Pocket FM Success Story: कभी दिल्ली मेट्रो के लंबे और उबाऊ सफर के दौरान आया एक आइडिया आज हजारों करोड़ रुपये की कंपनी में बदल चुका है। तीन दोस्तों ने 2018 में जिस ऑडियो प्लेटफॉर्म की शुरुआत की थी, वह आज 20 से ज्यादा देशों में पहुंच चुका है। कंपनी के प्लेटफॉर्म पर लाखों घंटे का ऑडियो कंटेंट उपलब्ध है और इसके यूजर्स की संख्या करोड़ों में है। खास बात यह है कि इस सफर की शुरुआत किसी बड़े कॉर्पोरेट ऑफिस से नहीं, बल्कि एक छोटे से अपार्टमेंट से हुई थी।
हम बात कर रहे हैं Pocket FM की, जिसे रोहन नायक, निशांत केएस और प्रतीक दीक्षित ने मिलकर शुरू किया था। कंपनी ने ऑडियो फिक्शन को मनोरंजन के एक नए फॉर्मेट के तौर पर पेश किया और धीरे-धीरे भारत से निकलकर ग्लोबल मार्केट में अपनी पहचान बनाई।
Highlights
- तीन दोस्तों ने 2018 में शुरू किया था Pocket FM
- दिल्ली मेट्रो के सफर से आया ऑडियो फिक्शन का बिजनेस आइडिया
- करीब ₹7,150 करोड़ की बताई जाती है कंपनी की वैल्यूएशन
- 20 से ज्यादा देशों में पहुंच चुका है प्लेटफॉर्म
- 25 करोड़ से ज्यादा यूजर्स का ग्लोबल लिसनर बेस
- 75,000 से ज्यादा ऑडियो सीरीज उपलब्ध होने का दावा
Pocket FM क्या है?
Pocket FM एक ऑडियो एंटरटेनमेंट प्लेटफॉर्म है, जहां यूजर्स अलग-अलग तरह की कहानियां और ऑडियो सीरीज सुन सकते हैं। प्लेटफॉर्म का खास फोकस ऑडियो फिक्शन पर है। इसमें रोमांस, थ्रिलर, ड्रामा, हॉरर, फैंटेसी और दूसरी कई कैटेगरी की कहानियां शामिल हैं।
आज के समय में जब लोग वीडियो कंटेंट देखने में काफी समय बिताते हैं, Pocket FM ने इसी व्यवहार का एक ऑडियो विकल्प तैयार किया। इसका फायदा यह है कि कहानी सुनने के लिए यूजर को लगातार स्क्रीन देखने की जरूरत नहीं होती। वह सफर करते हुए, जिम में एक्सरसाइज करते हुए या घर का काम करते हुए भी कहानी सुन सकता है।
इसी वजह से कंपनी को कई जगह “ऑडियो के लिए Netflix” के तौर पर भी पेश किया गया है।
दिल्ली मेट्रो के सफर में आया बिजनेस आइडिया
हर बड़े स्टार्टअप की शुरुआत किसी शानदार ऑफिस या बड़े निवेश से नहीं होती। Pocket FM की कहानी भी कुछ ऐसी ही है।
रोहन नायक और उनके साथियों को दिल्ली मेट्रो में सफर के दौरान एक समस्या महसूस हुई। रोजाना लंबे सफर में लोगों के पास समय तो था, लेकिन ऐसा ऑडियो कंटेंट कम था जिसे वे लंबे समय तक लगातार सुन सकें।
म्यूजिक और सामान्य पॉडकास्ट सुनने के बाद उन्हें लगा कि लोगों के लिए ऐसी कहानियों की जरूरत है, जिनसे वे लगातार जुड़े रहें और अगला एपिसोड सुनने की उत्सुकता बनी रहे।
यहीं से सीरियलाइज्ड ऑडियो फिक्शन का आइडिया सामने आया।
फाउंडर्स ने इस विचार को सिर्फ एक कंटेंट प्रोजेक्ट की तरह नहीं देखा, बल्कि इसे एक बड़े बिजनेस मॉडल में बदलने का फैसला किया। साल 2018 में Pocket FM की शुरुआत हुई।
एक छोटे अपार्टमेंट से शुरू हुआ सफर
शुरुआत में तीनों फाउंडर्स ने बेंगलुरु के एक छोटे से अपार्टमेंट से काम किया। उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि ऐसा कंटेंट मॉडल कैसे तैयार किया जाए जिसे लोग लंबे समय तक सुनना पसंद करें।
