सरकारी ठेकों में कथित अनियमितताओं को लेकर Supreme Court of India ने बड़ा आदेश दिया है। कोर्ट ने Central Bureau of Investigation को अरुणाचल प्रदेश में ठेकों के आवंटन की जांच करने के निर्देश दिए हैं।
क्या है सुप्रीम कोर्ट का आदेश?
जस्टिस Vikram Nath की अगुवाई वाली बेंच ने कहा कि:
- CBI 2 हफ्तों के भीतर प्रारंभिक जांच (Preliminary Enquiry) दर्ज करे
- 2015 से 2025 के बीच दिए गए सभी सरकारी ठेकों की जांच हो
- 16 हफ्तों के भीतर कोर्ट में स्टेटस रिपोर्ट दाखिल की जाए
किस पर लगे हैं आरोप?
मामला Pema Khandu के परिवार से जुड़ी कंपनियों को ठेके दिए जाने से संबंधित है।
याचिका में आरोप लगाया गया कि:
- करीब ₹1,270 करोड़ के सरकारी कॉन्ट्रैक्ट
- पिछले 10 वर्षों में
- CM के परिजनों से जुड़ी कंपनियों को दिए गए
कौन-कौन हैं मामले में पक्षकार?
इस मामले में निम्न लोग भी शामिल हैं:
- Rinchin Drema
- Tsering Tashi
- पूर्व मुख्यमंत्री Dorjee Khandu का भी जिक्र
याचिका में दावा किया गया कि Drema की कंपनी “Brand Eagles” को बड़ी संख्या में सरकारी ठेके मिले, जो हितों के टकराव (conflict of interest) को दर्शाता है।
किसने दायर की थी याचिका?
यह याचिका NGOs:
- Save Mon Region Federation
- Voluntary Arunachal Sena
द्वारा दायर की गई थी।
राज्य सरकार का पक्ष
अरुणाचल प्रदेश सरकार ने पहले इस याचिका को “प्रायोजित (sponsored) मुकदमा” बताया था।
हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच के आदेश दे दिए।
निष्कर्ष
सुप्रीम कोर्ट का यह आदेश पारदर्शिता और जवाबदेही की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। अब CBI की जांच से यह साफ होगा कि सरकारी ठेकों के आवंटन में कोई गड़बड़ी या हितों का टकराव हुआ है या नहीं।
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