अगर आप आईपीओ (IPO) में निवेश करने के इच्छुक हैं तो आने वाले कुछ महीने आपके लिए बेहद खास साबित हो सकते हैं। भारत के दो सबसे चर्चित और बहुप्रतीक्षित आईपीओ—रिलायंस जियो (Reliance Jio) और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE)—जल्द ही बाजार में दस्तक दे सकते हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक दोनों कंपनियां इसी सप्ताह भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) के पास अपने ड्राफ्ट पेपर दाखिल कर सकती हैं।
खास बात यह है कि रिलायंस जियो का आईपीओ भारतीय शेयर बाजार के इतिहास का सबसे बड़ा आईपीओ बन सकता है। निवेशकों की निगाहें अब रिलायंस इंडस्ट्रीज की आगामी वार्षिक आम बैठक (AGM) पर टिकी हैं, जहां इस संबंध में कोई बड़ा संकेत या आधिकारिक घोषणा देखने को मिल सकती है।
देश का सबसे बड़ा IPO ला सकती है रिलायंस जियो
रिपोर्ट्स के अनुसार रिलायंस जियो करीब 4 अरब डॉलर (लगभग 34,000 करोड़ रुपये) जुटाने की तैयारी में है। यदि यह योजना सफल होती है तो यह भारत का अब तक का सबसे बड़ा आईपीओ होगा।
वर्तमान में यह रिकॉर्ड हुंडई मोटर इंडिया के नाम है, जिसने करीब 3.3 अरब डॉलर का आईपीओ लॉन्च किया था। जियो का प्रस्तावित इश्यू इस रिकॉर्ड को पीछे छोड़ सकता है और भारतीय पूंजी बाजार के इतिहास में नया अध्याय जोड़ सकता है।
बताया जा रहा है कि रिलायंस इंडस्ट्रीज की शुक्रवार को होने वाली AGM से पहले कंपनी सेबी के पास ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) जमा कर सकती है। ऐसे में AGM निवेशकों के लिए बेहद अहम रहने वाली है।
मुकेश अंबानी ने पहले ही दिया था संकेत
रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी ने पिछले साल AGM में कहा था कि जियो को 2026 की पहली छमाही में सूचीबद्ध करने की योजना है। हालांकि अब तक IPO लॉन्च नहीं हुआ है, लेकिन ताजा रिपोर्ट्स से संकेत मिल रहे हैं कि प्रक्रिया अंतिम चरण में पहुंच चुकी है।
विश्लेषकों का मानना है कि रिलायंस जियो का मजबूत ग्राहक आधार, 5G विस्तार और डिजिटल सेवाओं में बढ़ती हिस्सेदारी निवेशकों के लिए इसे आकर्षक बना सकती है।
रिलायंस के लिए चुनौतीपूर्ण रहा यह साल
रिलायंस इंडस्ट्रीज के लिए 2026 अब तक कुछ चुनौतियों से भरा रहा है। पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव का असर कंपनी के रिफाइनिंग और पेट्रोकेमिकल कारोबार पर पड़ा है।
इसके चलते:
- कंपनी के शेयरों में इस साल करीब 15% की गिरावट आई है।
- मार्च 2026 तिमाही में नेट प्रॉफिट में लगभग 13% की कमी दर्ज की गई।
- ऊर्जा कारोबार पर दबाव बढ़ा है।
ऐसे माहौल में जियो का आईपीओ रिलायंस समूह के लिए एक बड़ा सकारात्मक ट्रिगर साबित हो सकता है।
IPO स्ट्रक्चर में हुआ बड़ा बदलाव
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक रिलायंस ने जियो आईपीओ की संरचना में महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। शुरुआत में इसे ऑफर फॉर सेल (OFS) के रूप में लाने की योजना थी, लेकिन अब इसे मुख्य रूप से फ्रेश इश्यू के तौर पर पेश किया जा सकता है।
बताया जा रहा है कि मौजूदा निवेशकों के साथ वैल्यूएशन को लेकर मतभेद के बाद कंपनी ने यह बदलाव किया है। फ्रेश इश्यू के जरिए जुटाई गई राशि का उपयोग विस्तार योजनाओं और भविष्य के निवेशों में किया जा सकता है।
NSE IPO पर भी तेजी से बढ़ रहा काम
जियो के अलावा निवेशकों की निगाहें NSE IPO पर भी टिकी हुई हैं। लंबे समय से चर्चा में चल रहा नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का आईपीओ भी अब आगे बढ़ता दिखाई दे रहा है।
सूत्रों के अनुसार NSE भी इसी सप्ताह सेबी के पास अपने ड्राफ्ट दस्तावेज जमा कर सकता है। यदि ऐसा होता है तो यह भारतीय पूंजी बाजार के लिए एक और ऐतिहासिक कदम होगा।
वर्तमान में NSE के शेयर अनलिस्टेड मार्केट में करीब ₹1,950 से ₹2,050 के बीच कारोबार कर रहे हैं। इस आधार पर कंपनी का अनुमानित बाजार मूल्य लगभग ₹5 लाख करोड़ बैठता है।
क्यों खास है NSE का IPO?
NSE भारत का सबसे बड़ा स्टॉक एक्सचेंज है और इक्विटी डेरिवेटिव्स सेगमेंट में दुनिया के प्रमुख एक्सचेंजों में शामिल है। निवेशकों को लंबे समय से इसके लिस्टिंग का इंतजार है।
रिपोर्ट्स के अनुसार:
- NSE का IPO पूरी तरह OFS आधारित हो सकता है।
- कंपनी के मौजूदा शेयरधारक अपनी हिस्सेदारी बेच सकते हैं।
- IPO के बाद निवेशकों को देश के सबसे बड़े एक्सचेंज में हिस्सेदारी लेने का अवसर मिलेगा।
निवेशकों के लिए क्या है संकेत?
वर्ष 2026 की पहली छमाही में IPO बाजार अपेक्षाकृत धीमा रहा है। आंकड़ों के अनुसार अब तक केवल 23 कंपनियों ने लगभग 27,000 करोड़ रुपये जुटाए हैं। लेकिन जियो और NSE जैसे बड़े नामों की एंट्री से दूसरी छमाही में IPO बाजार में जबरदस्त उत्साह देखने को मिल सकता है।
यदि दोनों कंपनियां समय पर ड्राफ्ट पेपर दाखिल करती हैं तो आने वाले महीनों में भारतीय शेयर बाजार के इतिहास के दो सबसे चर्चित आईपीओ निवेशकों के सामने होंगे।
Disclaimer: यह खबर विभिन्न मीडिया रिपोर्ट्स और सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी पर आधारित है। रिलायंस जियो और NSE की ओर से IPO को लेकर अंतिम निर्णय, समय-सीमा या मूल्यांकन में बदलाव संभव है। शेयर बाजार में निवेश जोखिमों के अधीन है। किसी भी निवेश निर्णय से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से परामर्श अवश्य करें।


