंडार और कई देशों से आयात के विकल्प मौजूद हैं, लेकिन यदि संकट लंबा खिंचता है तो घरेलू बाजार भी इससे अछूता नहीं रहेगा।
आगे किन बातों पर रहेगी बाजार की नजर?
आने वाले दिनों में निवेशकों की नजर इन प्रमुख घटनाओं पर रहेगी:
- होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही
- लाल सागर में सुरक्षा स्थिति
- ईरान और अमेरिका के बीच सैन्य गतिविधियां
- ओपेक+ की संभावित प्रतिक्रिया
- वैश्विक तेल भंडार और निर्यात के ताजा आंकड़े
यदि तनाव कम नहीं हुआ तो कच्चे तेल की कीमतों में और तेजी देखने को मिल सकती है।
Disclaimer: यह लेख केवल जानकारी के उद्देश्य से है। कमोडिटी और वित्तीय बाजारों में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन होता है। किसी भी निवेश निर्णय से पहले अपने वित्तीय सलाहकार या विशेषज्ञ से सलाह अवश्य लें।


