नई दिल्ली: भारत का टेक्सटाइल और अपैरल (परिधान) उद्योग आने वाले वर्षों में तेज़ी से विस्तार की ओर बढ़ रहा है। इसी के साथ इस सेक्टर में कुशल मानव संसाधन की मांग भी रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने वाली है। गुरुवार को जारी एक रिपोर्ट के मुताबिक, घरेलू और वैश्विक बाजार में बढ़ते अवसरों का पूरा लाभ उठाने के लिए भारत के टेक्सटाइल और अपैरल उद्योग को अगले 10 वर्षों में लगभग 1.4 करोड़ अतिरिक्त कुशल कर्मचारियों की आवश्यकता होगी।
रिपोर्ट के अनुसार, वर्तमान में यह उद्योग देश में करीब 4.6 करोड़ लोगों को रोजगार देता है। सरकार और उद्योग जगत के अनुमानों के मुताबिक वर्ष 2030 तक इस क्षेत्र में रोजगार बढ़कर लगभग 6 करोड़ तक पहुंच सकता है। यह जानकारी अपैरल, मेड-अप्स एंड होम फर्निशिंग सेक्टर स्किल काउंसिल (AMHSSC) द्वारा आयोजित एक कार्यशाला के दौरान साझा की गई, जिसमें उद्योग प्रतिनिधियों, निर्यातकों, मैन्युफैक्चरर्स, ट्रेनिंग पार्टनर्स और नीति निर्माताओं ने हिस्सा लिया।
2030 तक 150 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है बाजार
रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत का अपैरल बाजार वर्ष 2030 तक 130 से 150 अरब डॉलर के आकार तक पहुंच सकता है। इस दौरान बाजार में 10 से 12 प्रतिशत की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (CAGR) रहने का अनुमान है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तेज़ विकास के पीछे कई प्रमुख कारण होंगे, जिनमें शामिल हैं—
- उपभोक्ताओं की बदलती पसंद
- फैशन ट्रेंड में तेजी से बदलाव
- अलग-अलग अवसरों के लिए नए उत्पादों की बढ़ती मांग
- बेहतर गुणवत्ता और वैल्यू वाले उत्पादों की बढ़ती लोकप्रियता
- घरेलू और निर्यात बाजार में बढ़ती संभावनाएं
इन सभी कारणों से उद्योग में उत्पादन बढ़ेगा और रोजगार के नए अवसर भी बड़ी संख्या में पैदा होंगे।
स्किल डेवलपमेंट पर रहेगा सबसे ज्यादा जोर
कार्यशाला में टेक्सटाइल और अपैरल उद्योग की भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए स्किल डेवलपमेंट पर विशेष चर्चा की गई।
कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय की वरिष्ठ आर्थिक सलाहकार मनीषा सेनसरमा ने कहा कि भारत के कार्यबल का भविष्य सरकार और उद्योग के बीच मजबूत साझेदारी पर निर्भर करेगा। उनके अनुसार उद्योग को निम्न क्षेत्रों में सक्रिय भूमिका निभानी होगी—
- भविष्य की स्किल आवश्यकताओं की पहचान
- उद्योग आधारित पाठ्यक्रम तैयार करना
- सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की स्थापना
- पीएम सेतु पहल के तहत आईटीआई का आधुनिकीकरण
- बाजार की मांग के अनुरूप लचीला स्किल इकोसिस्टम तैयार करना
उन्होंने कहा कि सरकार और निजी क्षेत्र के सहयोग से ही ऐसा कार्यबल तैयार किया जा सकता है जो वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा कर सके।
एआई और नई तकनीकों में अपस्किलिंग होगी जरूरी
रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि आने वाले समय में केवल पारंपरिक कौशल पर्याप्त नहीं होंगे। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और अन्य उभरती तकनीकों का इस्तेमाल टेक्सटाइल उद्योग में तेजी से बढ़ रहा है।
मनीषा सेनसरमा ने कहा कि उत्पादकता और वैश्विक प्रतिस्पर्धा बनाए रखने के लिए कर्मचारियों को लगातार नई तकनीकों में प्रशिक्षित करना होगा। उद्योग को भविष्य की जरूरतों के अनुसार अपस्किलिंग कार्यक्रमों पर निवेश बढ़ाना चाहिए।
कृषि के बाद दूसरा सबसे बड़ा रोजगार देने वाला उद्योग
AMHSSC के चेयरमैन प्रेमल उदानी ने कहा कि कृषि के बाद भारत में सबसे अधिक रोजगार देने वाला क्षेत्र अपैरल उद्योग है। उन्होंने बताया कि हाल के वर्षों में भारत द्वारा किए गए फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) इस उद्योग के लिए नए अवसर लेकर आए हैं।
उनके अनुसार आने वाले वर्षों में निर्यात बढ़ने से कुशल कर्मचारियों की मांग और तेज़ होगी। इसलिए उद्योग के साथ मिलकर स्किल गैप स्टडी की जा रही है, ताकि प्रशिक्षण कार्यक्रमों को वास्तविक जरूरतों के अनुरूप बनाया जा सके।
भारत-यूके एफटीए से मिलेगा बड़ा फायदा
AMHSSC के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) आशीष श्रीवास्तव ने कहा कि भारत-यूके फ्री ट्रेड एग्रीमेंट भारतीय टेक्सटाइल और अपैरल उद्योग के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि साबित होगा।
उन्होंने कहा कि इस समझौते से भारतीय निर्माताओं को नए निर्यात बाजार मिलेंगे, जिससे उनकी वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता मजबूत होगी। इसके साथ ही उत्पादन बढ़ने से रोजगार के नए अवसर भी बड़ी संख्या में पैदा होंगे।
भारत के लिए क्यों अहम है यह अवसर?
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भारत समय रहते पर्याप्त संख्या में कुशल कार्यबल तैयार कर लेता है, तो वह वैश्विक टेक्सटाइल सप्लाई चेन में अपनी हिस्सेदारी और मजबूत कर सकता है। चीन समेत कई देशों में बढ़ती उत्पादन लागत के बीच भारत के पास निर्यात बढ़ाने का बड़ा अवसर है।
हालांकि इसके लिए केवल उत्पादन क्षमता बढ़ाना ही पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि आधुनिक तकनीक, प्रशिक्षित मानव संसाधन और उद्योग की जरूरतों के अनुरूप स्किल डेवलपमेंट पर भी समान रूप से ध्यान देना होगा।
निष्कर्ष
भारत का टेक्सटाइल और अपैरल उद्योग अगले दशक में देश के सबसे बड़े रोजगार सृजन क्षेत्रों में से एक बनने की ओर बढ़ रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, 1.4 करोड़ अतिरिक्त कुशल कर्मचारियों की जरूरत इस बात का संकेत है कि स्किल डेवलपमेंट, आधुनिक तकनीक और सरकार-उद्योग की साझेदारी भविष्य की सफलता की कुंजी होगी। यदि इन क्षेत्रों पर प्रभावी ढंग से काम किया गया, तो भारत न केवल घरेलू बाजार बल्कि वैश्विक टेक्सटाइल उद्योग में भी अपनी स्थिति को और मजबूत कर सकता है।


