Highlights
- एक्सपायरी के दिन सेंसेक्स 104 अंक और निफ्टी 31 अंक गिरकर बंद
- निफ्टी 24,400 के अहम स्तर के नीचे फिसला
- एशियाई बाजारों की कमजोरी और Fed मिनट्स से पहले निवेशक रहे सतर्क
- आईटी शेयरों ने दिखाई मजबूती, लेकिन बाकी सेक्टरों में रही बिकवाली
- एक्सपर्ट बोले- विदेशी निवेश और स्थिर रुपया आगे बाजार को दे सकते हैं सहारा
भारतीय शेयर बाजार में चार कारोबारी सत्रों की तेजी के बाद सोमवार को एक्सपायरी के दिन गिरावट देखने को मिली। दिनभर उतार-चढ़ाव के बाद बीएसई सेंसेक्स 104.35 अंक (0.13%) टूटकर 78,180.72 पर बंद हुआ, जबकि एनएसई निफ्टी 50, 31.65 अंक (0.13%) की गिरावट के साथ 24,398.70 पर बंद हुआ। इसके साथ ही निफ्टी एक बार फिर 24,400 के महत्वपूर्ण स्तर से नीचे फिसल गया।
हालांकि बाजार में बड़ी गिरावट नहीं रही, लेकिन निवेशकों ने वैश्विक संकेतों और आगामी प्रमुख घटनाओं को देखते हुए मुनाफावसूली को प्राथमिकता दी।
इन शेयरों में रही सबसे ज्यादा हलचल
निफ्टी के टॉप गेनर्स में इन्फोसिस, टेक महिंद्रा, एचसीएल टेक्नोलॉजीज, टाइटन कंपनी और एसबीआई लाइफ इंश्योरेंस शामिल रहे। दूसरी ओर ट्रेंट, अदाणी एंटरप्राइजेज, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स (BEL), अदाणी पोर्ट्स और सिप्ला के शेयरों में सबसे ज्यादा गिरावट दर्ज की गई।
सेक्टोरल इंडेक्स का हाल
अधिकांश सेक्टोरल इंडेक्स लाल निशान में बंद हुए।
- निफ्टी आईटी में 2.4% की शानदार बढ़त
- निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स 0.9% चढ़ा
- निफ्टी रियल्टी 1.5% टूटकर सबसे कमजोर सेक्टर रहा
- निफ्टी मेटल में 1% की गिरावट
- निफ्टी एनर्जी, फार्मा और मीडिया करीब 0.7% फिसले
- निफ्टी मिडकैप 100 में 0.4% और स्मॉलकैप 100 में 0.55% की गिरावट दर्ज हुई
आखिर क्यों आई बाजार में गिरावट?
जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के रिसर्च हेड विनोद नायर के अनुसार, बाजार में गिरावट के पीछे कई प्रमुख कारण रहे।
1. एशियाई बाजारों में कमजोरी
एशियाई शेयर बाजारों में दबाव का असर भारतीय बाजार पर भी देखने को मिला, जिससे निवेशकों का भरोसा कमजोर हुआ।
2. अमेरिकी फेडरल रिजर्व से पहले सतर्कता
अमेरिकी फेडरल रिजर्व से जुड़े महत्वपूर्ण संकेतों और आगामी अपडेट से पहले निवेशकों ने नई खरीदारी से दूरी बनाई और मुनाफावसूली की।
3. एक्सपायरी डे का दबाव
डेरिवेटिव्स एक्सपायरी के दिन आमतौर पर बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ जाता है। इसी वजह से ट्रेडर्स ने कई पोजिशन काटीं, जिससे बाजार पर दबाव बना।
4. आईटी शेयरों ने संभाला बाजार
जून तिमाही के नतीजों से पहले आईटी कंपनियों में खरीदारी जारी रही। हालिया करेक्शन के बाद इस सेक्टर में रिकवरी देखने को मिली, जिसने बड़ी गिरावट को सीमित रखा।
आगे किन बातों पर रहेगी बाजार की नजर?
विशेषज्ञों के मुताबिक आने वाले दिनों में बाजार की दिशा इन कारकों से तय हो सकती है—
- कंपनियों के पहली तिमाही (Q1) के वित्तीय नतीजे
- मानसून की प्रगति और उससे जुड़ी आर्थिक गतिविधियां
- वैश्विक स्तर पर टैरिफ और भू-राजनीतिक घटनाक्रम
- विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की खरीदारी
- रुपये की चाल और अमेरिकी फेड की नीति
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि विदेशी निवेश का प्रवाह जारी रहता है और रुपया स्थिर बना रहता है, तो निकट अवधि में भारतीय शेयर बाजार को समर्थन मिल सकता है।
डिस्क्लेमर: यह लेख केवल जानकारी के उद्देश्य से है। शेयर बाजार में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। किसी भी निवेश निर्णय से पहले अपने वित्तीय सलाहकार या प्रमाणित निवेश सलाहकार से परामर्श अवश्य करें।