शुरुआती दौर में कंपनी ने कई तरह के फॉर्मेट आजमाए। लाइव रेडियो, न्यूज और पॉडकास्ट जैसे कंटेंट फॉर्मेट पर भी प्रयोग किया गया। लेकिन इन कोशिशों से उम्मीद के मुताबिक सफलता नहीं मिली।
स्टार्टअप के लिए यह दौर काफी मुश्किल था। कंपनी को यह समझना था कि आखिर ऐसा कौन-सा कंटेंट तैयार किया जाए जिसके लिए यूजर्स बार-बार प्लेटफॉर्म पर वापस आएं।
लगभग 18 महीने के प्रयोगों के बाद फाउंडर्स को ऑडियो फिक्शन में वह अवसर दिखाई दिया, जिसकी उन्हें तलाश थी।
2019 में कंपनी के सामने आया बड़ा संकट
स्टार्टअप की सफलता की कहानी सुनना आसान है, लेकिन उसके पीछे के संघर्ष को अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है। Pocket FM के साथ भी ऐसा ही हुआ।
कंपनी के शुरुआती प्रयोग उम्मीद के मुताबिक काम नहीं कर रहे थे। 2019 में स्थिति इतनी चुनौतीपूर्ण हो गई कि स्टार्टअप के सामने कारोबार बंद होने का खतरा पैदा हो गया था।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, उस समय कंपनी के पास बेहद सीमित कैश था और फाउंडर्स के पास कारोबार को आगे बढ़ाने के लिए लगभग एक हफ्ते का ही रनवे बचा था।
यही वह समय था जब कंपनी के लिए सबसे बड़ा बदलाव आया।
फाउंडर्स ने कंटेंट के फॉर्मेट और स्टोरीटेलिंग मॉडल पर दोबारा ध्यान दिया। उन्हें समझ आया कि यूजर्स ऐसी कहानियां पसंद करते हैं जिनमें हर एपिसोड के बाद अगला एपिसोड सुनने की उत्सुकता पैदा हो।
यहीं से Pocket FM ने सीरियलाइज्ड फिक्शन को अपने बिजनेस का मुख्य आधार बनाना शुरू किया।
ऑडियो कहानियों ने बदल दी कंपनी की किस्मत
Pocket FM का मॉडल पारंपरिक पॉडकास्ट से थोड़ा अलग है। यहां कई कहानियों को एपिसोडिक फॉर्मेट में पेश किया जाता है। कहानी आगे बढ़ती रहती है और यूजर अगले एपिसोड के लिए प्लेटफॉर्म पर लौटता है।
इस मॉडल ने कंपनी को एक ऐसा ऑडियो अनुभव बनाने में मदद की, जिसमें यूजर किसी कहानी के साथ लंबे समय तक जुड़ा रह सकता है।
कंपनी ने डेटा और टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करके यह समझने की कोशिश की कि यूजर्स किस तरह की कहानियां सुनना पसंद करते हैं। इसी आधार पर कंटेंट तैयार करने और उसे बेहतर बनाने पर जोर दिया गया।
यही रणनीति आगे चलकर Pocket FM के ग्लोबल विस्तार में भी काम आई।
75,000 से ज्यादा ऑडियो सीरीज
कंपनी के अनुसार, Pocket FM के प्लेटफॉर्म पर 75,000 से ज्यादा ऑडियो सीरीज उपलब्ध हैं। इसमें अलग-अलग भाषाओं और जॉनर की कहानियां शामिल हैं।
कंपनी के कंटेंट की कुल लाइब्रेरी भी काफी बड़ी बताई जाती है। रिपोर्ट्स में प्लेटफॉर्म पर 1 लाख घंटे से ज्यादा ऑडियो कंटेंट उपलब्ध होने का उल्लेख किया गया है।
यह कंटेंट खास तौर पर उन लोगों को ध्यान में रखकर तैयार किया जाता है जो स्क्रीन देखे बिना मनोरंजन करना चाहते हैं।
सफर के दौरान मोबाइल पर वीडियो देखने की जगह ऑडियो सुनना हो या घर के काम के दौरान कहानी का आनंद लेना हो, ऑडियो फॉर्मेट यूजर को मल्टीटास्किंग की सुविधा देता है।
भारत से निकलकर ग्लोबल मार्केट तक पहुंचा कारोबार
Pocket FM की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक उसका अंतरराष्ट्रीय विस्तार है।
कंपनी भारत से शुरू हुई, लेकिन बाद में अमेरिका और दूसरे अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी पहुंच बनाई। आज कंपनी के कारोबार की मौजूदगी 20 से ज्यादा देशों में बताई जाती है।
