नई दिल्ली: भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था आने वाले वर्षों में एक बड़े बदलाव के दौर से गुजर सकती है। केंद्रीय रेल, सूचना एवं प्रसारण तथा इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री Ashwini Vaishnaw ने कहा है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) डेटा सेंटर्स देश के डिजिटल विकास के अगले चरण को गति देंगे और अगले 10 वर्षों में भारत की अर्थव्यवस्था की दिशा बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
बुधवार को पुणे में जाबिल इंडिया प्राइवेट लिमिटेड की नई मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी के उद्घाटन समारोह में बोलते हुए उन्होंने कहा कि AI डेटा सेंटर्स केवल तकनीकी इंफ्रास्ट्रक्चर नहीं हैं, बल्कि भविष्य की डिजिटल अर्थव्यवस्था की मजबूत नींव बनने जा रहे हैं। उनके अनुसार, भारत जिस गति से डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन की ओर बढ़ रहा है, उसमें डेटा सेंटर्स की भूमिका बेहद अहम होगी।
AI डेटा सेंटर्स बनेंगे विकास की नई ताकत
अश्विनी वैष्णव ने कहा कि दुनिया भर में AI डेटा सेंटर्स एक बड़े ग्रोथ इंजन के रूप में उभर रहे हैं। ऐसे में भारत के लिए यह जरूरी है कि डेटा सेंटर्स में इस्तेमाल होने वाले प्रमुख इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स का निर्माण देश के भीतर ही हो। इससे न केवल आयात पर निर्भरता कम होगी बल्कि भारत वैश्विक सप्लाई चेन में भी अपनी मजबूत हिस्सेदारी बना सकेगा।
उन्होंने बताया कि जाबिल इंडिया के नए प्लांट में डेटा सेंटर से जुड़े अत्याधुनिक कंपोनेंट्स का उत्पादन शुरू हो चुका है। यह सुविधा आधुनिक तकनीक और हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग क्षमता से लैस है, जो भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर को नई ऊंचाई दे सकती है।
‘मेक इन इंडिया’ मिशन को मिलेगा बड़ा बल
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि AI डेटा सेंटर इकोसिस्टम को मजबूत करना प्रधानमंत्री के ‘मेक इन इंडिया’ विजन का अहम हिस्सा है। सरकार चाहती है कि भविष्य की तकनीकों से जुड़े अधिक से अधिक उत्पाद भारत में ही डिजाइन और निर्मित किए जाएं।
उन्होंने कहा कि सेमीकंडक्टर, सर्वर, नेटवर्किंग उपकरण और अन्य डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर कंपोनेंट्स के घरेलू निर्माण से भारत तकनीकी आत्मनिर्भरता की दिशा में तेजी से आगे बढ़ेगा।
सेमीकंडक्टर सेक्टर में तेजी से बढ़ रहा भारत
अश्विनी वैष्णव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर भी जानकारी साझा करते हुए कहा कि भारत तेजी से ग्लोबल सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग हब बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
उनके मुताबिक, देश में दो सेमीकंडक्टर प्लांट्स में व्यावसायिक उत्पादन शुरू हो चुका है। तीसरे प्लांट का उद्घाटन जुलाई में किया जाएगा, जबकि चौथा प्लांट दिसंबर तक पूरी तरह चालू होने की उम्मीद है। यह प्रगति भारत को वैश्विक चिप निर्माण उद्योग में एक मजबूत खिलाड़ी के रूप में स्थापित कर सकती है।
अगले 5-10 साल इंफ्रास्ट्रक्चर विस्तार के होंगे
मंत्री ने कहा कि आने वाले 5 से 10 साल इस बात पर निर्भर करेंगे कि भारत AI वर्कलोड के लिए आवश्यक कंप्यूटिंग क्षमता, बिजली आपूर्ति और कूलिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को कितनी तेजी से विकसित करता है।
उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार महाराष्ट्र समेत विभिन्न राज्य सरकारों के साथ मिलकर काम कर रही है ताकि हाइपरस्केलर और क्लाउड कंपनियों को बड़े पैमाने पर डेटा सेंटर स्थापित करने के लिए अनुकूल वातावरण मिल सके। इससे देश में डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार तेज होगा और निवेश के नए अवसर पैदा होंगे।
इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग बना रोजगार का बड़ा स्रोत
अश्विनी वैष्णव ने कहा कि प्रधानमंत्री की विदेश नीति और वैश्विक स्तर पर भारत की बढ़ती विश्वसनीयता के कारण दुनिया भर की कंपनियां भारत को निवेश और उत्पादन के लिए पसंदीदा गंतव्य मान रही हैं।
उन्होंने बताया कि इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग अब भारत की तीसरी सबसे बड़ी निर्यात श्रेणी बन चुकी है। इस क्षेत्र में वर्तमान में लगभग 12 लाख लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिल रहा है। आने वाले वर्षों में AI, डेटा सेंटर और सेमीकंडक्टर उद्योग के विस्तार से रोजगार के लाखों नए अवसर भी पैदा हो सकते हैं।
भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण हैं AI डेटा सेंटर्स?
विशेषज्ञों का मानना है कि AI डेटा सेंटर्स भविष्य की डिजिटल अर्थव्यवस्था का आधार होंगे। ChatGPT जैसे जनरेटिव AI मॉडल, क्लाउड सेवाएं, डिजिटल भुगतान, ई-कॉमर्स और स्मार्ट गवर्नेंस जैसी सेवाओं को बड़े पैमाने पर संचालित करने के लिए विशाल डेटा प्रोसेसिंग क्षमता की आवश्यकता होती है।
यदि भारत इस क्षेत्र में मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने में सफल रहता है, तो वह न केवल घरेलू जरूरतों को पूरा कर सकेगा बल्कि वैश्विक डेटा सेंटर हब के रूप में भी उभर सकता है। इससे निवेश, रोजगार, निर्यात और तकनीकी नवाचार को बड़ा बढ़ावा मिलने की संभावना है।
डिस्क्लेमर: यह लेख उपलब्ध सार्वजनिक जानकारी और आधिकारिक बयानों पर आधारित है। इसमें व्यक्त विचार संबंधित वक्ताओं के हैं। निवेश या व्यावसायिक निर्णय लेने से पहले विशेषज्ञ की सलाह अवश्य लें।


