मुंबई | 29 अप्रैल 2026 भारतीय मुद्रा बुधवार को शुरुआती कारोबार में कमजोर दिखी। रुपया 13 पैसे गिरकर 94.81 प्रति डॉलर पर पहुंच गया। विदेशी बाजारों में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और महीने के अंत में डॉलर की मांग बढ़ने से रुपये पर दबाव बना हुआ है।
क्यों गिरा रुपया?
फॉरेक्स बाजार के जानकारों के मुताबिक, इस गिरावट के पीछे कई अहम कारण हैं:
1. कच्चे तेल की कीमतों में उछाल
भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है।
ऐसे में Crude Oil महंगा होने से डॉलर की मांग बढ़ती है, जिससे रुपया कमजोर होता है।
2. महीने के अंत में डॉलर की डिमांड
- कंपनियां आयात भुगतान के लिए डॉलर खरीदती हैं
- इससे बाजार में डॉलर की मांग बढ़ती है
3. सेफ-हेवन एसेट्स की ओर झुकाव
वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच निवेशक:
जोखिम वाले एसेट छोड़कर सुरक्षित निवेश (जैसे डॉलर) की ओर जा रहे हैं
अब नजर किस पर?
बाजार की नजर अब US Federal Reserve की आने वाली मौद्रिक नीति बैठक पर है।
एक्सपर्ट्स का कहना है:
- ब्याज दरों में बदलाव की संभावना कम है
- लेकिन फेड का रुख (tone) ज्यादा महत्वपूर्ण रहेगा
अगर फेड सख्त संकेत देता है, तो:
- डॉलर मजबूत हो सकता है
- रुपया और दबाव में आ सकता है
बड़ा संकेत: सिर्फ 13 पैसे नहीं, ट्रेंड महत्वपूर्ण
यह गिरावट भले ही छोटी लगे, लेकिन संकेत बड़ा है:
- कच्चे तेल में तेजी
- वैश्विक तनाव
- विदेशी निवेश में अनिश्चितता
ये तीनों मिलकर आने वाले समय में रुपये पर और दबाव बना सकते हैं
आम आदमी पर असर
रुपये की कमजोरी का असर सीधे आपकी जेब पर पड़ सकता है:
- पेट्रोल-डीजल महंगे हो सकते हैं
- आयातित सामान की कीमत बढ़ सकती है
- महंगाई पर दबाव बढ़ सकता है
NewsJagran Insight
रुपये की यह गिरावट एक शॉर्ट-टर्म उतार-चढ़ाव नहीं, बल्कि बड़े आर्थिक ट्रेंड का हिस्सा है।
अगर कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी रहीं और वैश्विक माहौल तनावपूर्ण रहा, तो:
- रुपये में और कमजोरी संभव
- RBI को दखल देना पड़ सकता है
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