नई दिल्ली: देश में विकसित किए जा रहे इंडस्ट्रियल कॉरिडोर और ग्रीनफील्ड स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट्स को अधिक प्रभावी और निवेशकों के अनुकूल बनाने के लिए नेशनल इंडस्ट्रियल कॉरिडोर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (NICDC) ने एक नई पहल शुरू की है। महाराष्ट्र के शेंद्रा-बिडकिन इंडस्ट्रियल एरिया (AURIC – Aurangabad Industrial City) में दो दिवसीय क्रॉस-लर्निंग साइट विजिट प्रोग्राम का शुभारंभ किया गया है। इस कार्यक्रम का उद्देश्य विभिन्न राज्यों में विकसित हो रही इंडस्ट्रियल स्मार्ट सिटी परियोजनाओं के बीच अनुभवों का आदान-प्रदान करना और सफल मॉडल को अन्य परियोजनाओं में लागू करना है।
यह कार्यक्रम महाराष्ट्र इंडस्ट्रियल टाउनशिप लिमिटेड (MITL) के सहयोग से आयोजित किया जा रहा है, जिसमें देशभर से वरिष्ठ अधिकारी, स्पेशल पर्पज व्हीकल (SPV), प्रोग्राम मैनेजर फॉर न्यू सिटीज (PMNC), ईपीसी कॉन्ट्रैक्टर्स और अन्य संबंधित एजेंसियों के प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं।
ऑरिक स्मार्ट सिटी बना इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट का सफल मॉडल
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए एनआईसीडीसी के सीईओ और प्रबंध निदेशक रजत कुमार सैनी ने कहा कि AURIC स्मार्ट सिटी, नेशनल इंडस्ट्रियल कॉरिडोर डेवलपमेंट प्रोग्राम (NICDP) के तहत विकसित सबसे सफल एकीकृत औद्योगिक शहरों में से एक बनकर उभरा है।
उन्होंने कहा कि इस परियोजना ने यह साबित किया है कि यदि विश्वस्तरीय इंफ्रास्ट्रक्चर, निवेशक-केंद्रित योजना, डिजिटल गवर्नेंस और मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी को एक साथ जोड़ा जाए तो भारत वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी मैन्युफैक्चरिंग हब तैयार कर सकता है।
एसपीवी को अधिक अधिकार देने की वकालत
रजत कुमार सैनी ने कहा कि स्पेशल पर्पज व्हीकल्स (SPV) को परियोजनाओं की योजना बनाने में अधिक स्वतंत्रता मिलनी चाहिए। इससे भूमि का बेहतर उपयोग, इंफ्रास्ट्रक्चर का अधिक कुशल विकास और भविष्य में विस्तार की संभावनाएं मजबूत होंगी।
उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे क्रॉस-लर्निंग कार्यक्रम विभिन्न राज्यों में चल रही इंडस्ट्रियल कॉरिडोर परियोजनाओं के बीच सफल मॉडल को दोहराने और विकास की गति बढ़ाने में अहम भूमिका निभाएंगे।
पहले दिन क्या-क्या देखा गया?
कार्यक्रम के पहले दिन प्रतिभागियों को AURIC स्मार्ट सिटी की पूरी विकास प्रक्रिया से अवगत कराया गया। इसमें शामिल प्रमुख पहलू थे:
- शेंद्रा-बिडकिन इंडस्ट्रियल एरिया की मास्टर प्लानिंग
- डिजिटल प्लानिंग और मॉनिटरिंग सिस्टम
- संचालित औद्योगिक इकाइयों का निरीक्षण
- यूटिलिटी इंफ्रास्ट्रक्चर का प्रदर्शन
- मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट्स
- औद्योगिक सुविधाओं और निवेशक सेवाओं का अवलोकन
प्रतिभागियों ने मौके पर जाकर यह समझा कि किस तरह आधुनिक तकनीक और सुव्यवस्थित योजना के माध्यम से औद्योगिक शहरों का विकास किया जा सकता है।
निवेशक सुविधा और डिजिटल गवर्नेंस पर विशेष चर्चा
कार्यक्रम के दौरान कई महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत विचार-विमर्श किया गया, जिनमें शामिल हैं:
- एकीकृत मास्टर प्लानिंग
- परियोजना कार्यान्वयन (Project Implementation)
- भूमि उपयोग प्रबंधन
- निवेशकों को बेहतर सुविधाएं
- डिजिटल गवर्नेंस
- प्रोजेक्ट मॉनिटरिंग सिस्टम
- विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय
प्रतिभागियों ने अपने-अपने राज्यों के अनुभव साझा किए और यह चर्चा की कि बेहतर समन्वय के जरिए इंडस्ट्रियल कॉरिडोर परियोजनाओं को और तेजी से आगे कैसे बढ़ाया जा सकता है।
‘भव्य’ योजना को मिलेगा AURIC मॉडल का लाभ
कार्यक्रम में भारत औद्योगिक विकास योजना (BHAVYA) के इम्प्लीमेंटेशन फ्रेमवर्क पर भी विशेष चर्चा हुई। यह NICDC की प्रमुख पहल है, जिसके तहत देशभर में विश्वस्तरीय प्लग-एंड-प्ले इंडस्ट्रियल पार्क विकसित किए जा रहे हैं।
विशेषज्ञों ने इस बात पर जोर दिया कि AURIC की एकीकृत योजना, डिजिटल गवर्नेंस, आधुनिक यूटिलिटी इंफ्रास्ट्रक्चर और निवेशक-अनुकूल व्यवस्था से मिले अनुभवों का उपयोग भव्य योजना के तहत विकसित हो रही नई औद्योगिक परियोजनाओं में किया जाएगा।
भारत के औद्योगिक विकास को मिलेगी नई गति
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे क्रॉस-लर्निंग कार्यक्रम राज्यों के बीच ज्ञान साझा करने की संस्कृति को मजबूत करेंगे। इससे नई इंडस्ट्रियल स्मार्ट सिटीज के विकास में समय और लागत दोनों की बचत होगी, साथ ही निवेशकों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकेंगी।
सरकार का लक्ष्य भारत को वैश्विक विनिर्माण केंद्र के रूप में स्थापित करना है और इसके लिए इंडस्ट्रियल कॉरिडोर, स्मार्ट इंडस्ट्रियल सिटीज और प्लग-एंड-प्ले इंफ्रास्ट्रक्चर जैसी परियोजनाएं महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।
निष्कर्ष
महाराष्ट्र का AURIC स्मार्ट सिटी अब केवल एक औद्योगिक परियोजना नहीं, बल्कि देशभर की इंडस्ट्रियल कॉरिडोर योजनाओं के लिए रोल मॉडल बन चुका है। एनआईसीडीसी का यह क्रॉस-लर्निंग कार्यक्रम भविष्य की औद्योगिक परियोजनाओं को अधिक आधुनिक, तकनीक-संचालित और निवेशक-अनुकूल बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।


