नई दिल्ली। भारत में टेलरिंग को आमतौर पर एक पारंपरिक पेशे के रूप में देखा जाता है। अधिकांश शहरों और कस्बों में कपड़ों की सिलाई, अल्टरेशन या फिटिंग का काम करने वाले दर्जियों की कमाई सीमित मानी जाती है। लेकिन दुनिया के सबसे विकसित देशों में शामिल अमेरिका में यही काम कई लोगों के लिए शानदार कमाई का जरिया बन चुका है। सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो ने इस विषय को फिर चर्चा में ला दिया है, जिसमें दावा किया गया है कि अमेरिका में एक टेलर एक घंटे के काम के लिए 25 डॉलर तक चार्ज करता है। भारतीय मुद्रा में यह रकम लगभग 2,300 रुपये से अधिक बैठती है।
दिलचस्प बात यह है कि सिर्फ प्रति घंटे की मजदूरी ही नहीं, बल्कि छोटे-छोटे अल्टरेशन कार्यों के लिए भी वहां ग्राहक हजारों रुपये खर्च करते हैं। उदाहरण के तौर पर एक जींस की लंबाई कम कराने या फिटिंग बदलवाने के लिए 40 डॉलर यानी करीब 3,500 से 4,000 रुपये तक चुकाने पड़ सकते हैं।
अमेरिका में टेलरिंग की मांग इतनी ज्यादा क्यों है?
अमेरिका में रेडीमेड कपड़ों का बाजार बेहद बड़ा है। अधिकांश लोग कपड़े सिलवाने के बजाय ब्रांडेड रेडीमेड कपड़े खरीदना पसंद करते हैं। हालांकि हर व्यक्ति की बॉडी फिटिंग अलग होती है। यही वजह है कि खरीदे गए कपड़ों में अक्सर लंबाई, कमर या स्लीव्स में बदलाव की जरूरत पड़ती है।
यहीं से अल्टरेशन इंडस्ट्री की शुरुआत होती है। बड़ी संख्या में लोग पैंट की लंबाई कम कराने, जैकेट फिट कराने, शादी के कपड़ों को एडजस्ट कराने या महंगे ब्रांडेड कपड़ों में बदलाव कराने के लिए टेलर्स की मदद लेते हैं। इस वजह से अमेरिका में अल्टरेशन सेवाओं की लगातार मांग बनी रहती है।
भारत और अमेरिका की कमाई में कितना अंतर?
भारत में छोटे शहरों में आज भी साधारण अल्टरेशन का चार्ज 20 रुपये से 100 रुपये तक हो सकता है। वहीं शर्ट, पैंट या सूट की सिलाई के लिए ग्राहक 500 रुपये से 2,000 रुपये तक खर्च करते हैं।
इसके विपरीत अमेरिका में श्रम लागत काफी अधिक है। वहां सिर्फ समय के आधार पर ही शुल्क तय किया जाता है। यदि कोई टेलर एक घंटे में दो या तीन अल्टरेशन का काम कर लेता है, तो उसकी प्रति घंटे की कमाई 25 डॉलर से भी अधिक हो सकती है।
यानी जहां भारत में एक दर्जी पूरे दिन में जितनी कमाई करता है, अमेरिका में उतनी रकम कई बार एक घंटे में ही अर्जित की जा सकती है।
सिर्फ सिलाई नहीं, स्किल का मिलता है पैसा
अमेरिका जैसे देशों में मजदूरी का निर्धारण केवल काम के प्रकार से नहीं बल्कि स्किल लेवल के आधार पर भी होता है। अगर कोई व्यक्ति ब्राइडल गाउन, सूट अल्टरेशन, फैशन डिजाइनिंग या कस्टम टेलरिंग में विशेषज्ञता रखता है, तो उसकी कमाई सामान्य टेलर से कहीं अधिक हो सकती है।
कई टेलर स्वतंत्र रूप से काम करते हैं जबकि कुछ लोग ड्राई क्लीनिंग स्टोर्स, फैशन हाउस या अल्टरेशन सेंटर से जुड़े रहते हैं। अनुभवी टेलर अपना खुद का बुटीक या अल्टरेशन स्टूडियो खोलकर भी अच्छी आय अर्जित करते हैं।
अमेरिकी श्रम बाजार में स्किल्ड वर्कर्स की कमी
अमेरिका में पिछले कुछ वर्षों से स्किल्ड ट्रेड वर्कर्स की कमी की चर्चा होती रही है। निर्माण, प्लंबिंग, इलेक्ट्रिकल वर्क और टेलरिंग जैसे क्षेत्रों में प्रशिक्षित कर्मचारियों की उपलब्धता सीमित है।
इसी कारण इन क्षेत्रों में मजदूरी लगातार बढ़ी है। अमेरिकी श्रम बाजार से जुड़े विभिन्न अध्ययनों में यह सामने आया है कि हाथ से किए जाने वाले विशेष कौशल वाले कार्यों की मांग आने वाले वर्षों में भी बनी रह सकती है।
क्या भारतीय टेलर अमेरिका में काम कर सकते हैं?
सैद्धांतिक रूप से यदि किसी व्यक्ति के पास टेलरिंग का अच्छा अनुभव, तकनीकी कौशल और आवश्यक कानूनी वर्क परमिट है, तो वह अमेरिका में इस क्षेत्र में अवसर तलाश सकता है। हालांकि केवल कमाई के आंकड़े देखकर विदेश जाने का निर्णय लेना उचित नहीं माना जाता।
अमेरिका में रहने का खर्च, किराया, स्वास्थ्य बीमा, टैक्स और अन्य खर्च भी भारत की तुलना में काफी अधिक होते हैं। इसलिए वहां की आय को हमेशा स्थानीय जीवनयापन लागत के साथ जोड़कर देखना चाहिए।
सोशल मीडिया पर क्यों वायरल हो रही है यह कहानी?
भारत में आज भी कई लोग टेलरिंग को सीमित आय वाला पेशा मानते हैं। ऐसे में जब सोशल मीडिया पर यह जानकारी सामने आती है कि एक साधारण जींस अल्टरेशन के लिए अमेरिका में हजारों रुपये तक चार्ज किए जाते हैं, तो स्वाभाविक रूप से लोगों की दिलचस्पी बढ़ जाती है।
इस तरह के वीडियो यह भी दिखाते हैं कि दुनिया के अलग-अलग देशों में एक ही कौशल की आर्थिक कीमत कितनी अलग हो सकती है। जहां भारत में सिलाई-कटाई को पारंपरिक काम माना जाता है, वहीं अमेरिका में यही कौशल एक लाभदायक सेवा उद्योग का हिस्सा बन चुका है।
निष्कर्ष
अमेरिका में टेलरिंग केवल सिलाई का काम नहीं बल्कि एक स्किल-आधारित पेशा है, जिसकी बाजार में अच्छी मांग है। वायरल वीडियो में बताए गए आंकड़ों के अनुसार टेलर प्रति घंटे 25 डॉलर तक कमा सकते हैं और साधारण जींस अल्टरेशन के लिए भी 40 डॉलर तक शुल्क लिया जा सकता है। हालांकि वहां की कमाई को स्थानीय खर्चों के संदर्भ में समझना जरूरी है। इसके बावजूद यह उदाहरण बताता है कि सही कौशल और पेशेवर विशेषज्ञता के दम पर पारंपरिक समझे जाने वाले व्यवसाय भी विदेशों में शानदार आय का स्रोत बन सकते हैं।


