नई दिल्ली। भारत तेजी से दुनिया के प्रमुख iPhone मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में उभर रहा है। Apple चीन पर निर्भरता कम करने के लिए भारत में उत्पादन बढ़ा रही है और इस रणनीति में Tata Electronics की भूमिका लगातार मजबूत होती जा रही है। लेकिन अब तमिलनाडु में स्थित टाटा की एक अहम फैक्ट्री पर बंदी का खतरा मंडरा रहा है।
Highlights
- तमिलनाडु के होसुर स्थित टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स प्लांट पर बंदी का खतरा
- किसानों ने भूजल प्रदूषण और गंदे पानी की शिकायत की
- प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने टाटा को नोटिस जारी किया
- Apple की सप्लाई चेन के लिए अहम है यह फैक्ट्री
- भारत में iPhone निर्माण बढ़ाने की योजना को लग सकता है झटका
रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक तमिलनाडु प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (TNPCB) ने टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स को नोटिस जारी करते हुए गंभीर पर्यावरणीय उल्लंघनों पर जवाब मांगा है। बोर्ड का आरोप है कि फैक्ट्री से निकलने वाले अपशिष्ट जल (Wastewater) ने आसपास के कृषि क्षेत्रों और भूजल स्रोतों को प्रभावित किया है। यदि कंपनी का जवाब संतोषजनक नहीं पाया जाता है तो यूनिट की बिजली काटने और संचालन बंद कराने जैसी कार्रवाई की जा सकती है।
क्या है पूरा मामला?
विवाद तमिलनाडु के होसुर स्थित टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स प्लांट से जुड़ा है। यह यूनिट Apple के iPhone के लिए बैक पैनल और अन्य महत्वपूर्ण कंपोनेंट्स का निर्माण करती है। Apple की वैश्विक सप्लाई चेन में यह प्लांट महत्वपूर्ण माना जाता है।
स्थानीय किसानों ने आरोप लगाया कि फैक्ट्री से निकलने वाला दूषित पानी आसपास की कृषि भूमि और खुले कुओं तक पहुंच रहा है। किसानों का कहना है कि इससे भूजल की गुणवत्ता प्रभावित हुई है और खेती पर भी असर पड़ सकता है।
शिकायतों के बाद तमिलनाडु प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने दिसंबर 2025 से मई 2026 के बीच कई बार निरीक्षण किया। जांच के बाद बोर्ड ने 25 मई 2026 को टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स को नोटिस जारी किया।
जांच में क्या मिला?
प्रदूषण बोर्ड के नोटिस के अनुसार निरीक्षण के दौरान पाया गया कि फैक्ट्री परिसर में बने रेनवाटर हार्वेस्टिंग तालाब में अपशिष्ट जल छोड़ा गया था। आरोप है कि तालाब के ओवरफ्लो होने के बाद यह पानी आसपास के क्षेत्रों में फैल गया और खुले कुओं के भूजल को प्रभावित किया।
नोटिस में यह भी कहा गया कि बोर्ड द्वारा दिसंबर 2025 में जारी कुछ निर्देशों का पर्याप्त पालन नहीं किया गया। इसी आधार पर कंपनी से स्पष्टीकरण मांगा गया है।
बोर्ड ने चेतावनी दी है कि यदि नियमों के उल्लंघन के आरोपों का संतोषजनक जवाब नहीं मिला तो प्लांट के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा सकती है।
टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स ने क्या कहा?
टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स ने सभी आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि कंपनी पर्यावरणीय नियमों का पूरी तरह पालन करती है।
कंपनी के अनुसार एक मान्यता प्राप्त स्वतंत्र प्रयोगशाला द्वारा किए गए परीक्षणों में यह पाया गया कि यूनिट सभी नियामकीय मानकों के अनुरूप काम कर रही है। टाटा का कहना है कि उसने प्रदूषण नियंत्रण अधिकारियों को अपना जवाब भी भेज दिया है।
कंपनी ने यह भी कहा कि वह जिम्मेदार कारोबारी प्रथाओं, पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय समुदायों की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है।
हालांकि कंपनी ने अपने जवाब की विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की है।
Apple के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह मामला?
Apple पिछले कुछ वर्षों से चीन पर अपनी निर्भरता कम करने की कोशिश कर रही है। इसके लिए भारत सबसे महत्वपूर्ण मैन्युफैक्चरिंग केंद्र बनकर उभरा है।
बाजार विश्लेषकों का अनुमान है कि 2026 में दुनिया में बनने वाले कुल iPhone का लगभग 26% हिस्सा भारत में तैयार होगा। कुछ साल पहले यह आंकड़ा एकल अंक में था।
भारत में Apple के प्रमुख सप्लायर्स में Foxconn, Tata Electronics और Pegatron शामिल हैं। इनमें Foxconn सबसे बड़ी सप्लायर है जबकि Tata Electronics तेजी से अपनी क्षमता बढ़ा रही है।
यदि होसुर प्लांट के संचालन पर कोई असर पड़ता है तो Apple की भारत केंद्रित विस्तार रणनीति को अस्थायी झटका लग सकता है।
भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर पर क्या होगा असर?
पिछले कुछ वर्षों में भारत सरकार ने इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए PLI (Production Linked Incentive) जैसी योजनाएं शुरू की हैं। इसके चलते Apple और उसके सप्लायर्स ने भारत में अरबों डॉलर का निवेश किया है।
टाटा समूह ने भी Apple सप्लाई चेन में अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए कई बड़े निवेश किए हैं। कंपनी ने Wistron की भारतीय इकाई का अधिग्रहण किया और अब iPhone निर्माण में तेजी से विस्तार कर रही है।
ऐसे में किसी भी तरह का नियामकीय विवाद निवेशकों और उद्योग जगत दोनों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
क्या बंद हो सकती है फैक्ट्री?
फिलहाल फैक्ट्री को बंद करने का कोई अंतिम आदेश जारी नहीं हुआ है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने केवल कारण बताओ नोटिस (Show Cause Notice) जारी किया है।
अब मामला कंपनी के जवाब और आगे की जांच पर निर्भर करेगा। यदि बोर्ड कंपनी के स्पष्टीकरण से संतुष्ट हो जाता है तो मामला सुलझ सकता है। लेकिन यदि उल्लंघन साबित होते हैं तो नियामकीय कार्रवाई की संभावना बनी रहेगी।
आगे क्या देखना होगा?
आने वाले दिनों में निवेशकों और उद्योग विशेषज्ञों की नजर तीन प्रमुख बिंदुओं पर रहेगी:
पहला, टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स का आधिकारिक जवाब और उसका तकनीकी आधार।
दूसरा, तमिलनाडु प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की अंतिम जांच रिपोर्ट।
तीसरा, Apple और तमिलनाडु सरकार की संभावित प्रतिक्रिया।
यदि मामला जल्दी सुलझ जाता है तो उत्पादन पर असर सीमित रह सकता है। लेकिन विवाद लंबा खिंचने पर Apple की सप्लाई चेन और भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर पर इसका असर देखने को मिल सकता है।
(स्रोत: Reuters, Tamil Nadu Pollution Control Board नोटिस, कंपनी बयान)