इसके ग्लोबल लिसनर बेस में करोड़ों यूजर्स शामिल हैं। कंपनी के अनुसार, प्लेटफॉर्म के यूजर्स की संख्या 25 करोड़ से ज्यादा हो चुकी है।
अमेरिका जैसे बाजार में भी ऑडियो फिक्शन को लोकप्रिय बनाने की दिशा में कंपनी ने काम किया है। इसके अलावा यूरोप, लैटिन अमेरिका और दक्षिण-पूर्व एशिया के बाजारों में भी इसका विस्तार हुआ है।
यह विस्तार दिखाता है कि अच्छी कहानी और सही कंटेंट फॉर्मेट की मांग किसी एक देश तक सीमित नहीं रहती।
₹7,150 करोड़ की वैल्यूएशन और बड़ी फंडिंग
Pocket FM की ग्रोथ ने निवेशकों का ध्यान भी खींचा। रिपोर्ट्स के मुताबिक कंपनी की वैल्यूएशन करीब ₹7,150 करोड़ तक पहुंच चुकी है।
कंपनी को अलग-अलग दौर में करीब ₹1,875 करोड़ की फंडिंग मिलने की बात भी सामने आई है। इसमें कई बड़े ग्लोबल निवेशकों ने हिस्सा लिया है।
लाइटस्पीड, स्टेपस्टोन, टैंगलिन वेंचर पार्टनर्स, गुडवाटर कैपिटल और नेवर जैसे निवेशकों का नाम Pocket FM से जुड़े निवेश में सामने आया है।
स्टार्टअप के लिए यह फंडिंग केवल पूंजी जुटाने तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसका इस्तेमाल कंटेंट लाइब्रेरी बढ़ाने, टेक्नोलॉजी विकसित करने और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में विस्तार के लिए भी किया गया।
Pocket FM की कहानी से क्या सीख मिलती है?
Pocket FM की कहानी सिर्फ एक सफल स्टार्टअप की कहानी नहीं है। इसमें उन उद्यमियों के लिए भी कई सबक हैं जो किसी समस्या को बिजनेस अवसर में बदलना चाहते हैं।
सबसे पहली सीख यह है कि आइडिया हमेशा बड़े ऑफिस में नहीं आता। तीन दोस्तों ने एक सामान्य सफर के दौरान लोगों की समस्या को पहचाना और उसी से बिजनेस का विचार निकाला।
दूसरी महत्वपूर्ण बात है कि शुरुआती असफलता का मतलब हमेशा बिजनेस का अंत नहीं होता। Pocket FM ने भी लाइव रेडियो, न्यूज और पॉडकास्ट जैसे कई मॉडल आजमाए। जब ये प्रयोग सफल नहीं हुए, तब फाउंडर्स ने मॉडल बदलने का फैसला किया।
तीसरी सीख कंटेंट की ताकत से जुड़ी है। कंपनी ने केवल एक ऑडियो ऐप बनाने के बजाय ऐसा कंटेंट इकोसिस्टम तैयार किया, जहां यूजर एक कहानी खत्म करने के बाद दूसरी कहानी शुरू कर सके।
यही रणनीति आज Pocket FM को भारत से निकलकर ग्लोबल ऑडियो एंटरटेनमेंट की दुनिया में एक बड़ा नाम बनाने में मदद कर रही है।
मेट्रो की बोरियत से करोड़ों यूजर्स तक का सफर
कुछ साल पहले तक दिल्ली मेट्रो का एक लंबा सफर तीन दोस्तों के लिए सिर्फ बोरियत का कारण था। लेकिन उसी बोरियत ने उन्हें एक ऐसी समस्या दिखाई, जिसमें बिजनेस का बड़ा अवसर छिपा था।
2018 में शुरू हुआ Pocket FM पहले एक छोटे अपार्टमेंट से चला, शुरुआती प्रयोगों में असफल हुआ और एक समय आर्थिक संकट में भी पहुंचा। लेकिन फाउंडर्स ने अपना मॉडल बदला और ऑडियो फिक्शन को केंद्र में रखा।
आज कंपनी 20 से ज्यादा देशों में मौजूदगी, करोड़ों यूजर्स और हजारों करोड़ रुपये की बताई जा रही वैल्यूएशन के साथ एक ग्लोबल ऑडियो प्लेटफॉर्म बन चुकी है।
यानी जिस सफर में कभी सिर्फ बोरियत नजर आती थी, उसी सफर ने तीन दोस्तों को ऐसा आइडिया दिया जिसने उनकी पूरी जिंदगी बदल दी।


