बांग्लादेश की मुश्किलें भारत के लिए कैसे बन सकती हैं बड़ा अवसर?
भारत और बांग्लादेश के बीच टेक्सटाइल उद्योग को लेकर प्रतिस्पर्धा कोई नई बात नहीं है। पिछले दो दशकों में बांग्लादेश ने रेडीमेड गारमेंट (RMG) सेक्टर में जबरदस्त सफलता हासिल करते हुए खुद को दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा कपड़ा निर्यातक देश बना लिया। लेकिन अब वैश्विक हालात बदल रहे हैं। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव, ऊर्जा संकट और बढ़ती लॉजिस्टिक लागत ने बांग्लादेश के कपड़ा उद्योग के सामने नई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। वहीं दूसरी ओर भारत के लिए यह स्थिति एक बड़े अवसर के रूप में देखी जा रही है।
दुनिया भर में कपड़ा उद्योग का कारोबार अरबों डॉलर का है। चीन आज भी इस क्षेत्र में सबसे बड़ी ताकत बना हुआ है और वैश्विक टेक्सटाइल बाजार में लगभग 40 फीसदी हिस्सेदारी रखता है। हालांकि पिछले कुछ वर्षों में चीन की बढ़ती लागत और वैश्विक कंपनियों की ‘चाइना प्लस वन’ रणनीति के कारण कई अंतरराष्ट्रीय ब्रांड वैकल्पिक आपूर्ति केंद्रों की तलाश कर रहे हैं। इस बदलाव का सबसे अधिक फायदा बांग्लादेश और वियतनाम जैसे देशों को मिला। अब भारत भी इस दौड़ में अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश कर रहा है।
हाल के महीनों में मिडिल ईस्ट में बढ़े तनाव का असर केवल तेल बाजार तक सीमित नहीं रहा है। कच्चे तेल की कीमतों में तेजी, समुद्री मार्गों पर जोखिम और शिपिंग लागत में बढ़ोतरी ने निर्यात आधारित अर्थव्यवस्थाओं पर दबाव बढ़ा दिया है। जर्मन मीडिया DW की रिपोर्ट के अनुसार बांग्लादेश की कई टेक्सटाइल फैक्ट्रियां बिजली संकट और बढ़ती उत्पादन लागत से जूझ रही हैं। उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि बिजली कटौती के कारण उत्पादन प्रभावित हो रहा है और समय पर ऑर्डर पूरा करना मुश्किल हो गया है।
बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था में रेडीमेड गारमेंट सेक्टर की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। देश के कुल निर्यात में कपड़ा और परिधान उद्योग की हिस्सेदारी सबसे ज्यादा है। लाखों लोग सीधे या अप्रत्यक्ष रूप से इस क्षेत्र पर निर्भर हैं। ऐसे में यदि उत्पादन और निर्यात प्रभावित होता है तो इसका असर रोजगार, विदेशी मुद्रा भंडार और आर्थिक वृद्धि पर भी पड़ सकता है।
ऊर्जा संकट के अलावा लॉजिस्टिक लागत भी बांग्लादेश के लिए बड़ी चुनौती बन गई है। उद्योग संगठनों का कहना है कि कई मामलों में समय पर डिलीवरी सुनिश्चित करने के लिए हवाई मार्ग का सहारा लेना पड़ रहा है। इससे लागत में भारी बढ़ोतरी हो रही है और मुनाफा घट रहा है। अंतरराष्ट्रीय खरीदार समय पर डिलीवरी को सबसे ज्यादा महत्व देते हैं और देरी होने पर वे दूसरे देशों की ओर रुख कर सकते हैं।
यहीं पर भारत के लिए अवसर पैदा होता है। भारत के पास कपास उत्पादन से लेकर यार्न, फैब्रिक और तैयार परिधान तक पूरी वैल्यू चेन मौजूद है। इसके अलावा देश में बंदरगाह, रेल और सड़क नेटवर्क लगातार मजबूत हो रहे हैं। सरकार भी प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) योजना, पीएम मित्र मेगा टेक्सटाइल पार्क और निर्यात प्रोत्साहन योजनाओं के माध्यम से उद्योग को समर्थन दे रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बांग्लादेश की समस्याएं लंबे समय तक बनी रहती हैं तो वैश्विक ब्रांड अपने ऑर्डर का कुछ हिस्सा भारत की ओर स्थानांतरित कर सकते हैं। अमेरिका और यूरोप भारत के प्रमुख निर्यात बाजार हैं और यहां भारतीय उत्पादों की मांग लगातार बढ़ रही है। कई विदेशी कंपनियां पहले से ही भारत में अपनी सोर्सिंग बढ़ाने पर विचार कर रही हैं।
हालांकि भारत के लिए यह अवसर अपने आप सफलता में नहीं बदलेगा। देश को श्रम लागत, उत्पादन क्षमता, लॉजिस्टिक दक्षता और निर्यात प्रक्रियाओं में सुधार जारी रखना होगा। वियतनाम और तुर्किये जैसे देश भी इस अवसर का फायदा उठाने की कोशिश करेंगे। इसलिए भारत को प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त बनाए रखने के लिए तेज फैसले लेने होंगे।
वाणिज्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार भारत का कपड़ा और परिधान निर्यात लगातार बढ़ रहा है, लेकिन अभी भी बांग्लादेश और चीन से आगे निकलने के लिए काफी काम करना बाकी है। वर्ष 2024 में बांग्लादेश का कपड़ा निर्यात लगभग 38.48 अरब डॉलर रहा जबकि भारत का निर्यात करीब 36.61 अरब डॉलर था। यह अंतर बहुत बड़ा नहीं है और यदि वैश्विक परिस्थितियां भारत के पक्ष में रहीं तो आने वाले वर्षों में तस्वीर बदल सकती है।
मिडिल ईस्ट संकट ने वैश्विक सप्लाई चेन की कमजोरियों को एक बार फिर उजागर किया है। ऐसे समय में वे देश लाभ में रहते हैं जिनके पास मजबूत घरेलू संसाधन, बेहतर बुनियादी ढांचा और स्थिर ऊर्जा आपूर्ति होती है। भारत इन तीनों मोर्चों पर अपेक्षाकृत बेहतर स्थिति में दिखाई देता है।
कुल मिलाकर देखा जाए तो बांग्लादेश के सामने खड़ी चुनौतियां भारत के लिए एक रणनीतिक अवसर बन सकती हैं। यदि भारतीय उद्योग और सरकार इस मौके का सही उपयोग करने में सफल रहते हैं तो देश वैश्विक टेक्सटाइल बाजार में अपनी हिस्सेदारी बढ़ा सकता है और आने वाले वर्षों में दुनिया के शीर्ष कपड़ा निर्यातकों में और मजबूत स्थिति हासिल कर सकता है।


