तमिलनाडु के चर्चित साथानकुलम कस्टोडियल डेथ केस में छह साल बाद बड़ा फैसला आया है। कोर्ट ने पिता-पुत्र की हिरासत में मौत के मामले में 9 पुलिसकर्मियों को मौत की सजा सुनाई है।
यह मामला 2020 में सामने आया था, जब P Jayaraj और उनके बेटे J Benicks को पुलिस हिरासत में लिया गया था और चार दिन के भीतर दोनों की मौत हो गई थी।
क्या था पूरा मामला? (2020 की घटना)
19 जून 2020 को तमिलनाडु के Sathankulam में:
- पुलिस ने लॉकडाउन उल्लंघन के आरोप में पिता-पुत्र को हिरासत में लिया
- दोनों को पुलिस स्टेशन में रातभर रखा गया
- आरोप है कि उन्हें बुरी तरह पीटा गया
गवाहों और परिवार के अनुसार, पुलिस स्टेशन के अंदर लगातार हिंसा हुई और दोनों को गंभीर चोटें आईं।
हिरासत में मौत ने मचाया था देशभर में हंगामा
- 22 जून को J Benicks की मौत
- 23 जून को P Jayaraj की मौत
- पुलिस ने “मेडिकल कारण” बताया
लेकिन पोस्टमार्टम और गवाहों के बयान में गंभीर चोटों और अत्याचार की बात सामने आई।
इस घटना के बाद पूरे देश में विरोध प्रदर्शन हुए और इसे अमेरिका के George Floyd केस से भी तुलना की गई।
कोर्ट का बड़ा फैसला: ‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर’ केस
करीब 6 साल की लंबी सुनवाई के बाद कोर्ट ने:
- 9 पुलिसकर्मियों को दोषी ठहराया
- केस को “rarest of rare” बताया
- सभी दोषियों को मौत की सजा सुनाई
कोर्ट ने इसे सत्ता के दुरुपयोग और क्रूरता का गंभीर उदाहरण बताया।
जांच में क्या-क्या सामने आया?
जांच के दौरान:
- पुलिस हिरासत में लगातार मारपीट के सबूत
- महिला कांस्टेबल की गवाही
- खून से सने कपड़े और लाठियां
- CCTV और मेडिकल रिपोर्ट्स
मामले की जांच बाद में Central Bureau of Investigation को सौंपी गई थी।
न्यायपालिका का सख्त संदेश
कोर्ट ने कहा:
“यह फैसला पुलिस बल में ईमानदारी से काम करने वालों के लिए नहीं, बल्कि कानून का दुरुपयोग करने वालों को संदेश देने के लिए है।”
निष्कर्ष
साथानकुलम केस भारत में कस्टोडियल हिंसा के खिलाफ एक ऐतिहासिक फैसला बनकर सामने आया है।
4 दिन में मौत और 6 साल बाद इंसाफ—यह केस न्याय व्यवस्था की धीमी लेकिन मजबूत प्रक्रिया को भी दिखाता है।
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